स्वीडन ने PM मोदी को 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार' से नवाजा, अब तक 31 अंतरराष्ट्रीय सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन की ऐतिहासिक 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार' के कमांडर ग्रैंड क्रॉस सम्मान से अलंकृत किया गया है — यह इस पुरस्कार की सर्वोच्च श्रेणी है। 17 मई को स्वीडन यात्रा के दौरान प्रदान किया गया यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी का 31वाँ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है, जो विभिन्न देशों की सरकारों और संस्थानों द्वारा उन्हें अब तक दिए जा चुके हैं।
सम्मान का महत्व और पृष्ठभूमि
'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार' स्वीडन के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। यह पुरस्कार विदेशी नागरिकों और उन वैश्विक नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक स्तर पर विशिष्ट योगदान दिया हो। कमांडर ग्रैंड क्रॉस श्रेणी विशेष रूप से सरकार प्रमुखों और वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के लिए आरक्षित मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सम्मान भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और प्रधानमंत्री मोदी की विस्तृत कूटनीतिक पहुँच का प्रतीक है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में मोदी को खाड़ी देशों से लेकर यूरोप और अमेरिका तक के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हैं।
स्वीडन के PM से द्विपक्षीय वार्ता
स्वीडन के गुटेनबर्ग हवाई अड्डे पर पहुँचते ही प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टर्सन ने किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, हरित परिवर्तन, नवाचार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, 'स्वीडन के गुटेनबर्ग पहुंच गया हूं। मैं प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन से मिलूंगा, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, नवाचार, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-स्वीडन की दोस्ती को आगे बढ़ाना है।' उन्होंने यह भी बताया कि वे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर 'यूरोपीय व्यापार गोलमेज सम्मेलन' में यूरोपीय व्यापार जगत के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
भारत-स्वीडन संबंधों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और स्वीडन के बीच आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊँचाई देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपने व्यापार और निवेश संबंधों को व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
स्वीडन की कंपनियाँ — जैसे Ericsson, Volvo, IKEA और SKF — भारत में दीर्घकाल से सक्रिय हैं, और इस यात्रा से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या होगा आगे
प्रधानमंत्री मोदी की इस यूरोपीय दौरे में स्वीडन के साथ-साथ अन्य यूरोपीय भागीदारों से भी संवाद की संभावना है। 'यूरोपीय व्यापार गोलमेज सम्मेलन' में उनकी भागीदारी भारत-यूरोप निवेश संबंधों को नई दिशा देने का अवसर मानी जा रही है।