मद्रास हाईकोर्ट आज करेगा AIADMK 2022 निष्कासन मामले की वापसी याचिका पर सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास हाईकोर्ट गुरुवार, 5 जून को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें 2022 के AIADMK निष्कासन विवाद से जुड़े मुकदमे को वापस लेने की अनुमति माँगी गई है। यह मामला न्यायमूर्ति एन. कुमारेश बाबू की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है, और इसमें पार्टी से निकाले गए वरिष्ठ नेताओं द्वारा दायर मूल चुनौती अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच निरर्थक होती दिख रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की जड़ें 2022 में AIADMK के भीतर भड़के नेतृत्व संघर्ष में हैं, जब पार्टी दो खेमों में बँट गई थी — एक का नेतृत्व एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) और दूसरे का ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) कर रहे थे। इसी खींचतान के बीच 11 जुलाई 2022 को आयोजित जनरल काउंसिल बैठक निर्णायक मोड़ बनी।
बैठक से पहले पन्नीरसेल्वम ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाकर इस पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने अंतरिम स्थगन देने से इनकार कर दिया। नतीजतन बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार हुई और कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
निष्कासन और कानूनी चुनौती
उन्हीं प्रस्तावों में से एक के तहत ओ. पन्नीरसेल्वम, मनोज पांडियन, जे.सी.डी. प्रभाकर और वैथिलिंगम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन चारों नेताओं ने अपने निष्कासन को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद से यह मामला AIADMK के अन्य नेतृत्व-संबंधी विवादों के साथ लंबित चला आ रहा है।
बदले राजनीतिक समीकरण
तीन वर्षों में जमीनी राजनीति पूरी तरह बदल गई है। जे.सी.डी. प्रभाकर बाद में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) में शामिल होकर वहाँ स्पीकर बनाए गए, जबकि ओ. पन्नीरसेल्वम और उनके कई सहयोगियों ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का दामन थाम लिया। इन्हीं बदली परिस्थितियों को आधार बनाकर प्रभाकर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में हाईकोर्ट रजिस्ट्री को पत्र लिखकर मुकदमा वापस लेने की अनुमति माँगी है।
बुधवार को क्या हुआ
बुधवार की सुनवाई में न्यायमूर्ति कुमारेश बाबू को बताया गया कि वापसी संबंधी पत्र रजिस्ट्री से अदालत तक नहीं पहुँच सका, जिसके चलते अनुरोध पर विचार संभव नहीं हो पाया। प्रक्रिया संबंधी इस देरी के बाद न्यायाधीश ने मामले को गुरुवार के लिए स्थगित करते हुए पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
आगे क्या
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अदालत वापसी अनुरोध को स्वीकार करती है या नहीं। यदि अनुमति मिल जाती है, तो AIADMK के 2022 के विभाजन से जुड़ा एक प्रमुख कानूनी अध्याय औपचारिक रूप से बंद हो जाएगा — हालाँकि पार्टी के नेतृत्व विवाद से जुड़े कई अन्य मुकदमे अब भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।