लेडी श्रीराम कॉलेज की ऑनलाइन शिफ्ट पर संदीप दीक्षित का हमला — दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में लेडी श्रीराम कॉलेज द्वारा कथित गैंगरेप की घटना के बाद नियमित ऑफलाइन कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित किए जाने के फैसले को 'गलत' करार देते हुए दिल्ली की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान को सुरक्षा कारणों से इस तरह का निर्णय लेने पर मजबूर होना, राजधानी की पुलिसिंग और प्रशासन की घोर विफलता को दर्शाता है।
कॉलेज के फैसले पर दीक्षित की आपत्ति
दीक्षित ने कहा कि लेडी श्रीराम कॉलेज जैसे संस्थान को ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन करना पड़ा, इससे वहाँ पढ़ने वाली छात्राओं — विशेषकर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं — के बीच व्याप्त भय का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर किसी कॉलेज जैसे संस्थान में आने-जाने वाले लोगों को न्यूनतम सुरक्षा का एहसास भी नहीं कराया जा सकता, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठता है।'
दीक्षित का तर्क है कि कॉलेज प्रशासन का यह कदम स्वयं ही स्वीकार करता है कि परिसर के इर्द-गिर्द का वातावरण छात्राओं के लिए सुरक्षित नहीं है। उनके मुताबिक, ऑनलाइन शिफ्ट 'समाधान' नहीं, बल्कि विफलता की स्वीकृति है।
केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस पर निशाना
कांग्रेस नेता ने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस के लिए गंभीर प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस — तीनों को इस स्थिति पर तत्काल और गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
दीक्षित ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ समय से महिलाओं के खिलाफ गंभीर और घिनौने अपराध लगातार सामने आ रहे हैं, फिर भी समाज और प्रशासन दोनों स्तरों पर वह प्रतिक्रिया नहीं दिख रही जो ऐसी परिस्थितियों में अपेक्षित होती है।
सामाजिक आंदोलन की कमी पर चिंता
दीक्षित ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर दिल्ली के समाज की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर अपराधों के बावजूद समाज में उस स्तर का आंदोलन या विरोध दिखाई नहीं दे रहा, जैसा पहले देखने को मिलता था। उनके अनुसार, इन मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर समाज, महिला सुरक्षा और अपराध के विषय के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपनी आवाज उठाकर सरकार तक बात पहुँचाएँ।
SIR विवाद और चुनाव आयुक्तों पर गंभीर आरोप
उसी प्रेस वार्ता में दीक्षित ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के दावों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई बातें तथ्यों पर आधारित हैं और यदि वे सही साबित होती हैं तो चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर बड़े सवाल खड़े होंगे।
दीक्षित ने आरोप लगाया कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं और फॉर्म में बदलाव किए गए और संसद के अधिकारों को भी नजरअंदाज किया गया। उन्होंने सांसदों से माँग की कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार करें और आपराधिक मामला चलाए जाने की भी वकालत की।
आगे क्या
यह देखना होगा कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं। लेडी श्रीराम कॉलेज की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऑफलाइन कक्षाएं कब पुनः शुरू होंगी। SIR विवाद पर राजनीतिक घमासान भी आने वाले दिनों में तेज होने की संभावना है।