राहुल गांधी का जन्मदिन किस दिवस के रूप में मनाएं? सुधांशु त्रिवेदी ने जनता पर छोड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 19 जून को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए तीखा तंज कसा। त्रिवेदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन राहुल गांधी का जन्मदिन किस दिवस के रूप में मनाया जाए, यह निर्णय वे जनता के विवेक पर छोड़ते हैं।
12 साल, कई रूप — पर जनता का दिल नहीं जीत पाए
त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'उनके समर्थक भले ही उन्हें जिस भी प्रारूप में रखना चाहें, लेकिन पिछले 12 वर्षों में उनके स्टाइल और बॉडी लैंग्वेज में जितने परिवर्तन आए हैं, उतने परिवर्तन जनता के दिल में उनके स्थान को बनाए रखने में नहीं आए।' उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार जनता के दिलों से दूर होते जा रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किए जाने संबंधी सवाल पर त्रिवेदी ने कहा कि यह राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर निर्भर करता है कि वे किस तरह की विरासत बनाना चाहते हैं।
NEET विवाद पर केंद्र सरकार का रुख
NEET परीक्षा विवाद के संदर्भ में त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में पूरी तरह सतर्क, संवेदनशील और सजग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की गलत सूचना या दुष्प्रचार को फैलने नहीं दिया जाएगा।
झारखंड राज्यसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन में दरार
झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार को त्रिवेदी ने इंडिया गठबंधन के भीतर की आंतरिक कलह का प्रमाण बताया। उनके अनुसार, इस हार के बाद कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
त्रिवेदी ने कहा कि झामुमो के एक मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने पहले सीट बंटवारे का वादा किया और फिर उससे पीछे हट गई। उन्होंने इसे झामुमो के साथ विश्वासघात करार दिया और कहा कि गठबंधन वास्तव में काफी पहले ही बिखर चुका था।
इंडिया गठबंधन की प्रासंगिकता पर सवाल
त्रिवेदी ने कहा, 'इंडिया गठबंधन में अब 'इंडिया' जैसा कुछ बचा ही नहीं है।' उन्होंने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) से अलगाव के बाद दक्षिण भारत में कांग्रेस की एकमात्र सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) रह गई है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या यह 'रेडियोएक्टिव डिके' की स्थिति में पहुंच गया है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस से आत्ममंथन की अपील करते हुए कहा कि पार्टी को यह समझना होगा कि उसके नेतृत्व वाले गठबंधन लंबे समय तक क्यों नहीं टिक पाते। आने वाले समय में इंडिया गठबंधन की एकजुटता और कांग्रेस की रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।