पीओके में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में 50 से अधिक मौतें, सैकड़ों घायल; अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बीते चार दिनों में भड़की अशांति के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों घायल हुए हैं। स्थानीय नागरिक समाज संगठनों के दावों के अनुसार, निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई गईं और इंटरनेट सेवाएँ बाधित कर दी गईं, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता लगभग असंभव हो गई है।
मुख्य घटनाक्रम
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने शनिवार, 1 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'पिछले 4 दिनों में सेना ने क्रूर आतंकवाद के जरिए हमारे 50 से ज्यादा लोगों को मार डाला और सैकड़ों घायल हुए हैं।' जेएएसी ने एक अलग पोस्ट में बताया कि मुजफ्फराबाद में देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे, जहाँ लोग सड़कों पर डटे रहे और बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा तथा स्थानीय अधिकारियों द्वारा किए गए वादों को लागू करने की माँग करते रहे।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
अमेरिकी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (एचआरएफ) ने शनिवार को पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना के कथित बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। एक स्थानीय नागरिक समाज समूह के हवाले से एचआरएफ ने कहा कि सुरक्षा बलों ने हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं।
एचआरएफ ने यह भी कहा कि प्रदर्शन आयोजकों के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित तौर पर सबूत छिपाने की कोशिश में अस्पतालों से शव हटाए और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से हिंसा बंद करने, मोबाइल संचार बहाल करने और बल के सभी गैर-कानूनी प्रयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की।
संयुक्त राष्ट्र में दस्तक
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कई बैठकें कीं। प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को पीओके में कथित क्रूरता की जानकारी दी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, सरकारों, मानवाधिकार संगठनों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की अपील की।
प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी अधिकारियों से यह भी माँग की कि अशांति के दौरान मारे गए सभी नागरिकों के शव बिना किसी शर्त के उनके परिजनों को सौंपे जाएँ, जबरन गायब किए गए लोगों का पता बताया जाए और गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए।
आम जनता पर असर
एचआरएफ के अनुसार, इस कार्रवाई के साथ-साथ इंटरनेट ब्लैकआउट और मीडिया पहुँच पर कड़ी पाबंदियाँ लगाई गई हैं, जिससे ज़मीनी हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना अत्यंत कठिन हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में बुनियादी अधिकारों और स्थानीय वादों के क्रियान्वयन को लेकर जनता में गहरा असंतोष पहले से ही व्याप्त था।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि पीओके में नागरिक असंतोष की यह पहली बड़ी लहर नहीं है — क्षेत्र में बिजली, महँगाई और प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर समय-समय पर विरोध होते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र में उठाई गई आवाज़ के बाद अब नज़रें इस पर टिकी हैं कि पाकिस्तान सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या स्वतंत्र जाँच की अनुमति दी जाती है।