4 अगस्त 2026
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पीओके के बाघ में निहत्थे नागरिकों पर गोलीबारी का आरोप, जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र से जांच की माँग की

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पीओके के बाघ में निहत्थे नागरिकों पर गोलीबारी का आरोप, जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र से जांच की माँग की

सारांश

पीओके के बाघ में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और मुजफ्फराबाद के मकरी में मोटरसाइकिलों में आगजनी के आरोप सामने आए हैं। जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र से तत्काल जाँच की माँग की, जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे 'गैर-कानूनी हिंसा के दीर्घकालिक पैटर्न' का हिस्सा बताया। इंटरनेट ब्लैकआउट स्वतंत्र सत्यापन में बाधक है।

मुख्य बातें

जेएएसी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पीओके के बाघ में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं और आंसू गैस दागी।
मुजफ्फराबाद के मकरी इलाके में सुरक्षाकर्मियों द्वारा नागरिकों की मोटरसाइकिलों में आग लगाने के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए।
कथित तौर पर पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए — आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी अधिकारियों से स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग की, इसे 'गैर-कानूनी हिंसा का दीर्घकालिक पैटर्न' बताया।
जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र और ओएचसीएचआर से तत्काल हस्तक्षेप और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल ब्लैकआउट स्वतंत्र जाँच में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने 4 अगस्त को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) के बाघ जिले में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं और आंसू गैस के गोले दागे। कमेटी के अनुसार, यह कार्रवाई उन नागरिकों के खिलाफ की गई जो अपनी माँगें अहिंसक तरीके से रख रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में कथित तौर पर दिखाया गया कि मुजफ्फराबाद जिले के मकरी इलाके में सुरक्षाकर्मियों ने आम नागरिकों की मोटरसाइकिलों में आग लगा दी। जेएएसी ने इन दृश्यों को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा: 'सिक्योरिटी फोर्स बाघ में निहत्थे आम लोगों पर गोलियां दाग रहे थे और उन पर आंसू गैस का इस्तेमाल कर रहे थे।'

एक अन्य पोस्ट में संगठन ने लिखा: 'यह वीडियो मुजफ्फराबाद के मकरी में आम लोगों की मोटरसाइकिलों में आग लगाते हुए सिक्योरिटी कर्मियों को दिखाता है।' इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, क्योंकि क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर ब्लैकआउट जारी है।

व्यापक हिंसा का संदर्भ

ये घटनाएँ पीओके में पिछले कुछ दिनों से जारी अशांति की पृष्ठभूमि में सामने आई हैं। जेएएसी के अनुसार, कथित तौर पर 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं — हालाँकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो पाई है। रावलकोट से भी परेशान करने वाली रिपोर्टें आई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में बिजली, आटा और अन्य बुनियादी ज़रूरतों को लेकर जनता में व्यापक असंतोष है और जेएएसी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कई हफ्तों से जारी हैं।

अंतरराष्ट्रीय अपील और एमनेस्टी की माँग

जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर), अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। संगठन ने इन निकायों से पीओके में बिगड़ते हालात पर नज़र रखने, स्वतंत्र जाँच के लिए दबाव बनाने और किसी भी गैर-कानूनी बल प्रयोग के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों से पीओके में सुरक्षा बलों के बल प्रयोग की स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच कराने की माँग की। संगठन ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा: 'सुरक्षा बलों ने जिस तरह से निहत्थे लोगों को ताकत से चुप कराने की कोशिश की है उसके लिए स्वतंत्र और पारदर्शी जांच का आदेश दिया जाना चाहिए।'

एमनेस्टी ने यह भी रेखांकित किया कि रावलकोट से आ रही रिपोर्टें पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'गैर-कानूनी हिंसा' के एक दीर्घकालिक पैटर्न को उजागर करती हैं।

सूचना अवरोध और जाँच की चुनौती

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी कि जब तक क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर ब्लैकआउट जारी रहेगा, तब तक जमीनी स्थिति की पूरी हद तक स्वतंत्र जाँच में बाधा बनी रहेगी। सूचना की यह रुकावट स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच यह देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार स्वतंत्र जाँच की माँग पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जवाबदेही से बचने का सुनियोजित तरीका है। एमनेस्टी का 'दीर्घकालिक पैटर्न' वाला बयान इस बात की पुष्टि करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी ने इस व्यवहार को प्रोत्साहित किया है। असली सवाल यह है कि संयुक्त राष्ट्र की अपील से आगे कोई ठोस कदम उठेगा या यह भी पिछले दशकों की तरह कागज़ी निंदाओं तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके के बाघ में गोलीबारी की घटना क्या है?
जेएएसी के अनुसार, 4 अगस्त को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पीओके के बाघ जिले में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं और आंसू गैस के गोले दागे। मुजफ्फराबाद के मकरी इलाके में नागरिकों की मोटरसाइकिलों में भी आग लगाने के आरोप हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं।
जेएएसी कौन है और इसकी माँगें क्या हैं?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पीओके में नागरिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ने वाला एक प्रमुख संगठन है। इसने संयुक्त राष्ट्र, ओएचसीएचआर और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से पीओके में स्वतंत्र जाँच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की माँग की है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस मामले में क्या कहा?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी अधिकारियों से पीओके में सुरक्षा बलों के बल प्रयोग की स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच कराने की माँग की है। संगठन ने रावलकोट से आ रही रिपोर्टों को पीओके में 'गैर-कानूनी हिंसा के दीर्घकालिक पैटर्न' का हिस्सा बताया और कहा कि इंटरनेट ब्लैकआउट स्वतंत्र जाँच में बाधक है।
पीओके में इंटरनेट ब्लैकआउट का क्या असर हो रहा है?
इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर ब्लैकआउट के कारण जमीनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि करना बेहद कठिन हो गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि जब तक यह ब्लैकआउट जारी रहेगा, स्वतंत्र पत्रकार और मानवाधिकार पर्यवेक्षक वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं कर पाएँगे।
पीओके में अब तक कितने लोग हताहत हुए हैं?
जेएएसी के दावे के अनुसार, पिछले कुछ दिनों की हिंसा में कथित तौर पर 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। हालाँकि, इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक संभव नहीं हो पाई है।
राष्ट्र प्रेस
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