चमोली जिला योजना 2026-27: ₹74 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी, कृषि-पशुपालन पर विशेष जोर
सारांश
मुख्य बातें
प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी की अध्यक्षता में 18 मई 2025 को चमोली के कलेक्ट्रेट सभागार में वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना बैठक संपन्न हुई, जिसमें कुल ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार के परिव्यय एवं योजनाओं को स्वीकृति दी गई। ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम तथा खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रभारी मंत्री चौधरी ने स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को इस योजना का केंद्रीय उद्देश्य बताया।
किन विभागों की योजनाओं को मिली मंजूरी
बैठक में लोक निर्माण विभाग, पेयजल, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सिंचाई, पर्यटन, खेल एवं युवा कल्याण, स्वास्थ्य, उद्योग, पंचायती राज, शिक्षा तथा बाल विकास विभाग की प्रस्तावित योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई। सभी जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल किया गया और आवश्यकता के अनुसार धनराशि आवंटित की गई।
प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि पिछले वर्ष जिले में अनेक विकासपरक एवं जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुए हैं और आगामी वर्ष की योजना भी चमोली के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण और समन्वय पर जोर
मंत्री चौधरी ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए ताकि केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का बेहतर समन्वय हो सके और अधिकतम लाभ आमजन तक पहुँचे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधूरे एवं गतिमान कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए।
गौरतलब है कि पहाड़ी जिलों में योजनाओं का क्रियान्वयन भौगोलिक चुनौतियों के कारण प्रायः विलंबित होता है, इसलिए क्लस्टर आधारित कार्यान्वयन की यह रणनीति स्थानीय स्तर पर संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
कृषि और उद्यान क्षेत्र में नवाचार
कृषि विभाग को निर्देशित किया गया कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के कृषि उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए — जो चमोली जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों की एक पुरानी और गंभीर समस्या है।
उद्यान विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं और उत्पादन, मार्केटिंग एवं पैकेजिंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
पशुपालन को बताया 'गेम चेंजर'
प्रभारी मंत्री ने पशुपालन विभाग को पहाड़ी अर्थव्यवस्था के लिए 'गेम चेंजर' बताते हुए जिला योजना के माध्यम से इस क्षेत्र में बड़े एवं प्रभावी कार्य किए जाने पर बल दिया। उनका कहना था कि पशुपालन से ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
इसके अतिरिक्त मत्स्य पालन, डेयरी एवं सहकारिता जैसे क्षेत्रों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। इस वर्ष की जिला योजना में आजीविका आधारित क्षेत्रों में विशेष रूप से नवाचार और उत्पादन परक कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।
आगे की राह
स्वीकृत ₹74 करोड़ 23 लाख 70 हजार की जिला योजना के तहत सभी विभागों को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद आवश्यकता अनुसार धनराशि आवंटित की गई है। यह योजना चमोली में स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जिसके परिणाम आने वाले महीनों में धरातल पर दिखने की उम्मीद है।