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ईरान में बढ़ती महंगाई 'चिंता का विषय', 75,000 घर क्षतिग्रस्त; गृह मंत्रालय ने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

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ईरान में बढ़ती महंगाई 'चिंता का विषय', 75,000 घर क्षतिग्रस्त; गृह मंत्रालय ने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

सारांश

अमेरिकी हमलों और पश्चिमी प्रतिबंधों से दोहरी मार झेल रहे ईरान के गृह मंत्रालय ने महंगाई को सरकारी स्तर पर 'चिंता का विषय' स्वीकारा है। 75,000 क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत सर्वोच्च प्राथमिकता है, जबकि इस्लामाबाद समझौते पर कूटनीतिक दाँव अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अली जेनीवंद ने 19 सितंबर 2026 को प्रेस ब्रीफिंग में बढ़ती कीमतों को 'चिंता का विषय' करार दिया।
अमेरिकी हमलों में होर्मोजगन और गोलेस्तान सहित कई प्रांतों में लगभग 75,000 घर और बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त।
सरकार ने आवासीय और सार्वजनिक इमारतों की मरम्मत को हर गैर जरूरी सरकारी परियोजना से ऊपर प्राथमिकता दी।
रिकॉर्ड महंगाई का कारण दशकों पुराने पश्चिमी प्रतिबंध बताए गए।
इस्लामाबाद समझौते पर वापसी की कोशिशें जारी; ब्रिक्स और शंघाई बैठकों में सक्रिय कूटनीति।

ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अली जेनीवंद ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक प्रेस ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों और दशकों पुराने पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण मूलभूत वस्तुओं की कीमतों में आई उछाल देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि होर्मोजगन और गोलेस्तान सहित कई प्रांतों में लगभग 75,000 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, और इनकी मरम्मत को हर अन्य सरकारी परियोजना से ऊपर रखा गया है।

बुनियादी ढाँचे की स्थिति

जेनीवंद के अनुसार हमलों ने न केवल आवासीय इमारतों को प्रभावित किया, बल्कि पुलिस स्टेशन जैसे सार्वजनिक सेवा केंद्र और शहरों को जोड़ने वाले पुल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रवक्ता ने कहा, "रिहायशी इमारतों, घरों और पुलिस स्टेशन जैसे सार्वजनिक सेवा केंद्रों की मरम्मत को किसी भी गैर जरूरी सरकारी प्रोजेक्ट से ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। इस समय देश की प्राथमिकता नुकसान झेल चुके लोगों के लिए बुनियादी ढाँचे को फिर से तैयार करना है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान की अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव लगातार बढ़ रहे हैं।

महंगाई और पश्चिमी प्रतिबंध

अर्ध सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, जेनीवंद ने रिकॉर्ड महंगाई के लिए दशकों से चले आ रहे पश्चिमी प्रतिबंधों को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "बढ़ती कीमतें लोगों के लिए चिंता का विषय हैं और सभी अधिकारी इस समस्या को हल करने के लिए काम कर रहे हैं।" गौरतलब है कि ईरानी रियाल पहले से ही ऐतिहासिक निम्न स्तरों के आसपास है, जिससे आयातित वस्तुओं की कीमतें आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं।

कूटनीतिक प्रयास और इस्लामाबाद समझौता

अमेरिका के साथ चल रही वार्ता पर जेनीवंद ने कहा, "मुद्दों को सुलझाने और इस्लामाबाद समझौते पर वापस लौटने की कोशिशें और कूटनीति के जरिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान चाहता है कि दूसरा पक्ष इस समझौते के तहत अपने वादों को पूरा करे। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि यह समझौता सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा अनुमोदित और सर्वोच्च नेता द्वारा पुष्टि किया हुआ है, इसलिए इसे व्यवस्था का आधिकारिक निर्णय माना जाता है।

ब्रिक्स और शंघाई बैठकों से उम्मीदें

प्रवक्ता ने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति ने भारत और किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई और ब्रिक्स बैठकों में सक्रिय भागीदारी की और गहन द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं। तेहरान को उम्मीद है कि इन बहुपक्षीय मंचों पर बनी कूटनीतिक गति को आगे बढ़ाकर आर्थिक दबाव को कम किया जा सकता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ईरान पश्चिमी देशों से अलगाव की भरपाई के लिए पूर्वी और एशियाई साझेदारियों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।

आगे की राह

बुनियादी ढाँचे की मरम्मत, रिकॉर्ड महंगाई और कूटनीतिक अनिश्चितता — तीनों मोर्चों पर एक साथ जूझ रहा ईरान इस समय अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं को संतुलित करने की कोशिश में है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रतिबंधों में ठोस राहत नहीं मिलती, घरेलू मूल्य स्थिरीकरण के प्रयासों की प्रभावशीलता सीमित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 क्षतिग्रस्त घरों का आँकड़ा और बुनियादी ढाँचे की प्राथमिकता बताती है कि हमलों का असर आधिकारिक आँकड़ों से कहीं ज्यादा व्यापक है। इस्लामाबाद समझौते पर ज़ोर देना यह संकेत देता है कि तेहरान कूटनीतिक राहत को आर्थिक पुनरुद्धार की शर्त मान रहा है — लेकिन जब तक दूसरा पक्ष 'अपने वादे पूरे नहीं करता', ब्रिक्स और शंघाई की सक्रियता महंगाई की मार झेल रहे आम ईरानियों के लिए ठोस राहत में नहीं बदलती।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान में महंगाई का मुख्य कारण क्या है?
ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, दशकों से लगे पश्चिमी प्रतिबंध ईरान में रिकॉर्ड महंगाई का प्रमुख कारण हैं। अमेरिकी हमलों से हुई क्षति ने आर्थिक स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ईरान में हमलों से कितना नुकसान हुआ है?
गृह मंत्रालय के अनुसार होर्मोजगन और गोलेस्तान समेत कई प्रांतों में लगभग 75,000 घरों के साथ साथ बुनियादी ढाँचे और शहरों को जोड़ने वाले पुलों को भारी नुकसान पहुँचा है। सरकार ने इनकी मरम्मत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
इस्लामाबाद समझौता क्या है और ईरान इस पर क्यों जोर दे रहा है?
इस्लामाबाद समझौता एक कूटनीतिक दस्तावेज़ है जिसे ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंजूरी दी है और सर्वोच्च नेता ने पुष्टि की है। ईरान चाहता है कि दूसरा पक्ष — विशेषतः अमेरिका — इस समझौते के तहत अपने वादे पूरे करे ताकि प्रतिबंधों से राहत मिल सके।
ब्रिक्स और शंघाई बैठकों में ईरान की भागीदारी का क्या महत्व है?
ईरानी राष्ट्रपति ने भारत और किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई और ब्रिक्स बैठकों में हिस्सा लिया और गहन बातचीत की। तेहरान इन बहुपक्षीय मंचों के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत कर पश्चिमी दबाव से राहत पाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान सरकार बुनियादी ढाँचे की मरम्मत को कितनी प्राथमिकता दे रही है?
प्रवक्ता अली जेनीवंद के अनुसार, रिहायशी इमारतों, घरों और पुलिस स्टेशन जैसे सार्वजनिक सेवा केंद्रों की मरम्मत को किसी भी गैर जरूरी सरकारी परियोजना से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। क्षतिग्रस्त नागरिकों के लिए बुनियादी ढाँचे की बहाली फिलहाल सरकार का सबसे अहम काम है।
राष्ट्र प्रेस
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