सोनिया गांधी का 'द गार्जियन' इंटरव्यू: इंदिरा की हत्या का दर्द, आपातकाल पर 'गलती' और वंशवाद पर चुप्पी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में अपने पारिवारिक और राजनीतिक जीवन के कई अनछुए पहलुओं को सामने रखा। 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित इस इंटरव्यू के साथ उनके संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का एक संपादित अंश भी छापा गया, जो अगले सप्ताह की शुरुआत में प्रकाशित होने वाली है। हालांकि, जब कांग्रेस में गांधी परिवार के वर्चस्व और वंशवाद पर सीधे सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
वंशवाद पर सोनिया का रुख
जब अखबार ने पूछा कि कांग्रेस गांधी परिवार के नेतृत्व से खुद को अलग क्यों नहीं कर पाती, तो सोनिया गांधी ने कहा, 'आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए।' वंशवाद के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'हम सभी चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और हारते हैं। हम सभी के साथ ऐसा हुआ है।' अखबार ने टिप्पणी की कि सोनिया गांधी ने इस प्रश्न को प्रभावी रूप से टाल दिया।
साक्षात्कार में यह भी पूछा गया कि लगातार चुनावी हार के बाद क्या गांधी परिवार के नेतृत्व वाली कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने एक विश्वसनीय विकल्प बन सकती है। सोनिया इस दावे पर कायम रहीं कि कांग्रेस यह कर सकती है, यद्यपि अखबार के अनुसार देश में बड़ी संख्या में लोग इससे सहमत नहीं हैं।
यूपीए कार्यकाल और पार्टी की गिरती स्थिति
2004 से 2014 तक सत्ता में रही कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान सामने आए विवादों और आरोपों का जिक्र किए जाने पर सोनिया गांधी ने कहा, 'लगभग हर मामले में मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था।' अखबार ने टिप्पणी की कि तब से गांधी परिवार ने कांग्रेस के लगातार गिरते राजनीतिक प्रभाव को देखा है।
लेख में राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार तीन लोकसभा चुनावों में मिली हार का उल्लेख किया गया। कांग्रेस अब केवल कुछ राज्यों में सत्ता में है, जबकि BJP की हिंदुत्व की राजनीति देश की प्रमुख राजनीतिक विचारधारा बनकर उभरी है। अखबार के मुताबिक, गांधी परिवार के नियंत्रण के कारण कांग्रेस वंशवाद और राजनीतिक अभिजात वर्ग के नेतृत्व वाली पार्टी होने के आरोपों से खुद को मुक्त नहीं करा पाई है।
आपातकाल: 'गलती थी, इंदिराजी भी सहज नहीं थीं'
1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर सोनिया गांधी ने इसे एक 'गलती' करार दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते को लेकर कभी सहज नहीं थीं। मुझे लगता है कि यह बात उन्हें भीतर से परेशान कर रही थी।' उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं।
उन्होंने खुलासा किया कि आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर गांधी परिवार में मतभेद थे। अखबार के अनुसार, उनके पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी माँ से अगला चुनाव होने तक प्रतीक्षा करने को कहा था। वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल का समर्थन किया था। संजय गांधी ने कथित तौर पर एक पारिवारिक रात्रिभोज के दौरान कहा था कि विपक्ष उनकी माँ को बर्बाद कर देगा और उसे रोकना जरूरी है। किताब के एक अंश के हवाले से अखबार ने लिखा, 'संजय को नियंत्रण में रखा जाता तो बाद में हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।'
इंदिरा गांधी की हत्या का अविस्मरणीय दर्द
सोनिया गांधी ने साक्षात्कार में अपनी सास इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद के मानसिक आघात को बेहद भावुक शब्दों में याद किया। उन्होंने बताया कि उस दिन उन्होंने गोलियों की आवाज को आतिशबाजी जैसी आवाज समझा था। इसके बाद उन्होंने अपनी सास के शरीर को गोलियों से छलनी और खून से लथपथ देखा।
अखबार के विवरण के अनुसार, कार में अस्पताल ले जाते समय सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के खून से लथपथ शरीर को संभाला। सोनिया गांधी ने याद करते हुए कहा, 'चारों तरफ खून था और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं। ऐसा लग रहा था कि वह पहले ही जा चुकी हैं।' उन्होंने उस सफर को बेहद पीड़ादायक बताया — रास्ता बहुत लंबा लग रहा था, भले ही सड़क पर यातायात कम था।
राजीव गांधी की हत्या के बाद का मानसिक संघर्ष
सोनिया गांधी ने पति राजीव गांधी की हत्या के बाद के अपने जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में वह गहरे सदमे और अवसाद में थीं और खुद को एक भूत की तरह महसूस करती थीं। गौरतलब है कि यह संस्मरण ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस अपने राजनीतिक पुनरुत्थान की राह पर है और गांधी परिवार की भूमिका पर बहस जारी है।