पीओके में विरोध प्रदर्शन: सुरक्षा बलों पर गोलीबारी का आरोप, 11-12 मौतें, इंटरनेट बंद
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 10 जून 2026 को भड़के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस, वाटर कैनन और गोलियों के इस्तेमाल का आरोप लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 11 से 12 लोगों की मौत हुई है, 70 से अधिक घायल हैं और पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गई हैं।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें
दशकों से चली आ रही आर्थिक उपेक्षा, राजनीतिक अधिकारों की कमी और संसाधनों के कथित शोषण के विरोध में मीरपुर, मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, नीलम और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर जनता सड़कों पर उतरी। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने गेहूँ और बिजली जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी, बाहरी लोगों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करने, राजनीतिक अधिकारों की बहाली और विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों को मिलने वाली सुविधाएँ खत्म करने की माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में गरीबी, बेरोज़गारी और अविकास के मुद्दे लंबे समय से अनसुने पड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मंगला बांध और नीलम-झेलम जैसी बड़ी परियोजनाओं का लाभ पाकिस्तान को मिलता है, जबकि स्थानीय आबादी उससे वंचित रहती है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और हताहत
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, वाटर कैनन और गोलियों का इस्तेमाल किया। कम से कम 11 से 12 लोगों की मौत की पुष्टि बताई जा रही है और 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वास्तविक मृतकों और घायलों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है — इससे पहले भी महंगाई, संसाधनों के दोहन और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ हुए आंदोलनों पर इसी तरह बल प्रयोग की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
मानवाधिकार आयोग की चिंता
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने पीओके में बढ़ते तनाव और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों की मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और सभी मौतों व घायल मामलों की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है।
एचआरसीपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि संवैधानिक बदलावों की माँगों का समाधान शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और प्रतिनिधिक प्रक्रियाओं के ज़रिए किया जाना चाहिए — हिंसा और टकराव के माध्यम से नहीं।
आम जनता की मुख्य शिकायतें
पीओके के निवासियों की बुनियादी शिकायतें गरीबी, बेरोज़गारी, अविकास और स्थानीय संसाधनों के कथित दोहन से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार, जवाबदेही और संसाधनों पर स्थानीय लोगों का हक सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं।
आगे की स्थिति
इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के कारण ज़मीनी स्तर से स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है। एचआरसीपी की जाँच माँग और जेएएसी के जारी आंदोलन को देखते हुए, पीओके में तनाव फिलहाल बरकरार है और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।