गाजा नीति पर सोनिया गांधी के हमले का एनडीए ने दिया करारा जवाब, 'सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारत की गाजा नीति को लेकर कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के सवाल उठाने के बाद 27 जून 2025 को राजनीतिक घमासान तेज हो गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित रही है और देश का उद्देश्य किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं, बल्कि वैश्विक शांति एवं कूटनीतिक समाधान को प्रोत्साहन देना है।
सोनिया गांधी ने क्या कहा
सोनिया गांधी ने अपने एक लेख में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि गाजा संघर्ष पर सरकार की 'चुप्पी' और 'निष्क्रियता' न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि राष्ट्रीय हित के नजरिए से भी समझ से परे है। उनके इस लेख ने सत्तारूढ़ गठबंधन की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया।
एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता टी.आर. श्रीनिवास ने कहा कि सोनिया गांधी इस मुद्दे को अत्यंत संकीर्ण नजरिए से देख रही हैं। उन्होंने कहा, 'अगर वह केवल मुसलमानों की बात करती हैं तो यह तुष्टिकरण की राजनीति है। हम पूरी दुनिया की बात करते हैं। भारत विश्व शांति की बात करता है और चाहता है कि हर तरह की हिंसा रुके तथा सभी पक्ष बातचीत की मेज पर आएं, ताकि सभी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हो सके।'
श्रीनिवास ने आगे कहा कि किसी एक पक्ष को दोष देना उचित नहीं है और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी पक्षों की है। उनके अनुसार, भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में इसी सिद्धांत के आधार पर आगे बढ़ रहा है।
BJP के नेता मनमीत सिंह ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सोनिया गांधी हमेशा विभाजन की राजनीति करती रही हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी के दौर में भी कांग्रेस ने इसी प्रकार की राजनीति की।
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीरज कुमार ने कहा कि भारत हमेशा से फिलिस्तीन का समर्थन करता आया है और इसका प्रमाणपत्र सोनिया गांधी से लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति पर लंबे समय से राष्ट्रीय सहमति रही है।
कांग्रेस और तृणमूल का पलटवार
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने यह लेख बेहद दुखी मन से लिखा है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने फिलिस्तीन जैसे मुद्दों पर भारत की पारंपरिक विदेश नीति से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अब तक गाजा में निर्दोष बच्चों की मौत की खुलकर निंदा नहीं की है।
वोट बैंक की राजनीति के आरोपों पर खेड़ा ने कहा, 'क्या हिंदू समाज गाजा में बच्चों की मौत देखकर दुखी नहीं हुआ होगा? एक हिंदू का हृदय भी करुणा से भरा होता है। अगर भाजपा इसे वोट बैंक की राजनीति बताती है, तो इससे ज्यादा शर्मनाक और मूर्खतापूर्ण टिप्पणी दूसरी नहीं हो सकती।'
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने भी सोनिया गांधी के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, तब भी भारत शांत रहा। रॉय ने कहा कि गाजा में निर्दोष बच्चों की मौत के मामले में भारत सरकार को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए थी।
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब गाजा संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी बहस का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि भारत ने परंपरागत रूप से फिलिस्तीन के स्वतंत्र राज्य का समर्थन किया है, लेकिन हाल के वर्षों में इजरायल के साथ रणनीतिक और रक्षा संबंध भी मजबूत हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि इस दोहरे रिश्ते ने गाजा संकट पर भारत की सार्वजनिक स्थिति को अस्पष्ट बना दिया है।
आगे क्या
यह मुद्दा संसद के आगामी सत्र में भी गूंजने की संभावना है, जहाँ विपक्षी दल सरकार की गाजा नीति पर स्पष्टीकरण माँग सकते हैं। भारत की विदेश नीति की दिशा और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन की यह बहस निकट भविष्य में और तेज होती दिखती है।