ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'घड़ी तेजी से भाग रही है, वरना कुछ नहीं बचेगा'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के पास समय तेज़ी से खत्म हो रहा है और यदि उसने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो उसके पास कुछ भी शेष नहीं रहेगा। 17 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ' पर की गई इस पोस्ट को व्यापक रूप से तेहरान के लिए एक स्पष्ट राजनयिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप का ताज़ा बयान
ट्रंप ने 'ट्रुथ' पर लिखा, 'ईरान के लिए घड़ी की सुइयाँ तेज़ी से भाग रही हैं, और बेहतर होगा कि वे फौरन हरकत में आएं, वरना उनका कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय ही सबसे कीमती है।' यह बयान उनकी ईरान-नीति में बढ़ती आक्रामकता का ताज़ा संकेत है।
इससे पहले भी ट्रंप ने एक AI-निर्मित तस्वीर के साथ पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था — 'यह तूफान से पहले की शांति है।' उस तस्वीर में राष्ट्रपति ट्रंप एक अमेरिकी नौसेना के एडमिरल के साथ 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' हैट पहने, तूफानी समुद्र और बिजली की कड़क के बीच एक नौसैनिक जहाज पर खड़े दिखाई दे रहे थे। पृष्ठभूमि में ईरानी जहाजों की उपस्थिति ने संभावित सैन्य टकराव के संकेत और पुख्ता किए।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान बातचीत के ज़रिए समाधान चाहता है, लेकिन इसके लिए धैर्य और गंभीर वार्ता अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी के स्वर में कहा कि यदि युद्ध फिर से थोपा गया, तो उसका नतीजा पहले से अलग नहीं होगा।
अराघची ने कहा, 'युद्ध और शांति का सवाल है। इसलिए, अगर वे बातचीत के ज़रिए कोई हल चाहते हैं, तो उन्हें सब्र रखना होगा, क्योंकि एक सही हल तक पहुँचने के लिए पेचीदा और विस्तृत बातचीत की ज़रूरत होती है। अगर वे फिर से युद्ध करना चाहते हैं, तो यह उनकी मर्ज़ी है — उन्होंने पहले भी हमारी आज़माइश की है, और नतीजा कुछ अलग नहीं होगा।'
सैन्य विकल्पों पर चर्चा
न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि ट्रंप ईरान पर एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके सहयोगी कथित तौर पर कूटनीतिक कोशिशों के विफल होने की स्थिति में नए एयर ऑपरेशन के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता की प्रगति अनिश्चित बनी हुई है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने 2018 में ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से हाथ खींच लिया था और 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाई थी। दूसरे कार्यकाल में भी वे उसी रणनीति को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक चेतावनियाँ बातचीत की संभावनाओं को और संकुचित कर देती हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि दबाव ही तेहरान को वार्ता-मेज़ तक लाने का एकमात्र तरीका है।
आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन का अगला कदम यह तय करेगा कि यह तनाव राजनयिक रास्ते पर रहेगा या सैन्य दिशा में मुड़ेगा।