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गर्मियों में पित्त दोष से बचाव: 7 आयुर्वेदिक वेलनेस टिप्स जो रखेंगे तन-मन को ठंडा

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गर्मियों में पित्त दोष से बचाव: 7 आयुर्वेदिक वेलनेस टिप्स जो रखेंगे तन-मन को ठंडा

सारांश

भीषण गर्मी में पित्त दोष बेकाबू होने से पहले आयुर्वेद के सात आज़माए हुए नुस्खे अपनाएँ — नारियल पानी और बेल शरबत से लेकर चंदन के लेप और सुबह के प्राणायाम तक। दवा नहीं, बस दिनचर्या में बदलाव।

मुख्य बातें

पित्त दोष गर्मियों में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, जिससे जलन, अपच और चिड़चिड़ापन होता है।
नारियल पानी, बेल शरबत, छाछ और सत्तू जैसे प्राकृतिक पेय शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं।
दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें; सिर ढकें और पानी साथ रखें।
गुलाब जल और चंदन का लेप त्वचा की जलन और चकत्तों में राहत देते हैं।
सूर्योदय से पहले योगासन व प्राणायाम पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखता है।
ध्यान और गहरी साँस के अभ्यास मानसिक तनाव घटाकर शरीर की आंतरिक गर्मी कम करते हैं।

देशभर में मई 2026 की भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी है, जो पित्त दोष को नियंत्रित कर शरीर और मन को संतुलित रखती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना किसी दवा के केवल दिनचर्या में सात सरल बदलाव करके गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

पित्त दोष और गर्मी का संबंध

आयुर्वेद की मान्यता है कि ग्रीष्म ऋतु में शरीर में पित्त दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, जिससे जलन, अपच, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में शरीर को 'अंदर से ठंडा' रखना उतना ही ज़रूरी है जितना बाहरी गर्मी से बचाव।

7 आयुर्वेदिक उपाय जो करें असर

1. ठंडक देने वाले प्राकृतिक पेय: खीरे का रस, बेल शरबत, नारियल पानी, छाछ और सत्तू जैसे पेय पदार्थ न केवल प्यास बुझाते हैं, बल्कि शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखते हैं। ये सभी पित्त-शामक माने जाते हैं।

2. दोपहर की तेज धूप से परहेज: दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो सिर को कपड़े या छाते से ढकें और पानी की बोतल अवश्य साथ रखें।

3. हल्का और सात्विक भोजन: गर्मियों में तैलीय, मसालेदार और तले-भुने खाद्य पदार्थ पित्त को और भड़काते हैं। ताज़ा, हल्का और सात्विक भोजन पाचन तंत्र पर कम बोझ डालता है।

4. गुलाब जल और चंदन का उपयोग: गुलाब जल आँखों और त्वचा को राहत देता है, जबकि चंदन का लेप पसीने, जलन और चकत्तों में प्रभावी माना जाता है। ये दोनों उपाय सदियों से आयुर्वेदिक परंपरा में शामिल हैं।

5. सूर्योदय से पहले हल्का व्यायाम: सुबह जल्दी उठकर योगासन, प्राणायाम या हल्की सैर करने से शरीर पूरे दिन ऊर्जावान बना रहता है। दोपहर या शाम की कड़ी कसरत इस मौसम में पित्त बढ़ा सकती है।

6. दोपहर व रात का भोजन सुपाच्य रखें: फल, सलाद, दही और हल्के अनाज को भोजन में प्राथमिकता दें। भारी भोजन से पाचन धीमा होता है और शरीर में अतिरिक्त गर्मी उत्पन्न होती है।

7. मानसिक शीतलता: ध्यान (मेडिटेशन), गहरी साँस के अभ्यास (प्राणायाम) और शांत संगीत मानसिक तनाव को कम करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक तनाव शरीर की आंतरिक गर्मी को और बढ़ा देता है।

आम जनता पर असर

भारत के उत्तरी और मध्य राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँचने की खबरें हैं, जिससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में ये आयुर्वेदिक उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हैं जो दिनभर बाहर काम करते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत है कि आयुर्वेद की ऋतुचर्या — यानी मौसम के अनुसार जीवनशैली — आधुनिक चिकित्सा की तुलना में निवारक स्वास्थ्य का एक सशक्त विकल्प है। उनके अनुसार इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने पर गर्मी से जुड़ी अधिकांश सामान्य बीमारियों से बचा जा सकता है। आने वाले हफ्तों में तापमान और बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन सुझावों को जल्द से जल्द दिनचर्या में शामिल करना लाभकारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीति में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम अभी भी सीमित हैं। जब सरकारी आँकड़े हर साल हीट स्ट्रोक से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी दर्ज करते हैं, तो यह सवाल उठता है कि निवारक आयुर्वेदिक शिक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में प्राथमिकता क्यों नहीं दी जाती। ये सुझाव व्यावहारिक और सुलभ हैं, लेकिन इनका लाभ तभी मिलेगा जब इन्हें केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित न रखकर ज़मीनी स्तर पर प्रचारित किया जाए।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्मियों में पित्त दोष क्यों बढ़ता है और इसके क्या लक्षण हैं?
आयुर्वेद के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की तीव्रता शरीर में पित्त दोष को स्वाभाविक रूप से बढ़ा देती है। इसके सामान्य लक्षणों में त्वचा पर जलन, अपच, अत्यधिक पसीना, चिड़चिड़ापन और सिरदर्द शामिल हैं।
गर्मियों में कौन से पेय पदार्थ पीने चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, नारियल पानी, बेल शरबत, खीरे का रस, छाछ और सत्तू पित्त-शामक और प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले पेय हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और तापमान संतुलित करते हैं।
गर्मियों में किस समय व्यायाम करना सही रहता है?
आयुर्वेद के अनुसार सूर्योदय से पहले — यानी सुबह 5 से 7 बजे के बीच — योगासन, प्राणायाम या हल्की सैर करना सबसे उपयुक्त है। दोपहर या तेज धूप में व्यायाम करने से पित्त और बढ़ सकता है।
गर्मियों में मानसिक तनाव शरीर पर कैसे असर डालता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक तनाव शरीर की आंतरिक गर्मी को और बढ़ा देता है, जिससे पित्त दोष अधिक बिगड़ता है। ध्यान, गहरी साँस के अभ्यास और शांत संगीत मन को शीतल रखने में सहायक हैं।
गर्मियों में त्वचा की देखभाल के लिए कौन से आयुर्वेदिक उपाय कारगर हैं?
गुलाब जल आँखों और त्वचा को तुरंत ठंडक देता है, जबकि चंदन का लेप पसीने से होने वाली जलन और चकत्तों से राहत दिलाता है। ये दोनों उपाय सदियों पुरानी आयुर्वेदिक परंपरा का हिस्सा हैं और आसानी से घर पर उपयोग किए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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