भाजपा का राहुल गांधी पर तीखा हमला: सुधांशु त्रिवेदी बोले — 'उद्दंडता विक्षिप्तता में बदल रही है'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 14 अगस्त 2026 को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को 'कुंठित और विक्षिप्त' नेता करार देते हुए उन पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया। यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर अशोभनीय टिप्पणी की थी।
त्रिवेदी का सीधा आरोप
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा कि संसद सत्र को बाधित करने के बाद कांग्रेस के आधिकारिक मंच से राहुल गांधी ने जो भाषा इस्तेमाल की, वह 'असभ्य, अशोभनीय और निंदनीय' है। त्रिवेदी के अनुसार, 'राहुल गांधी की उद्दंडता अब विक्षिप्तता में बदलती जा रही है और ऐसा लगता है कि वो अपना संतुलन खोते जा रहे हैं।'
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी 'देश के लोकतंत्र और स्वस्थ लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए सीधी चुनौती' बन गए हैं।
संदीप दीक्षित प्रकरण का उल्लेख
त्रिवेदी ने गुरुवार की एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें राहुल गांधी और संदीप दीक्षित को एक-दूसरे को गले लगाते देखा गया था। भाजपा सांसद ने कहा कि संदीप दीक्षित वही व्यक्ति हैं जिन्होंने कथित तौर पर भारत के सेना प्रमुख को 'सड़क छाप गुंडे' कहा था। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के जेएनयू दौरे का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारे लगाने वालों का समर्थन किया था।
भाजपा का जनता से आह्वान
भाजपा नेता ने कहा कि देश की जनता को यह तय करना है कि राहुल गांधी का आचरण 'एक कुंठित और प्रधानमंत्री के प्रति ईर्ष्या से भरे नेता की बचकानी हरकत है या किसी गहरे षड्यंत्र का हिस्सा।' उन्होंने जनता से यह समझने का आग्रह किया कि 'कौन देश के हित की बात कर रहा है।'
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश का राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। संसद सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की यह कड़ी नई नहीं है, लेकिन इस बार व्यक्तिगत आरोपों की तीव्रता उल्लेखनीय रूप से अधिक रही। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में इस राजनीतिक वाकयुद्ध के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर जब संसद का अगला सत्र नजदीक आएगा।