9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शशिकला और दिनाकरन को एआईएडीएमके में वापस लाओ — वेलुमणि और विश्वनाथन ने ईपीएस से की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शशिकला और दिनाकरन को एआईएडीएमके में वापस लाओ — वेलुमणि और विश्वनाथन ने ईपीएस से की अपील

सारांश

एआईएडीएमके में बड़ी बगावत — वेलुमणि और विश्वनाथन ने ईपीएस पर एकतरफा फैसलों का आरोप लगाते हुए शशिकला और दिनाकरन की वापसी की माँग की। 47 में से 25 विधायक विरोध में, और 2026 के चुनाव से पहले पार्टी में गहरी दरार उजागर।

मुख्य बातें

विश्वनाथन ने 9 अगस्त 2026 को संयुक्त बयान जारी कर वी.के.
दिनाकरन की एआईएडीएमके में वापसी की माँग की।
पार्टी के 47 में से 25 विधायकों ने पलानीस्वामी के चुनाव-बाद के फैसलों का विरोध किया।
आरोप: 2021 में गृह मंत्री अमित शाह की गठबंधन पहल को पलानीस्वामी ने ठुकराया, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ।
2024 के लोकसभा चुनाव में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन ने तमिलनाडु और पुडुचेरी की सभी 40 सीटें जीतीं।
दोनों नेताओं ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तत्काल सुधारात्मक कदम और सुलह वार्ता की माँग की।

एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि और नथम आर. विश्वनाथन ने 9 अगस्त 2026 को पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी से खुले तौर पर मांग की है कि निष्कासित नेताओं वी.के. शशिकला और टी.टी.वी. दिनाकरन को पार्टी में वापस लाया जाए। दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर पलानीस्वामी के नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए और कहा कि उनके एकतरफा फैसलों ने पार्टी को लगातार चुनावी हार की ओर धकेला है।

मुख्य आरोप और मांगें

वेलुमणि और विश्वनाथन ने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी के एकतरफा निर्णयों के कारण एआईएडीएमके को लगातार चुनावी पराजय झेलनी पड़ी और पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा फैली। उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) के साथ गठबंधन का अवसर गँवाया गया। इसके अलावा, चुनाव के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उचित परामर्श किए बिना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के साथ सरकार बनाने की कोशिश की गई — जो नेताओं के अनुसार पार्टी की परंपरा के विरुद्ध था।

आंतरिक फूट और विधायकों का विरोध

बयान में दावा किया गया कि चुनाव बाद की रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर गंभीर दरार आ गई है। पार्टी के 47 में से 25 विधायकों ने उन कदमों का विरोध किया, जिन्हें वे पार्टी के संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की राजनीतिक विरासत के खिलाफ मानते थे। यह विरोध संगठन के भीतर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है।

2021 और 2024 के चुनावों पर आरोप

नेताओं ने बताया कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चेन्नई में दिनाकरन को शामिल कर एक व्यापक गठबंधन बनाने के लिए बातचीत की थी। उनके अनुसार, पार्टी से निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम इस प्रस्ताव के लिए तैयार थे, परंतु पलानीस्वामी ने इसे ठुकरा दिया — जिसके चलते एआईएडीएमके को कई निर्वाचन क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ा।

2024 के संसदीय चुनाव में भी, बयान के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व की गठबंधन पुनर्स्थापना की पहल को बिना उचित विचार-विमर्श के नकार दिया गया। इसके परिणामस्वरूप डीएमके-कांग्रेस गठबंधन ने तमिलनाडु और पुडुचेरी की सभी 40 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की। उन्होंने यह भी कहा कि पीएमके के साथ समझौते में देरी के कारण एआईएडीएमके एक और संभावित सहयोगी से हाथ धो बैठी।

सुलह की मांग और आगे की राह

वेलुमणि और विश्वनाथन ने पलानीस्वामी से बड़ा गठबंधन बनाने के उनके बार-बार के वादों की याद दिलाई और कहा कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भी वैसी ही रणनीतिक भूलें दोहराई जा रही हैं। उन्होंने माँग की कि पार्टी तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए, शशिकला और दिनाकरन जैसे अलग हुए नेताओं से सुलह की बातचीत शुरू करे और संगठन को फिर से मजबूत बनाए। यह माँग ऐसे समय में आई है जब 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव निकट हैं और एआईएडीएमके के लिए हर सीट और हर सहयोगी की अहमियत बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2026 के तमिलनाडु चुनाव से पहले एआईएडीएमके के अस्तित्व की लड़ाई का संकेत है। जिस पार्टी ने कभी तमिलनाडु की राजनीति पर एकछत्र राज किया, वह आज 47 में से 25 विधायकों की बगावत झेल रही है — यह संख्या नेतृत्व की कमज़ोरी को बेनकाब करती है। शशिकला और दिनाकरन की वापसी की माँग एक जोखिम भरा दांव है, क्योंकि इन दोनों नेताओं की छवि खुद विवादास्पद रही है। असली सवाल यह है कि क्या पलानीस्वामी इस दबाव में झुकेंगे, या पार्टी 2026 में और बिखरी हुई दिखेगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेलुमणि और विश्वनाथन ने शशिकला और दिनाकरन की वापसी की माँग क्यों की?
दोनों नेताओं का कहना है कि पलानीस्वामी के एकतरफा फैसलों ने पार्टी को लगातार चुनावी हार दिलाई है और संगठन में गहरी दरार आई है। उनके अनुसार, शशिकला और दिनाकरन जैसे अनुभवी नेताओं की वापसी से पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में आ सकती है।
एआईएडीएमके में कितने विधायकों ने पलानीस्वामी के फैसलों का विरोध किया?
वेलुमणि और विश्वनाथन के बयान के अनुसार, पार्टी के 47 में से 25 विधायकों ने पलानीस्वामी के चुनाव-बाद के कदमों का विरोध किया। इन विधायकों का मानना था कि ये कदम पार्टी के संस्थापकों एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता की राजनीतिक विरासत के खिलाफ थे।
2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके को क्या नुकसान हुआ?
बयान के अनुसार, BJP नेतृत्व की गठबंधन पुनर्स्थापना की पहल को बिना उचित विचार-विमर्श के नकारे जाने के कारण डीएमके-कांग्रेस गठबंधन ने तमिलनाडु और पुडुचेरी की सभी 40 लोकसभा सीटें जीत लीं। एआईएडीएमके इस चुनाव में अकेली रह गई।
2021 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर क्या हुआ था?
वेलुमणि और विश्वनाथन के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2021 के चुनाव से पहले चेन्नई में दिनाकरन को शामिल कर व्यापक गठबंधन बनाने की पहल की थी। उनका दावा है कि ओ. पन्नीरसेल्वम इस प्रस्ताव के लिए तैयार थे, लेकिन पलानीस्वामी ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिससे पार्टी को कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा।
2026 के तमिलनाडु चुनाव से पहले एआईएडीएमके की स्थिति क्या है?
पार्टी आंतरिक कलह और विधायकों के विरोध के बीच 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। वेलुमणि और विश्वनाथन ने तत्काल सुधारात्मक कदम और सुलह वार्ता की माँग की है, ताकि पार्टी एकजुट होकर चुनाव में उतर सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले