पाकिस्तान के पंजाब में 15% बच्चियों की शादी 18 से पहले, अल्पसंख्यक संगठन ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बाल विवाह की प्रथा अब भी बेरोकटोक जारी है — पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के अनुसार, वहाँ 15 प्रतिशत बच्चियों की शादी 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही कर दी जाती है। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सक्रिय संगठन 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटीज़' (VOPM) ने 15 मई 2026 को इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि भेदभावपूर्ण कानून और सामाजिक परंपराएँ मिलकर हज़ारों लड़कियों से उनका बचपन, शिक्षा और बुनियादी अधिकार छीन रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
VOPM ने इस स्थिति को 'चुराया गया बचपन' की संज्ञा दी है। संगठन का कहना है कि कम उम्र की लड़कियों को स्कूलों से निकालकर जबरन विवाह के लिए बाध्य किया जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रांत में व्यापक रूप से फैली हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, पंजाब प्रांत में यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ हर सातवीं लड़की वयस्क होने से पहले ही विवाह की बेड़ियों में बंध जाती है।
कानूनी ढाँचे में संस्थागत असमानता
VOPM ने पाकिस्तान के मौजूदा कानूनी ढाँचे पर भी सवाल उठाए। संगठन के अनुसार, लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कियों के लिए मात्र 16 वर्ष निर्धारित करना 'संस्थागत असमानता' को कानूनी मान्यता देने जैसा है। संगठन का मानना है कि इस भेदभावपूर्ण प्रावधान ने बाल विवाह को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता प्रदान की है।
संगठन ने कहा कि कानूनों में मौजूद खामियाँ शोषण को बढ़ावा देती हैं और कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाने वालों को संरक्षण देती हैं। VOPM के अनुसार, 'कानून का मूल उद्देश्य कमज़ोर वर्गों की रक्षा करना है, लेकिन यहाँ संवेदनशीलता और न्याय को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।'
धार्मिक तर्क की आड़ में सुधारों का विरोध
VOPM ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान में सुधारों का विरोध करने वाले लोग प्रायः सीधे बाल विवाह का समर्थन नहीं करते, बल्कि धार्मिक तर्कों की आड़ लेकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। संगठन ने चेताया कि 'सवाल उठाने वालों को ईशनिंदा का आरोपी ठहराने का डर' सुधारकों को चुप करा देता है।
संगठन के शब्दों में, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' के नाम पर कई लोग सुधारों को ही खतरा मानने लगते हैं — जबकि यह बहस 'धर्म बनाम कानून' की नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी की है।
आम जनता और बच्चियों पर असर
VOPM ने बाल विवाह के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर भी ध्यान दिलाया। संगठन के अनुसार, भेदभावपूर्ण कानूनी प्रावधान बाल विवाह से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसान की वास्तविकता को नज़रअंदाज़ करते हैं, जिसके दुष्प्रभाव जीवनभर बने रहते हैं। संगठन ने दुष्कर्म, मातृ मृत्यु और घरेलू हिंसा जैसे अपराधों के चक्र को जारी रहने देने पर भी चिंता व्यक्त की।
VOPM ने कहा, 'हम खुद को यह समझाकर संतुष्ट कर लेते हैं कि अन्याय हमारे दरवाजे तक नहीं पहुँचा, इसलिए वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है' — लेकिन यह सोच समस्या को और गहरा करती है।
क्या होगा आगे
VOPM ने पाकिस्तान सरकार से लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष समान रूप से निर्धारित करने और कानूनी खामियों को दूर करने की माँग की है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी लंबे समय से पाकिस्तान पर इस दिशा में ठोस कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या पाकिस्तानी संसद इस माँग पर विचार करती है।