दिल्ली में छात्राओं का सॉलिडैरिटी मार्च: लेडी श्रीराम कॉलेज से उठी जवाबदेही की आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर एक सॉलिडैरिटी मार्च निकाला, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों की छात्राएं भी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने उत्पीड़न और दुष्कर्म की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए दिल्ली पुलिस, गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार से जवाबदेही तय करने का आह्वान किया।
मार्च का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
मार्च में शामिल छात्रा अन्नपूर्णा ने इसे 'सॉलिडैरिटी मार्च' बताते हुए कहा कि यह आयोजन किसी एक पीड़िता के समर्थन तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह मार्च उन सभी लड़कियों के लिए है जिनके साथ ऐसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं की प्रमुख माँग महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी दिल्ली में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली के कॉलेज परिसरों से महिला सुरक्षा को लेकर सड़कों पर विरोध की आवाज़ उठी हो।
छात्राओं की पीड़ा और डर का इज़हार
एक अन्य छात्रा ने बताया कि परिसर में और उसके बाहर सड़कों पर छात्राएं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और दिल्ली की संस्थाओं के प्रति गहरी निराशा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की ज़िम्मेदारी लोगों को सुरक्षित रखना है और अपराधियों को पकड़ना सुनिश्चित करना चाहिए।
छात्रा ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि लड़कों तथा युवाओं को इस तरह शिक्षित किया जाना चाहिए कि वे महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव रखें। उनके अनुसार, समाज को यह संदेश देना होगा कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का अपराध कभी स्वीकार्य नहीं है।
संस्थागत जवाबदेही की माँग
छात्राओं ने तीखे सवाल उठाए कि यदि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को घरों में रहने या कॉलेज न जाने की सलाह दी जाए, तो यह समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा करना है। उन्होंने चेताया कि यदि संस्थाएं अपराधियों को नहीं रोक पाईं, तो भविष्य में लड़कियों को घरों तक सीमित होना पड़ेगा।
छात्राओं ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय से स्पष्ट जवाबदेही की माँग की। साथ ही, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी सवाल किया गया कि राजधानी में महिलाएं सुरक्षित क्यों नहीं हैं और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल क्यों हो रही है।
आम जनता और समाज पर असर
यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था — यह उस व्यापक बेचैनी का प्रतीक है जो दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाली लाखों छात्राओं के मन में घर कर चुकी है। आलोचकों का कहना है कि महिला सुरक्षा को लेकर बार-बार की जाने वाली घोषणाएं ज़मीनी स्तर पर परिणाम देने में नाकाम रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुलिसिंग, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक शिक्षा में एक साथ बदलाव नहीं होता, तब तक ऐसे विरोध प्रदर्शन बार-बार होते रहेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली सरकार और पुलिस प्रशासन छात्राओं की माँगों पर क्या ठोस प्रतिक्रिया देते हैं।