एसजे सूर्या को मद्रास हाईकोर्ट से झटका, आयकर रिटर्न मामले में छह याचिकाएं वापस लेकर खारिज
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और निर्देशक एस.जे. सूर्या को 18 सितंबर 2026 को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा, जब आयकर रिटर्न दाखिल न करने से जुड़े छह मामलों में डिस्चार्ज की माँग वाली उनकी याचिकाएं, वापस लिए जाने के बाद, अदालत ने खारिज कर दीं। इस फैसले के बाद अब सूर्या को एग्मोर कोर्ट में इन सभी मामलों का सामना करना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
आयकर विभाग ने एस.जे. सूर्या के खिलाफ एग्मोर कोर्ट में छह मामले दर्ज कराए थे। विभाग का आरोप है कि अभिनेता ने वित्तीय वर्ष 2002-03 से 2009-10 के बीच लगातार छह वित्तीय वर्षों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया। यह मामला करीब दो दशक पुराना है और लंबे समय से विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन रहा है।
हाईकोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम
एस.जे. सूर्या ने सभी छह मामलों से डिस्चार्ज की माँग को लेकर मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था। न्यायमूर्ति सुंदर मोहन के समक्ष शुक्रवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने अदालत को बताया कि सूर्या वर्ष 2022 में भी इन्हीं छह मामलों को रद्द कराने के लिए याचिकाएं दायर कर चुके हैं, जिन्हें पहले ही खारिज किया जा चुका है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा याचिकाएं उन्हीं आधारों पर दायर की गई हैं, जिन पर 2022 में दायर याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं। इस पर न्यायमूर्ति सुंदर मोहन ने स्पष्ट कहा कि एस.जे. सूर्या को सभी छह मामलों का सामना करना होगा और इन याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता।
याचिकाएं वापस लेने का निर्णय
अदालत के रुख को देखते हुए एस.जे. सूर्या की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे सभी छह याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं। अदालत ने याचिकाएं वापस लेने की अनुमति देते हुए सभी छह याचिकाओं को 'वापस ली गई याचिकाओं' के रूप में खारिज करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब एस.जे. सूर्या इन मामलों में हाईकोर्ट से राहत पाने में असफल रहे हैं। 2022 में दायर पहली कोशिश के बाद अब यह दूसरा प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
आगे क्या होगा
अब सूर्या को एग्मोर कोर्ट में आयकर विभाग द्वारा दायर छह मामलों का सामना करना होगा। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। आयकर विभाग के अनुसार आरोप वित्तीय वर्ष 2002-03 से 2009-10 तक के रिटर्न न भरने से संबंधित हैं, जो आयकर अधिनियम के तहत अभियोजनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं।