पीओके: रावलकोट में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो घायल, जेएएसी का आरोप; मुजफ्फराबाद से मंधोल तक विरोध प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी जन-आंदोलन के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 14 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो लोग घायल हो गए हैं। जेएएसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मीडिया से पीओके की जमीनी स्थिति पर कड़ी नज़र रखने की अपील की है।
गोलीबारी का आरोप और जेएएसी का बयान
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एक कमरे में कई लोग मौजूद हैं और एक घायल व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है। वीडियो में उस व्यक्ति ने कथित तौर पर दावा किया कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी में वह घायल हुआ है और आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया।
जेएएसी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, "रावलकोट में सुरक्षा बलों की गोलीबारी के बाद दो लोग घायल हुए हैं। नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग बेहद चिंताजनक है। हम हिंसा को तुरंत समाप्त करने की मांग करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों तथा मीडिया से जमीनी स्थिति पर करीबी नज़र रखने का आग्रह करते हैं।" पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हुई।
मुजफ्फराबाद से मंधोल तक उमड़ा जन-सैलाब
गोलीबारी के आरोप उस दिन सामने आए जब पीओके के कई इलाकों में हजारों लोगों ने विरोध रैलियों में भाग लिया। मुजफ्फराबाद, रावलकोट, बोखारा और मंधोल की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारे लगाए।
बोखारा में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने झंडे लेकर रैली निकाली और "इंकलाब आएगा" के नारे बुलंद किए। पुंछ जिले के मंधोल क्षेत्र में भी हजारों महिलाओं और बच्चों ने विरोध मार्च निकाला। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने "ये गुंडागर्दी ना भाई ना, ये दहशतगर्दी ना भाई ना" और "आवाज दो हम एक हैं — मीरपुर, कोटली, रावलकोट, बाघ, मुजफ्फराबाद में हम एक हैं" जैसे नारे लगाए।
आंदोलन की व्यापकता और जेएएसी की अपील
जेएएसी ने प्रदर्शन वीडियो साझा करते हुए कहा, "रावलकोट में जारी विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हुए हैं। वे अपने परिवारों और समुदायों के साथ मिलकर बुनियादी अधिकारों, न्याय और जन मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। उनकी भागीदारी दर्शाती है कि यह आंदोलन समाज के हर वर्ग तक पहुंच चुका है।"
गौरतलब है कि यह आंदोलन बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के विरोध से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह राजनीतिक सुधारों, जवाबदेही और प्रतिनिधि सरकार की मांग तक विस्तृत हो चुका है। पीओके इस समय स्थानीय आबादी और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा टकराव देख रहा है।
पहले के आरोप और मानवाधिकार चिंताएं
1 अगस्त को जेएएसी सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया था कि पीओके में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के दौरान 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े जेएएसी के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और पुलिस की कथित ज्यादतियों के आरोपों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
आगे क्या होगा
जेएएसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पीओके में मानवाधिकार उल्लंघन की स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह आंदोलन पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस — 14 अगस्त — के दिन और तेज हो गया, जो इस्लामाबाद के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पाकिस्तानी प्रशासन वार्ता का रास्ता नहीं अपनाता, तो आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।