गुटेनबर्ग में PM मोदी का ऐतिहासिक दौरा, स्वीडन-भारत व्यापार ₹64,000 करोड़ पार; यूरोपीय उद्योग जगत से सीधा संवाद
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मई 2025 को स्वीडन के गुटेनबर्ग पहुँचे, जहाँ गुटेनबर्ग हवाई अड्डे पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने उनका स्वागत किया। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की गुटेनबर्ग की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे का केंद्र व्यापार, निवेश, नवाचार और रक्षा क्षेत्रों में भारत-स्वीडन साझेदारी को नई ऊँचाई देना है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'स्वीडन के गुटेनबर्ग पहुंच गया हूं। मैं प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन से मिलूंगा, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, नवाचार, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-स्वीडन की दोस्ती को आगे बढ़ाना है।' उन्होंने यह भी बताया कि वे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ मिलकर यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में यूरोप के प्रमुख उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्री द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और व्यापार विस्तार के नए रास्ते तलाशेंगे।
व्यापार और निवेश के आँकड़े
भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 7.75 अरब डॉलर (लगभग ₹64,000 करोड़) तक पहुँच चुका है। वहीं 2000 से 2025 के बीच स्वीडन का भारत में कुल निवेश 2.825 अरब डॉलर रहा है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय रूप से गहरे हुए हैं।
गुटेनबर्ग की ऐतिहासिक अहमियत
स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 1620 में बसे गुटेनबर्ग शहर ने आज स्वीडन के प्रौद्योगिकी, उद्योग और नवाचार केंद्र के रूप में पहचान बनाई है। राजदूत भूषण के अनुसार, यह शहर बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय का भी घर है, जिससे यह यात्रा सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष बन जाती है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 2018 में पहली बार आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन गए थे — तब की यात्रा स्टॉकहोम केंद्रित थी। इस बार गुटेनबर्ग को चुना जाना स्वयं में एक कूटनीतिक संकेत है।
यूरोपीय उद्योग जगत से संवाद
यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री (ERT) यूरोप की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रमुख मंच है। इस मंच पर प्रधानमंत्री मोदी, क्रिस्टर्सन और वॉन डेर लेयेन का एक साथ उपस्थित होना भारत-यूरोप निवेश संबंधों को नई दिशा देने का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों के बीच रक्षा, नवाचार और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग के नए समझौतों की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत को भी गति दे सकती है, जो कई वर्षों से लंबित है।