ट्रंप की ईरान को चेतावनी: बिजली संयंत्र, पुल निशाने पर; 'बातचीत में देरी की कीमत चुकानी होगी'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 जून 2026 को ईरान के खिलाफ अपना रुख और कड़ा करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तेहरान शीघ्र किसी समझौते पर नहीं पहुँचता, तो अमेरिका उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे — बिजली संयंत्र, पुल और परिवहन नेटवर्क — को निशाना बना सकता है। यह बयान पश्चिम एशिया में पिछले 48 घंटों में तेज हुए हवाई हमलों की पृष्ठभूमि में आया है।
ट्रंप का फॉक्स न्यूज़ इंटरव्यू: क्या कहा
फॉक्स न्यूज़ को दिए एक टेलीफोनिक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, 'मैं ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढाँचागत सुविधाओं पर नए हमलों की मंजूरी देने पर विचार कर रहा हूँ।' उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान समझौते के लिए बातचीत में जरूरत से अधिक समय ले रहा है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई किस प्रकार की होगी या अगले कदम की समय-सीमा क्या है।
ट्रुथ सोशल पर कड़ा संदेश
ट्रंप ने उसी दिन — बुधवार को — अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर भी एक तीखा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने बातचीत में बहुत अधिक समय गँवा दिया है और अब उसे इसकी 'कीमत चुकानी होगी।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना, नौसेना और वायुसेना 'पूरी तरह तबाह हो चुकी है' और 'मध्य पूर्व में सबको धमकाने वाले की हिम्मत टूट चुकी है।' ये दावे स्वतंत्र स्रोतों द्वारा अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं।
ईरान का रुख और क्षेत्रीय तनाव
ईरान की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि वह बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। दोनों पक्षों की बढ़ती बयानबाजी ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है।
वैश्विक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका वास्तव में ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढाँचे को निशाना बनाता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा — वैश्विक ऊर्जा बाजारों और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर भी इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस बीच, चीन और रूस समेत कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों देशों के बीच वार्ता की कोई निर्धारित तारीख सामने नहीं आई है। कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि अगले कुछ दिन इस संकट की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।