चमोली जिला योजना 2026-27: ₹74 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी, कृषि-पशुपालन पर विशेष जोर

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चमोली जिला योजना 2026-27: ₹74 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी, कृषि-पशुपालन पर विशेष जोर

सारांश

चमोली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹74 करोड़ से अधिक की जिला योजना को मंजूरी मिली। प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कृषि, पशुपालन और कीवी उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए क्लस्टर आधारित क्रियान्वयन पर जोर दिया।

मुख्य बातें

चमोली जिले की वित्त वर्ष 2026-27 की जिला योजना में ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई।
प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार, चमोली में बैठक आयोजित हुई।
14 से अधिक विभागों — लोक निर्माण, पेयजल, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, स्वास्थ्य सहित — की योजनाओं की समीक्षा की गई।
कीवी उत्पादन के लिए बड़े क्लस्टर विकसित करने और चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश।
पशुपालन को पहाड़ी अर्थव्यवस्था का 'गेम चेंजर' बताते हुए ऑर्गेनिक फार्मिंग और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर।
सभी योजनाओं को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण से लागू करने और अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश।

प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी की अध्यक्षता में 18 मई 2025 को चमोली के कलेक्ट्रेट सभागार में वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना बैठक संपन्न हुई, जिसमें कुल ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार के परिव्यय एवं योजनाओं को स्वीकृति दी गई। ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रभारी मंत्री चौधरी ने स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को इस योजना का केंद्रीय उद्देश्य बताया।

किन विभागों की योजनाओं को मिली मंजूरी

बैठक में लोक निर्माण विभाग, पेयजल, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सिंचाई, पर्यटन, खेल एवं युवा कल्याण, स्वास्थ्य, उद्योग, पंचायती राज, शिक्षा तथा बाल विकास विभाग की प्रस्तावित योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई। सभी जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल किया गया और आवश्यकता के अनुसार धनराशि आवंटित की गई।

प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि पिछले वर्ष जिले में अनेक विकासपरक एवं जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुए हैं और आगामी वर्ष की योजना भी चमोली के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण और समन्वय पर जोर

मंत्री चौधरी ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए ताकि केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का बेहतर समन्वय हो सके और अधिकतम लाभ आमजन तक पहुँचे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधूरे एवं गतिमान कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए।

गौरतलब है कि पहाड़ी जिलों में योजनाओं का क्रियान्वयन भौगोलिक चुनौतियों के कारण प्रायः विलंबित होता है, इसलिए क्लस्टर आधारित कार्यान्वयन की यह रणनीति स्थानीय स्तर पर संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

कृषि और उद्यान क्षेत्र में नवाचार

कृषि विभाग को निर्देशित किया गया कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के कृषि उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए — जो चमोली जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों की एक पुरानी और गंभीर समस्या है।

उद्यान विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं और उत्पादन, मार्केटिंग एवं पैकेजिंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

पशुपालन को बताया 'गेम चेंजर'

प्रभारी मंत्री ने पशुपालन विभाग को पहाड़ी अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' बताते हुए जिला योजना के माध्यम से इस क्षेत्र में बड़े एवं प्रभावी कार्य किए जाने पर बल दिया। उनका कहना था कि पशुपालन से ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

इसके अतिरिक्त मत्स्य पालन, डेयरी एवं सहकारिता जैसे क्षेत्रों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। इस वर्ष की जिला योजना में आजीविका आधारित क्षेत्रों में विशेष रूप से नवाचार और उत्पादन परक कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

आगे की राह

स्वीकृत ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार की जिला योजना के तहत सभी विभागों को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद आवश्यकता अनुसार धनराशि आवंटित की गई है। यह योजना चमोली में स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जिसके परिणाम आने वाले महीनों में धरातल पर दिखने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भौगोलिक दुर्गमता और प्रशासनिक क्षमता की सीमाओं के बीच इसे समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करना असली परीक्षा है। कीवी क्लस्टर और पशुपालन जैसी पहलें सही दिशा में हैं, लेकिन बिना मजबूत मार्केट लिंकेज और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के किसानों तक वास्तविक लाभ पहुँचना कठिन रहेगा। पिछले वर्षों में उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कई आजीविका योजनाएं कागज़ों पर तो बड़ी रहीं, पर धरातल पर प्रवासन रोकने में सीमित सफलता मिली — इस बार क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण कितना कारगर होता है, यह देखने वाली बात होगी।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली जिला योजना 2026-27 में कितनी राशि स्वीकृत की गई?
वित्त वर्ष 2026-27 की जिला योजना बैठक में चमोली के लिए कुल ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। यह राशि विभिन्न विभागों की आवश्यकता के अनुसार आवंटित की गई है।
चमोली जिला योजना बैठक की अध्यक्षता किसने की?
बैठक की अध्यक्षता ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने की। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार, चमोली में आयोजित हुई।
चमोली में कीवी उत्पादन को लेकर क्या निर्देश दिए गए?
उद्यान विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं। साथ ही उत्पादन, मार्केटिंग और पैकेजिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया ताकि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
चमोली में पशुपालन को 'गेम चेंजर' क्यों कहा गया?
प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने पशुपालन को पहाड़ी अर्थव्यवस्था का 'गेम चेंजर' इसलिए बताया क्योंकि इससे ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। मत्स्य पालन, डेयरी और सहकारिता को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
जिला योजना में किसानों की फसल सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए?
कृषि विभाग को निर्देश दिए गए कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के कृषि उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएं। जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए गए।
राष्ट्र प्रेस
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