7 नवंबर 2026
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सोनिया गांधी का 'द गार्जियन' इंटरव्यू: इंदिरा की हत्या का दर्द, आपातकाल पर 'गलती' और वंशवाद पर चुप्पी

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सोनिया गांधी का 'द गार्जियन' इंटरव्यू: इंदिरा की हत्या का दर्द, आपातकाल पर 'गलती' और वंशवाद पर चुप्पी

सारांश

सोनिया गांधी ने 'द गार्जियन' को दिए इंटरव्यू में इंदिरा की हत्या का हृदयविदारक विवरण, 1975 के आपातकाल को 'गलती' और परिवार में उस पर मतभेद की बात कही — लेकिन वंशवाद पर सीधे जवाब देने की बजाय कहा: 'पार्टी से पूछिए।' यह इंटरव्यू उनके आगामी संस्मरण के साथ प्रकाशित हुआ।

मुख्य बातें

सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को दिए इंटरव्यू में अपने संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के साथ व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभव साझा किए।
वंशवाद के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'यह सवाल पार्टी से पूछा जाना चाहिए' — सीधे जवाब से परहेज किया।
1975 के आपातकाल को उन्होंने 'गलती' बताया और कहा कि इंदिरा गांधी भी उस फैसले को लेकर 'कभी सहज नहीं थीं।' परिवार में राजीव गांधी आपातकाल के खिलाफ थे, जबकि संजय गांधी ने इसका समर्थन किया था।
सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन का मार्मिक विवरण दिया — कार में खून से लथपथ शरीर को संभालने का आँखों देखा हाल बताया।
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को तीन लगातार लोकसभा चुनावों में हार का उल्लेख अखबार ने किया।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में अपने पारिवारिक और राजनीतिक जीवन के कई अनछुए पहलुओं को सामने रखा। 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित इस इंटरव्यू के साथ उनके संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का एक संपादित अंश भी छापा गया, जो अगले सप्ताह की शुरुआत में प्रकाशित होने वाली है। हालांकि, जब कांग्रेस में गांधी परिवार के वर्चस्व और वंशवाद पर सीधे सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।

वंशवाद पर सोनिया का रुख

जब अखबार ने पूछा कि कांग्रेस गांधी परिवार के नेतृत्व से खुद को अलग क्यों नहीं कर पाती, तो सोनिया गांधी ने कहा, 'आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए।' वंशवाद के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'हम सभी चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और हारते हैं। हम सभी के साथ ऐसा हुआ है।' अखबार ने टिप्पणी की कि सोनिया गांधी ने इस प्रश्न को प्रभावी रूप से टाल दिया।

साक्षात्कार में यह भी पूछा गया कि लगातार चुनावी हार के बाद क्या गांधी परिवार के नेतृत्व वाली कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने एक विश्वसनीय विकल्प बन सकती है। सोनिया इस दावे पर कायम रहीं कि कांग्रेस यह कर सकती है, यद्यपि अखबार के अनुसार देश में बड़ी संख्या में लोग इससे सहमत नहीं हैं।

यूपीए कार्यकाल और पार्टी की गिरती स्थिति

2004 से 2014 तक सत्ता में रही कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान सामने आए विवादों और आरोपों का जिक्र किए जाने पर सोनिया गांधी ने कहा, 'लगभग हर मामले में मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था।' अखबार ने टिप्पणी की कि तब से गांधी परिवार ने कांग्रेस के लगातार गिरते राजनीतिक प्रभाव को देखा है।

लेख में राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार तीन लोकसभा चुनावों में मिली हार का उल्लेख किया गया। कांग्रेस अब केवल कुछ राज्यों में सत्ता में है, जबकि BJP की हिंदुत्व की राजनीति देश की प्रमुख राजनीतिक विचारधारा बनकर उभरी है। अखबार के मुताबिक, गांधी परिवार के नियंत्रण के कारण कांग्रेस वंशवाद और राजनीतिक अभिजात वर्ग के नेतृत्व वाली पार्टी होने के आरोपों से खुद को मुक्त नहीं करा पाई है।

आपातकाल: 'गलती थी, इंदिराजी भी सहज नहीं थीं'

1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर सोनिया गांधी ने इसे एक 'गलती' करार दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते को लेकर कभी सहज नहीं थीं। मुझे लगता है कि यह बात उन्हें भीतर से परेशान कर रही थी।' उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं।

उन्होंने खुलासा किया कि आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर गांधी परिवार में मतभेद थे। अखबार के अनुसार, उनके पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी माँ से अगला चुनाव होने तक प्रतीक्षा करने को कहा था। वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल का समर्थन किया था। संजय गांधी ने कथित तौर पर एक पारिवारिक रात्रिभोज के दौरान कहा था कि विपक्ष उनकी माँ को बर्बाद कर देगा और उसे रोकना जरूरी है। किताब के एक अंश के हवाले से अखबार ने लिखा, 'संजय को नियंत्रण में रखा जाता तो बाद में हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।'

इंदिरा गांधी की हत्या का अविस्मरणीय दर्द

सोनिया गांधी ने साक्षात्कार में अपनी सास इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद के मानसिक आघात को बेहद भावुक शब्दों में याद किया। उन्होंने बताया कि उस दिन उन्होंने गोलियों की आवाज को आतिशबाजी जैसी आवाज समझा था। इसके बाद उन्होंने अपनी सास के शरीर को गोलियों से छलनी और खून से लथपथ देखा।

अखबार के विवरण के अनुसार, कार में अस्पताल ले जाते समय सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के खून से लथपथ शरीर को संभाला। सोनिया गांधी ने याद करते हुए कहा, 'चारों तरफ खून था और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं। ऐसा लग रहा था कि वह पहले ही जा चुकी हैं।' उन्होंने उस सफर को बेहद पीड़ादायक बताया — रास्ता बहुत लंबा लग रहा था, भले ही सड़क पर यातायात कम था।

राजीव गांधी की हत्या के बाद का मानसिक संघर्ष

सोनिया गांधी ने पति राजीव गांधी की हत्या के बाद के अपने जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में वह गहरे सदमे और अवसाद में थीं और खुद को एक भूत की तरह महसूस करती थीं। गौरतलब है कि यह संस्मरण ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस अपने राजनीतिक पुनरुत्थान की राह पर है और गांधी परिवार की भूमिका पर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ कहीं अधिक गहरे हैं। वंशवाद के सवाल पर 'पार्टी से पूछिए' वाला जवाब उस असुविधाजनक सच्चाई को रेखांकित करता है जिससे कांग्रेस स्वयं जूझती रही है — नेतृत्व का प्रश्न हमेशा परिवार पर आकर टिक जाता है। आपातकाल को 'गलती' बताना ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्वीकृति है, परंतु यह पाँच दशक बाद आई है और इसमें कोई ठोस जवाबदेही नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह संस्मरण कांग्रेस की छवि को नया आयाम देगा या गांधी परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित राजनीतिक विमर्श को और मजबूत करेगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनिया गांधी ने 'द गार्जियन' इंटरव्यू में क्या कहा?
सोनिया गांधी ने 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित इस इंटरव्यू में अपने परिवार, राजनीतिक जीवन, इंदिरा गांधी की हत्या का दर्द और 1975 के आपातकाल पर अपनी राय साझा की। वंशवाद के सवाल पर उन्होंने सीधे जवाब देने से परहेज किया।
सोनिया गांधी का आगामी संस्मरण किस बारे में है?
'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' सोनिया गांधी का संस्मरण है जो 'द गार्जियन' इंटरव्यू के अगले सप्ताह की शुरुआत में प्रकाशित होने वाला है। इसमें उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के अनुभव शामिल हैं।
सोनिया गांधी ने 1975 के आपातकाल पर क्या कहा?
सोनिया गांधी ने 1975 के आपातकाल को एक 'गलती' बताया और कहा कि उनकी सास इंदिरा गांधी भी उस फैसले को लेकर कभी सहज नहीं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार में इस फैसले पर मतभेद था — राजीव गांधी इसके विरुद्ध थे, जबकि संजय गांधी ने इसका समर्थन किया था।
सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी की हत्या के दिन के बारे में क्या बताया?
सोनिया गांधी ने बताया कि उन्होंने पहले गोलियों की आवाज को आतिशबाजी समझा, फिर इंदिरा गांधी को खून से लथपथ देखा। कार में अस्पताल जाते समय उन्होंने उनके शरीर को संभाला और कहा, 'चारों तरफ खून था और वह मेरे सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं।'
कांग्रेस और गांधी परिवार के वंशवाद पर सोनिया गांधी का जवाब क्या था?
जब पूछा गया कि कांग्रेस गांधी परिवार से खुद को अलग क्यों नहीं कर पाती, तो सोनिया गांधी ने कहा, 'आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए।' वंशवाद पर उन्होंने कहा, 'हम सभी चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं और हारते हैं।' अखबार ने टिप्पणी की कि उन्होंने इस प्रश्न को प्रभावी रूप से टाल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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