अशोक गहलोत का केंद्र पर हमला: 'सरकार ने दिल्ली में आतंक मचाया, सुप्रीम कोर्ट को रविवार को खुलना पड़ा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 11 अक्टूबर 2026 को जयपुर में मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रविवार को दिल्ली में मेट्रो व रेलवे सेवाओं के सामान्य संचालन और इंटरनेट कनेक्टिविटी बहाल करने के निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं।
गहलोत के तीखे आरोप
गहलोत ने कहा, 'देश के अंदर हालात बड़े गंभीर होते जा रहे हैं। आज रविवार को सुप्रीम कोर्ट खुल रहा है तो आप अंदाजा लगा लीजिए। इतिहास में पहली बार इस प्रकार के काम के लिए सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी पड़ रही है कि मेट्रो बंद क्यों किए जा रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों की गिरफ्तारी के मामले में भी सुनवाई की संभावना है।
गहलोत ने आरोप लगाया, 'सरकार जिस तरह से खुद अराजकता फैला रही है, समझ नहीं आ रहा कि ये चाहते क्या हैं। ऐसी स्थिति हो गई है जैसे कोई क्रैकडाउन हो। सरकार ने खुद पूरी दिल्ली में आतंक मचा रखा है।'
बैरिकेडिंग और हिरासत पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई है और देशभर से आने वाले नागरिकों को पाबंदियों व बदसलूकी का सामना करना पड़ रहा है। गहलोत ने कहा, 'ये सभी इसी देश के नागरिक हैं, बाहरी नहीं।'
उन्होंने नेताओं की हिरासत और रिहाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए — कुछ को छोड़ा गया जबकि कुछ अभी भी हिरासत में हैं। उन्होंने सरकार से विपक्ष के साथ संवाद कायम करने और चुनावी गड़बड़ियों को लेकर जताई जा रही चिंताओं का समाधान करने की माँग की।
वकीलों और विपक्ष के साथ व्यवहार पर सवाल
गहलोत ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल जैसे बड़े कानूनविद भी शिकायत कर रहे हैं कि वकीलों की सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अनुचित व्यवहार हो रहा है।
उनके अनुसार, विपक्ष को संवैधानिक मर्यादा के तहत जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा, और देश में लोकतंत्र की भूमिका का सही निर्वहन नहीं हो रहा।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने असामान्य रूप से रविवार को भी सुनवाई कर दिल्ली में मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाओं की बहाली के निर्देश जारी किए। गौरतलब है कि रविवार को शीर्ष अदालत का बैठना अपने आप में एक असाधारण घटनाक्रम माना जाता है, जो मौजूदा हालात की गंभीरता को रेखांकित करता है। राजनीतिक तनाव और न्यायिक हस्तक्षेप के बीच अगले कुछ घंटों में स्थिति कैसे करवट लेती है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।