मोदी-शेख MBZ शिखर वार्ता: यूएई ने किया ₹41,600 करोड़ निवेश का ऐलान, ऊर्जा-रक्षा में नई साझेदारी

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मोदी-शेख MBZ शिखर वार्ता: यूएई ने किया ₹41,600 करोड़ निवेश का ऐलान, ऊर्जा-रक्षा में नई साझेदारी

सारांश

मोदी का अबू धाबी दौरा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था — यूएई के एफ-16 एस्कॉर्ट से लेकर ₹41,600 करोड़ के निवेश ऐलान तक, यह भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की नई परिपक्वता का संकेत है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति दोनों के लिए निर्णायक है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 15 मई 2026 को अबू धाबी में यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की।
यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग ₹41,600 करोड़) के निवेश की घोषणा की।
ऊर्जा, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी में कई द्विपक्षीय समझौतों का आदान-प्रदान हुआ।
PM मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
यूएई के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने PM मोदी के विमान को हवाई क्षेत्र में एस्कॉर्ट किया — एक दुर्लभ कूटनीतिक सम्मान।
यह दौरा PM मोदी के पाँच देशों के विदेश दौरे का पहला पड़ाव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई 2026 को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (शेख MBZ) के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इस बैठक के दौरान यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग ₹41,600 करोड़) के निवेश की घोषणा की। यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के पाँच देशों के विदेश दौरे का पहला पड़ाव है।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच 'बेहद सकारात्मक और व्यापक बातचीत' हुई। बैठक में ऊर्जा, व्यापार और निवेश, ब्लू इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी और फिनटेक, रक्षा तथा लोगों के बीच आपसी जुड़ाव जैसे विषय केंद्र में रहे। दोनों नेताओं की उपस्थिति में ऊर्जा, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में कई समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ।

अबू धाबी हवाई अड्डे पर शेख MBZ ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। उल्लेखनीय है कि जब प्रधानमंत्री मोदी का विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में पहुँचा, तब यूएई के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने उसे एस्कॉर्ट किया — जो किसी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला दुर्लभ सम्मान है।

यूएई हमलों की निंदा और क्षेत्रीय स्थिति

बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'हम यूएई में हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। जिस तरह यूएई को निशाना बनाया गया, वह किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुश्किल हालात में आपने जिस संयम और साहस का परिचय दिया, वह प्रशंसनीय है।' उन्होंने यूएई की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने की किसी भी कोशिश को अस्वीकार्य बताया। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय समुदाय के प्रति आभार

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए यूएई सरकार और शाही परिवार का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'ऐसे कठिन समय में आपने भारतीय समुदाय का जिस तरह ध्यान रखा और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों की तरह संभाला, उसके लिए मैं यूएई सरकार और शाही परिवार का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।' यूएई में लगभग 35 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो वहाँ का सबसे बड़ा विदेशी समुदाय है।

भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर असर

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे से भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक पैठ मज़बूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और दोनों देशों के बीच फरवरी 2022 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पहले ही द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊँचाई पर ले जा चुका है।

क्या होगा आगे

प्रधानमंत्री मोदी अपने पाँच देशों के दौरे के अगले पड़ावों पर आगे बढ़ेंगे। अबू धाबी में हुए समझौतों के क्रियान्वयन की रूपरेखा आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 5 अरब डॉलर का निवेश मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में केंद्रित होगा, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मज़बूती मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 करोड़ का निवेश ऐलान और एफ-16 एस्कॉर्ट जैसे प्रतीकात्मक संकेत बताते हैं कि भारत-यूएई संबंध अब केवल प्रवासी-श्रम कूटनीति से आगे बढ़कर रणनीतिक गहराई में प्रवेश कर चुके हैं। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले कई दौरों में भी बड़े निवेश वादे हुए हैं — असली कसौटी यह होगी कि इस बार के समझौते कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का यूएई की संप्रभुता के पक्ष में खड़ा होना उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति में एक सुचिंतित कदम है, लेकिन इससे क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ेगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की यूएई यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
PM मोदी की यह यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए थी, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह दौरा उनके पाँच देशों के विदेश दौरे का पहला पड़ाव भी था।
यूएई ने भारत में कितने निवेश की घोषणा की?
यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग ₹41,600 करोड़) के निवेश की घोषणा की। यह निवेश मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में होने की उम्मीद है।
PM मोदी ने यूएई पर हुए हमलों पर क्या कहा?
PM मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि यूएई को निशाना बनाना किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यूएई की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-यूएई के बीच किन क्षेत्रों में समझौते हुए?
दोनों नेताओं की उपस्थिति में ऊर्जा, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में कई समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। इसके अलावा ब्लू इकोनॉमी, फिनटेक और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव पर भी चर्चा हुई।
यूएई में भारतीय समुदाय के बारे में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के कठिन दौर में भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए यूएई सरकार और शाही परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यूएई ने भारतीय नागरिकों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह संभाला।
राष्ट्र प्रेस
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