टैगोर की 'सूक्ति प्रतियाँ' PM मोदी को भेंट: भारत-स्वीडन के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक उपहार-आदान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने 18 मई 2025 को स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की उपस्थिति में नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की साझा सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए विशेष स्मृति-उपहारों का आदान-प्रदान किया। यह ऐतिहासिक क्षण टैगोर के 1926 के स्वीडन दौरे की 100वीं वर्षगांठ से भी जुड़ा है, जो भारत और स्वीडन के बीच के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को रेखांकित करता है।
स्वीडन की ओर से दुर्लभ ऐतिहासिक उपहार
स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने प्रधानमंत्री मोदी को एक विशेष बॉक्स भेंट किया, जिसमें टैगोर की हस्तलिखित दो 'सूक्ति की प्रतियाँ' थीं। साथ में एक संक्षिप्त विवरण और 1921 में स्वीडन के प्रतिष्ठित उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई टैगोर की एक दुर्लभ तस्वीर भी शामिल थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि ये मूल दस्तावेज हाल ही में स्वीडन के राष्ट्रीय अभिलेखागार में खोजे गए हैं, जो टैगोर ने 1921 और 1926 की स्वीडन यात्राओं के दौरान लिखे थे।
भारत की ओर से शांतिनिकेतन की कारीगरी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के पीएम को टैगोर की रचनाओं का एक संकलन भेंट किया। इसके साथ शांतिनिकेतन से तैयार एक विशेष हस्तनिर्मित बैग भी दिया, जिसमें वे डिज़ाइन उकेरे गए हैं जिन्हें स्वयं गुरुदेव टैगोर ने स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चुना था। यह बैग टैगोर के उस दर्शन का प्रतीक है जिसमें कला को संग्रहालयों की दीवारों से बाहर निकालकर आम जीवन का अंग बनाने की बात कही गई है।
टैगोर और स्वीडन का ऐतिहासिक नाता
गौरतलब है कि गुरुदेव टैगोर 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के समय स्वीडन नहीं जा सके थे। परंतु 1921 में जब वे वहाँ पहुँचे, तो स्वीडन के तत्कालीन राजा गुस्ताव पंचम ने उनका भव्य स्वागत किया। 1926 में उन्होंने पुनः स्वीडन का दौरा किया — और इसी दौरे की शताब्दी इस उपहार-आदान का एक विशेष संदर्भ बनती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और स्वीडन अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने की कोशिश में हैं।
कूटनीतिक संदेश और सांस्कृतिक कूटनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के सांस्कृतिक उपहार-आदान केवल औपचारिकता नहीं होते — ये दो देशों के बीच साझा मूल्यों और ऐतिहासिक स्मृतियों की स्वीकृति होते हैं। रणधीर जायसवाल के अनुसार, यह आदान-प्रदान भारत और स्वीडन के बीच के गहरे सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रिश्तों को और मज़बूत करता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और गहरा होने की संभावना है।