सुधांशु त्रिवेदी का सोनिया गांधी पर हमला: गाजा पर कांग्रेस हमास-हिजबुल्ला को 'कवर फायर' दे रही है?
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 27 जून 2026 को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के गाजा-संबंधी लेख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। त्रिवेदी ने सार्वजनिक रूप से पूछा कि क्या कांग्रेस अप्रत्यक्ष रूप से हमास और हिजबुल्ला जैसे संगठनों को 'कवर फायर' देने का काम कर रही है।
त्रिवेदी का एक्स पर सीधा हमला
सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'आज इंडी गठबंधन के अप्रासंगिक होने की सीमा तक पहुंचने के बाद, समाप्त हो चुके यूपीए गठबंधन की प्रथम और अंतिम अध्यक्षा सोनिया गांधी ने एक बार फिर कट्टरपंथी वोटों के कारोबार पर नजर गड़ाकर गाजा के लिए गम का इजहार किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि गाजा पर संवेदना जताकर सोनिया गांधी न तो सत्ता से बाहर होने का गम भुला सकती हैं और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रभाव कम कर सकती हैं।
अक्टूबर 2023 नरसंहार पर चुप्पी का सवाल
BJP सांसद ने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि अक्टूबर 2023 में हुए नरसंहार पर पार्टी ने मौन क्यों साधा, जबकि गाजा के मुद्दे पर वह मुखर हो रही है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया, 'कांग्रेस स्पष्ट करे कि अक्टूबर 2023 के नरसंहार पर मौन रहकर और गाजा पर हाहाकार मचाकर क्या वह अप्रत्यक्ष रूप से हिजबुल्ला और हमास जैसे आतंकी संगठनों को 'कवर फायर' देने का काम कर रही है?' यह सवाल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बांग्लादेश-पाकिस्तान में हिंदुओं पर हिंसा का मुद्दा
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर चुप रहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'जो लोग बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं की हत्याओं पर बोलना अपनी तौहीन समझते हैं, वही गाजा के मुद्दे पर बेहद गमगीन नजर आ रहे हैं।' आलोचकों का कहना है कि यह बयान भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्ष की विदेश नीति संबंधी टिप्पणियों को तुष्टिकरण से जोड़ा जाता है।
भारत-ईरान संबंधों का संदर्भ
सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के संबंध मजबूत हैं और इसका प्रमाण यह है कि ईरान ने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है। यह टिप्पणी कांग्रेस के उस कथित आरोप के जवाब में आई जिसमें सरकार की पश्चिम एशिया नीति पर सवाल उठाए गए थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब गाजा संघर्ष वैश्विक स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और भारत में भी विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ उनकी घरेलू राजनीतिक स्थिति के इर्द-गिर्द आकार ले रही हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर और तीखी बहस की संभावना है।