ईरान का संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका पर बड़ा आरोप: नागरिक ढाँचे पर हमले से 10,000 लोग प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने 18 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को औपचारिक पत्र लिखकर अमेरिका पर ईरान के नागरिक बुनियादी ढाँचे को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इरावानी ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताते हुए वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की है।
मुख्य आरोप और क्षति का विवरण
इरावानी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में बंदरगाहों, परिवहन नेटवर्क, संचार सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स हब, रडार प्रतिष्ठानों और तटीय रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया। उन्होंने कहा कि ये ढाँचे आम नागरिकों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए अनिवार्य हैं। इरावानी के अनुसार, इन हमलों में हुई 'मौतों, घायलों, बुनियादी ढाँचे की क्षति और पर्यावरणीय नुकसान' के लिए अमेरिका सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
बुंजी डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले से जल संकट
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत की जस्क काउंटी स्थित तटीय गाँव बुंजी में समुद्री जल को पेयजल में बदलने वाले (डिसेलिनेशन) संयंत्र के पंपिंग स्टेशन और एक बिजली ट्रांसफॉर्मर को अमेरिकी हमले में पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। होर्मोजगान वाटर एंड वेस्टवॉटर कंपनी के प्रमुख हम्जेह पूर ने — ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से — बताया कि इस हमले से आसपास के 20 गाँवों में रहने वाले लगभग 10,000 लोगों की पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। स्थानीय प्रशासन आपूर्ति बहाल करने के प्रयास में जुटा है।
अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरे की चेतावनी
इरावानी ने चेतावनी दी कि इन हमलों की निरंतरता अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्थिरता तथा फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता के वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
आईआरजीसी का जवाबी हमले का दावा
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले किए हैं। आईआरजीसी के अनुसार, कुवैत के अल-अहमदी बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के फ्यूल सपोर्ट पियर और बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर ड्रोन व मिसाइलों से हमला किया गया। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आईआरजीसी ने बहरीन में अमेरिकी खुफिया डेटा सेंटर 'बटेल्को' को भी नष्ट करने का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पत्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संभावित बहस का रास्ता खोल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के दायरे में लाने की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल अमेरिका की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।