सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार: 'कांग्रेस भारतीय राजनीति की भस्मासुर'
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस भारतीय राजनीति की वह भस्मासुर है, जिसके संपर्क में आने वाला भस्म हो गया। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का पोस्ट उनकी राजनीतिक अज्ञानता और अपनी ही पार्टी के इतिहास से अनभिज्ञता का प्रमाण है।
राहुल गांधी के पोस्ट पर त्रिवेदी की आपत्ति
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने एक्स पोस्ट में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और तृणमूल कांग्रेस का नाम लेते हुए यह दावा करने की कोशिश की कि भाजपा इन पार्टियों को समाप्त कर रही है। त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी यह भी नहीं पढ़ पाए कि एनसीपी का पूरा नाम 'नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी' है और यह दल कांग्रेस से ही अलग होकर बना था।
उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस जैसे शब्द लिखते हैं और भाजपा पर इन्हें खत्म करने का आरोप लगाते हैं, तो उनके आरोप परोक्ष रूप से स्वयं कांग्रेस की ओर ही इशारा करते हैं। भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने पहली बार ऐसे नेता को देखा है जो अपनी लिखी बात को भी ध्यान से नहीं पढ़ते।
तृणमूल और एनसीपी के जन्म का ऐतिहासिक संदर्भ
त्रिवेदी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि 1997 में ममता बनर्जी कांग्रेस की आंतरिक परिस्थितियों से दुखी होकर अलग हुईं और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, जिसने बाद में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया। इसी प्रकार शरद पवार ने 1999 में विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से नाता तोड़कर एनसीपी बनाई।
उन्होंने यह भी कहा कि लगभग तीन वर्ष पूर्व अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले थे, लेकिन बाद में उन्होंने स्वयं बयान दिया कि उन्हें अध्यक्ष नहीं बनने दिया गया और वे बागी खेमे में पहुँच गए। त्रिवेदी ने सवाल किया कि गहलोत का 'खेल' किसने खत्म किया।
कांग्रेस पर सरकारें गिराने का आरोप
त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, एच.डी. देवेगौड़ा और आई.के. गुजराल की सरकारों को अस्थिर करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 1980 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने नौ राज्यों की चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त कर दिया था।
भाजपा सांसद ने कहा कि 1989 में एस.आर. बोम्मई की सरकार को भी बर्खास्त किया गया था, जिसके बाद 1994 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि किसी सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसका निर्णय सदन के पटल पर होना चाहिए — न कि राज्यपाल या राष्ट्रपति की निजी राय पर।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयानबाजी तेज हो गई है। गौरतलब है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल डिजिटल माध्यमों पर अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं। त्रिवेदी का यह पलटवार भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें विपक्ष के बयानों को उन्हीं के इतिहास से काटने की कोशिश की जाती है।
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पलटवार पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले चुनावी मौसम में और तेज हो सकता है।