गाजा पर सोनिया गांधी के लेख से सियासत गरमाई, BJP-JDU ने कांग्रेस पर दोहरेपन का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गाजा संकट पर भारत की विदेश नीति को लेकर लिखे गए लेख ने राजनीतिक घमासान को जन्म दे दिया है। 27 जून को एनडीए के नेताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उस पर 'चयनात्मक संवेदनशीलता' और 'वोट बैंक की राजनीति' का आरोप लगाया।
भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा, 'सोनिया गांधी गाजा के विषय पर बार-बार जो आर्टिकल लिखती हैं और भारत की नीति की आलोचना करती हैं, इसके बारे में सोनिया गांधी ही बता सकती हैं कि वह ऐसा क्यों करती हैं? भारत की विदेश नीति पूरी तरह स्पष्ट है। गाजा में जो आम नागरिकों की जान गई है, हमने उसकी भी निंदा की है और इजरायल में हमास का अक्टूबर 2023 में जो आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 1,100 से अधिक लोगों की जान गई थी, उसे भी हमने पुरजोर तरीके से एक्ट ऑफ टेरर बताया था।'
सिन्हा ने आगे कहा, 'कांग्रेस का दोहरापन इस बात से प्रमाणित होता है कि वह गाजा के विषय पर तो आंसू बहाते नहीं थकती, लेकिन जब हमास के टेरर एक्ट के बारे में चर्चा होती है, तो उसे 'एक्ट ऑफ टेरर' बताने में चुप रहती है। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी यह वोट बैंक के लिए करती है।'
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति का सिद्धांत स्पष्ट है — जिन वैश्विक तनावों में भारत सीधे तौर पर नहीं जुड़ा, वहाँ वह शांति का पक्षधर रहता है। सिन्हा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होने पर पार्टी चुप रही, जो उसके दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
रोहन गुप्ता का आरोप — तुष्टिकरण की राजनीति
BJP नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि यह लेख कोई संयोग नहीं, बल्कि कांग्रेस की दीर्घकालिक तुष्टिकरण नीति का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया, 'जब इजरायल में लोगों पर हमले हुए, उन्हें मारा गया और अगवा किया गया, तब कांग्रेस की एक भी आवाज नहीं उठी।' गुप्ता ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए।
JDU का रुख — विदेश नीति पर देश एकजुट रहे
एनडीए में शामिल जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'भारतीय विदेश नीति का स्वर्ण काल चल रहा है। क्वाड, ब्रिक्स या जी7 हो, सभी वैश्विक मंचों पर भारत ने अपनी कूटनीति का लोहा मनवाया है।' रंजन ने सोनिया गांधी के सवालों को 'अव्यवहारिक' बताते हुए कहा कि विदेश नीति पर देश को कभी विभाजित नहीं दिखना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री किसी एक दल के नहीं, पूरे देश के हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब गाजा-इजरायल संघर्ष वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक दबाव का केंद्र बना हुआ है। भारत ने अब तक संतुलित रुख अपनाते हुए नागरिक हताहतों की निंदा की है और साथ ही हमास के अक्टूबर 2023 के हमले को आतंकवाद करार दिया है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी पहले भी इस विषय पर लेख लिख चुकी हैं, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव की यह एक पुनरावृत्ति है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ घरेलू राजनीतिक समीकरणों से प्रेरित हैं।
आगे क्या
इस विवाद के संसद के आगामी सत्र तक जारी रहने की संभावना है, जहाँ विपक्ष भारत की विदेश नीति पर बहस की माँग कर सकता है। कांग्रेस की ओर से अभी तक एनडीए के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।