11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राहुल गांधी 'बिगड़े शहजादे' हैं, गृह मंत्री बिंदुवार जवाब देने को तैयार — सुधांशु त्रिवेदी का सीधा वार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राहुल गांधी 'बिगड़े शहजादे' हैं, गृह मंत्री बिंदुवार जवाब देने को तैयार — सुधांशु त्रिवेदी का सीधा वार

सारांश

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को 'बिगड़े शहजादे' कहते हुए सीधी चुनौती दी — गृह मंत्री सदन में बिंदुवार जवाब देने को तैयार हैं, तो विपक्ष भागे क्यों? मानसून सत्र के अंतिम दौर में यह टकराव संसदीय कार्यवाही पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 11 अगस्त 2026 को प्रेस वार्ता में राहुल गांधी को 'बिगड़े हुए शहजादे' की संज्ञा दी।
गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बिंदुवार जवाब देने को तैयार हैं — त्रिवेदी ने विपक्ष से सदन न छोड़ने की अपील की।
सरकार ने विपक्ष की सभी प्रमुख माँगें मानीं — NEET नियम बदलाव , शिक्षा मंत्री का इस्तीफा , छात्रों के मामले वापसी — फिर भी सदन में व्यवधान जारी।
रांची के गैर-राजनीतिक छात्र आंदोलन की अनदेखी पर राहुल गांधी की आलोचना की गई।
त्रिवेदी ने अरुण जेटली , सोनिया गांधी और डॉ.
मनमोहन सिंह के विपक्ष नेता रहने के दौर से तुलना करते हुए वर्तमान आचरण को अभूतपूर्व बताया।
मानसून सत्र के बाद भारत आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और उन्हें 'बिगड़े हुए शहजादे' की संज्ञा दी। त्रिवेदी ने कहा कि जब-जब सदन में गृह मंत्री अमित शाह या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, राहुल गांधी तब-तब सदन छोड़कर चले गए। उन्होंने राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी कि गृह मंत्री सदन में आकर बिंदुवार जवाब देने को तैयार हैं, इसलिए सदन से भागना बंद करें।

क्या है पूरा विवाद

यह विवाद तब सामने आया जब राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके उठाए गए मुद्दों के सामने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह सदन में उनके समक्ष खड़े होने की स्थिति में नहीं हैं। इस दावे को BJP ने सिरे से नकारते हुए पलटवार किया। त्रिवेदी ने कहा, 'होंगे राजे-राजकुमार, ये बिगड़े दिल शहजादे' — यह कहते हुए उन्होंने राहुल गांधी के संसदीय आचरण पर सवाल खड़े किए।

विपक्ष की बदलती माँगों पर BJP का पलटवार

त्रिवेदी ने विस्तार से बताया कि सरकार ने विपक्ष की एक-एक माँग मानी। NEET परीक्षा के नियमों में बदलाव की माँग मानी गई। छात्रों की चाही कड़े कानूनों की माँग स्वीकार हुई, कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी और नया विधेयक भी पेश किया गया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग भी पूरी की गई। छात्रों के विरुद्ध दर्ज मामले वापस लेने की माँग भी मान ली गई। इसके बाद गृह मंत्री के सदन में आकर बयान देने की माँग को भी सरकार ने स्वीकार किया। त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि जब हर माँग मान ली गई, तो अब संसद को काम क्यों नहीं करने दिया जा रहा।

रांची छात्र आंदोलन का संदर्भ

रांची में चल रहे छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि वहाँ अनुशासित और पूर्णतः गैर-राजनीतिक छात्र अपनी सामान्य माँगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, और उनके साथ जो व्यवहार हो रहा है वह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कान इन छात्रों की पुकार के लिए बंद हैं।

पूर्व नेता प्रतिपक्षों से तुलना

त्रिवेदी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद संभाला, या जब अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में विपक्ष के नेता थे, तब ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गई। उन्होंने अरुण जेटली के विपक्ष नेता रहने के दौर और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय सोनिया गांधीडॉ. मनमोहन सिंह के विपक्ष में रहने का उदाहरण भी दिया।

लोकतंत्र पर गंभीर सवाल

BJP सांसद ने कहा कि संसद का मानसून सत्र अपने अंतिम दौर में है और इस सत्र के बाद भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि कोई व्यक्ति अहंकार और मनमानी के कारण देश के सर्वोच्च सदन को बंधक बना लेगा। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर PM मोदी का जवाब नहीं सुना गया, मणिपुर पर भी PM का जवाब सुने बिना कांग्रेस सदन छोड़ गई — और अब एक बार फिर वही रवैया दिख रहा है। आने वाले दिनों में गृह मंत्री के वक्तव्य के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष सदन में बना रहता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि संसद के मानसून सत्र में सार्थक विधायी कार्य क्यों नहीं हो पा रहा — और इसकी जिम्मेदारी केवल विपक्ष पर डालना पूरी तस्वीर नहीं है। विपक्ष की माँगें मानने के बाद भी सदन में गतिरोध बना रहना दोनों पक्षों की रणनीतिक राजनीति को दर्शाता है। रांची के छात्रों का मुद्दा इस राजनीतिक शोर में दब जाना चिंताजनक है — वह असली जनहित का प्रश्न है जिसे दोनों पक्ष मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, हल के रूप में नहीं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को 'बिगड़े शहजादे' क्यों कहा?
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 11 अगस्त 2026 को प्रेस वार्ता में राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे जब-जब सदन में PM मोदी या गृह मंत्री अमित शाह बोले, तब-तब सदन छोड़कर चले गए। इसी आचरण को उन्होंने 'बिगड़े हुए शहजादे' जैसा बताया।
गृह मंत्री अमित शाह सदन में क्या बयान देने वाले हैं?
त्रिवेदी के अनुसार गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सदन में आकर बिंदुवार जवाब देने को तैयार हैं। यह माँग स्वयं विपक्ष ने उठाई थी, जिसे सरकार ने स्वीकार किया।
BJP के अनुसार विपक्ष की कौन-कौन सी माँगें मानी गई हैं?
BJP के दावे के अनुसार सरकार ने NEET परीक्षा नियमों में बदलाव, कड़े कानून, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, छात्रों के मामले वापसी और गृह मंत्री का सदन में बयान — सभी माँगें मान ली हैं। इसके बावजूद सदन में व्यवधान जारी रहने पर BJP ने सवाल उठाए हैं।
रांची के छात्र आंदोलन का इस विवाद से क्या संबंध है?
त्रिवेदी ने रांची में चल रहे गैर-राजनीतिक छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन छात्रों की जायज माँगों पर राहुल गांधी का ध्यान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता इन छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
मानसून सत्र में यह विवाद किस पृष्ठभूमि में उभरा है?
संसद का मानसून सत्र अपने अंतिम चरण में है और इस सत्र के बाद भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा। इस दौरान सदन में लगातार व्यवधान को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है, जिसमें यह बयानबाजी नई कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. 19 घंटे पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले