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मद्रास हाईकोर्ट आज करेगा AIADMK 2022 निष्कासन मामले की वापसी याचिका पर सुनवाई

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मद्रास हाईकोर्ट आज करेगा AIADMK 2022 निष्कासन मामले की वापसी याचिका पर सुनवाई

सारांश

AIADMK के 2022 विभाजन की कानूनी गूँज अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। पन्नीरसेल्वम DMK में, प्रभाकर TVK में — बदले समीकरणों के बीच निष्कासित नेता ही अब मद्रास हाईकोर्ट से अपना मुकदमा वापस लेना चाहते हैं। गुरुवार की सुनवाई पार्टी के सबसे कड़वे आंतरिक संघर्ष का औपचारिक पटाक्षेप कर सकती है।

मुख्य बातें

मद्रास हाईकोर्ट गुरुवार को न्यायमूर्ति एन.
कुमारेश बाबू की पीठ में AIADMK निष्कासन मामले की वापसी याचिका पर सुनवाई करेगा।
विवाद 11 जुलाई 2022 की जनरल काउंसिल बैठक से जुड़ा है, जिसमें ओ.
पन्नीरसेल्वम , मनोज पांडियन , जे.सी.डी.
प्रभाकर और वैथिलिंगम को निष्कासित किया गया था।
प्रभाकर अब TVK के स्पीकर हैं, जबकि पन्नीरसेल्वम और उनके सहयोगी DMK में शामिल हो चुके हैं।
बुधवार को वापसी पत्र रजिस्ट्री से अदालत तक नहीं पहुँचने के कारण सुनवाई स्थगित हुई।
याचिका मंज़ूर होने पर 2022 के AIADMK विभाजन का एक प्रमुख कानूनी अध्याय बंद हो जाएगा।

मद्रास हाईकोर्ट गुरुवार, 5 जून को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें 2022 के AIADMK निष्कासन विवाद से जुड़े मुकदमे को वापस लेने की अनुमति माँगी गई है। यह मामला न्यायमूर्ति एन. कुमारेश बाबू की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है, और इसमें पार्टी से निकाले गए वरिष्ठ नेताओं द्वारा दायर मूल चुनौती अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच निरर्थक होती दिख रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की जड़ें 2022 में AIADMK के भीतर भड़के नेतृत्व संघर्ष में हैं, जब पार्टी दो खेमों में बँट गई थी — एक का नेतृत्व एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) और दूसरे का ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) कर रहे थे। इसी खींचतान के बीच 11 जुलाई 2022 को आयोजित जनरल काउंसिल बैठक निर्णायक मोड़ बनी।

बैठक से पहले पन्नीरसेल्वम ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाकर इस पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी, लेकिन अदालत ने अंतरिम स्थगन देने से इनकार कर दिया। नतीजतन बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार हुई और कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

निष्कासन और कानूनी चुनौती

उन्हीं प्रस्तावों में से एक के तहत ओ. पन्नीरसेल्वम, मनोज पांडियन, जे.सी.डी. प्रभाकर और वैथिलिंगम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन चारों नेताओं ने अपने निष्कासन को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद से यह मामला AIADMK के अन्य नेतृत्व-संबंधी विवादों के साथ लंबित चला आ रहा है।

बदले राजनीतिक समीकरण

तीन वर्षों में जमीनी राजनीति पूरी तरह बदल गई है। जे.सी.डी. प्रभाकर बाद में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) में शामिल होकर वहाँ स्पीकर बनाए गए, जबकि ओ. पन्नीरसेल्वम और उनके कई सहयोगियों ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का दामन थाम लिया। इन्हीं बदली परिस्थितियों को आधार बनाकर प्रभाकर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में हाईकोर्ट रजिस्ट्री को पत्र लिखकर मुकदमा वापस लेने की अनुमति माँगी है।

बुधवार को क्या हुआ

बुधवार की सुनवाई में न्यायमूर्ति कुमारेश बाबू को बताया गया कि वापसी संबंधी पत्र रजिस्ट्री से अदालत तक नहीं पहुँच सका, जिसके चलते अनुरोध पर विचार संभव नहीं हो पाया। प्रक्रिया संबंधी इस देरी के बाद न्यायाधीश ने मामले को गुरुवार के लिए स्थगित करते हुए पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

आगे क्या

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अदालत वापसी अनुरोध को स्वीकार करती है या नहीं। यदि अनुमति मिल जाती है, तो AIADMK के 2022 के विभाजन से जुड़ा एक प्रमुख कानूनी अध्याय औपचारिक रूप से बंद हो जाएगा — हालाँकि पार्टी के नेतृत्व विवाद से जुड़े कई अन्य मुकदमे अब भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

आज वही याचिकाकर्ता दूसरी पार्टियों में सहज होकर मुकदमा छोड़ना चाहते हैं — यही दक्षिण भारतीय द्रविड़ राजनीति की तरलता का प्रमाण है। असली सवाल यह है कि EPS के नेतृत्व वाली AIADMK क्या इस वापसी का राजनीतिक लाभ उठाकर 2026 विधानसभा चुनाव से पहले अपने एकीकृत नेतृत्व का दावा मज़बूत कर पाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाईकोर्ट में AIADMK से जुड़ा कौन-सा मामला आज सुनवाई के लिए है?
यह 2022 के AIADMK निष्कासन को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने की अर्जी से जुड़ा मामला है। मूल मुकदमा ओ. पन्नीरसेल्वम, मनोज पांडियन, जे.सी.डी. प्रभाकर और वैथिलिंगम ने अपने निष्कासन के विरुद्ध दायर किया था, और अब याचिकाकर्ता इसे वापस लेना चाहते हैं।
11 जुलाई 2022 की जनरल काउंसिल बैठक में क्या हुआ था?
उस बैठक में पारित प्रस्तावों के ज़रिए AIADMK की नेतृत्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया और चार वरिष्ठ नेताओं — पन्नीरसेल्वम, पांडियन, प्रभाकर तथा वैथिलिंगम — को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पन्नीरसेल्वम ने बैठक रोकने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अंतरिम स्थगन नहीं मिला।
याचिकाकर्ता अब मुकदमा वापस क्यों लेना चाहते हैं?
बदले राजनीतिक हालात इसका मुख्य कारण हैं। जे.सी.डी. प्रभाकर तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) में शामिल होकर स्पीकर बन चुके हैं, जबकि ओ. पन्नीरसेल्वम और कुछ सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) में जा चुके हैं, जिससे AIADMK में पुनर्बहाली की प्रासंगिकता खत्म हो गई है।
बुधवार को सुनवाई स्थगित क्यों हुई?
न्यायमूर्ति एन. कुमारेश बाबू को बताया गया कि वापसी अनुरोध से जुड़ा पत्र हाईकोर्ट रजिस्ट्री से अदालत तक नहीं पहुँच पाया था। इसी प्रक्रियागत देरी के कारण अदालत अनुरोध पर विचार नहीं कर सकी और मामले को गुरुवार तक स्थगित कर दिया गया।
EPS और OPS के बीच विवाद का मूल कारण क्या था?
जयललिता के निधन के बाद AIADMK के एकल नेतृत्व को लेकर एडप्पादी के. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम के बीच गहरी खींचतान चली। 2022 की जनरल काउंसिल बैठक ने इस संघर्ष को निर्णायक रूप दिया, जिसमें EPS खेमे ने पन्नीरसेल्वम सहित विरोधी गुट के नेताओं को बाहर कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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