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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला: नफरत की राजनीति से यूपी में समाज बंटवारे का आरोप

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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला: नफरत की राजनीति से यूपी में समाज बंटवारे का आरोप

सारांश

अखिलेश यादव ने शनिवार को भाजपा पर 'नफरत की राजनीति' से समाज बांटने का आरोप लगाया। अजय सेठ वीडियो पर FIR से लेकर बेरोज़गारी, महंगाई और पुलिस ज़्यादती तक — सपा प्रमुख ने एक साथ कई मोर्चे खोले, और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए एकता को अपनी रणनीति का केंद्र बताया।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में भाजपा पर 'नफरत की राजनीति' से समाज बांटने का आरोप लगाया।
अजय सेठ का वीडियो साझा करने पर दर्ज FIR को अखिलेश ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया।
श्रावस्ती के पूर्व विधायक और बलरामपुर के जगराम पासवान का ज़िक्र करते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
अखिलेश ने DUSU चुनावों का हवाला देकर उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की माँग की।
सपा प्रमुख ने पीडीए को एकजुट कर 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने का संकल्प दोहराया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा 'नफरत की राजनीति' के ज़रिए उत्तर प्रदेश में समाज को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर कई सवाल दागे।

अजय सेठ वीडियो और मुकदमे पर तंज

सपा प्रमुख ने अजय सेठ से जुड़े एक वीडियो को साझा करने पर एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का हवाला देते हुए कहा कि 'जो इस वीडियो को देखेगा, उस पर भी मुकदमा होगा।' उन्होंने श्रावस्ती में एक पूर्व विधायक के खिलाफ वीडियो शेयर करने पर दर्ज एफआईआर का ज़िक्र किया और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया।

उन्होंने बलरामपुर में जगराम पासवान का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार की कार्रवाई को लेकर जनता के बीच गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रायबरेली में बच्चों के एक कार्यक्रम को रुकवाए जाने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'ये भाजपा वाले कुछ भी कर सकते हैं।'

पीडीए समाज पर अत्याचार का आरोप

अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के लोगों के साथ अत्याचार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा स्वजातीय लोगों को बढ़ावा देना चाहती है और इससे सामाजिक असंतुलन बढ़ रहा है। उनके अनुसार सरकार की नीतियों का सबसे ज़्यादा असर पीडीए, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद उत्तर प्रदेश महिला अपराध, फर्जी एनकाउंटर और पुलिस हिरासत में मौतों के मामले में देश में पहले स्थान पर है — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सवाल

सपा अध्यक्ष ने बेरोज़गारी को लेकर कहा कि नौजवानों को रोज़गार नहीं मिल रहा और वे आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का ज़िक्र करते हुए कहा कि लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा और शुद्ध पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्कूल बंद हो रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था चौपट है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनावों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की माँग की और पूछा कि जब दिल्ली में यह संभव है तो यूपी में क्यों नहीं।

महंगाई और रुपये की हालत पर कटाक्ष

अखिलेश यादव ने महंगाई पर बोलते हुए कहा कि देश में इन दिनों 'दीयों का कंपटीशन' चल रहा है और जो लोग पहले डॉलर और रुपये की तुलना करते थे, उन्हें अब रुपये की वर्तमान स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास अपनी उपलब्धियों के नाम पर जनता को दिखाने के लिए समाजवादी सरकार के कार्यकाल में हुए काम ही बचे हैं।

2027 चुनाव की तैयारी और पीडीए एकता का संकल्प

सपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पीडीए को एकजुट कर उत्तर प्रदेश से भाजपा का 'सफाया' करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से हटाना लोकतंत्र और प्रदेश के भविष्य के हित में ज़रूरी है। गौरतलब है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सपा की ओर से इस तरह के हमले और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजनीतिक बयानबाज़ी को वास्तविक जमीन देता है। असली सवाल यह है कि सपा इन मुद्दों को सड़क पर कितना उतार पाती है — क्योंकि 2022 में भी पीडीए नारा था, पर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। भाजपा की चुप्पी या पलटवार इस बहस की दिशा तय करेगा। 2027 से पहले यूपी में विपक्षी एकता की असली परीक्षा इन्हीं जमीनी मुद्दों पर होगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा 'नफरत की राजनीति' के ज़रिए उत्तर प्रदेश में समाज को बांट रही है। उन्होंने महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, महिला अपराध और पीडीए समाज पर अत्याचार के मुद्दे भी उठाए।
अजय सेठ वीडियो और FIR का मामला क्या है?
अखिलेश यादव के अनुसार, अजय सेठ से जुड़ा एक वीडियो साझा करने पर एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। श्रावस्ती में एक पूर्व विधायक पर भी ऐसा ही मामला दर्ज होने का उन्होंने हवाला दिया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
अखिलेश यादव ने छात्रसंघ चुनाव पर क्या कहा?
सपा प्रमुख ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनावों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए।
पीडीए क्या है और अखिलेश यादव की 2027 रणनीति क्या है?
पीडीए का अर्थ है पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक — सपा की मूल मतदाता पहचान। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी पीडीए को एकजुट कर 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए संकल्पित है।
अखिलेश यादव ने महंगाई और रुपये पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग पहले डॉलर और रुपये की तुलना करते थे, उन्हें अब रुपये की वर्तमान स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास जनता को दिखाने के लिए समाजवादी सरकार के कार्यकाल में हुए काम ही बचे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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