नीट परीक्षा छूटी कांग्रेस रैली के कारण, BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी बोले — राहुल गांधी जवाबदेही से नहीं बच सकते
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 22 जून को कर्नाटक में कांग्रेस की रैली के कारण कई छात्रों की नीट परीक्षा छूट जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब माँगा है। BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को कहा कि इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी जवाबदेही से नहीं बच सकते।
क्या हुआ बेंगलुरु में
रविवार को बेंगलुरु में कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रैली के चलते कई नीट परीक्षार्थी अपने परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुँच सके और परीक्षा देने से वंचित रह गए। प्रभावित छात्रों के अभिभावकों ने कथित तौर पर राहुल गांधी से सीधे शिकायत दर्ज कराई है।
सुधांशु त्रिवेदी का हमला
त्रिवेदी ने कहा, 'यह दुखद और चिंताजनक है कि बेंगलुरु में कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रैली की वजह से कई परीक्षार्थी नीट की परीक्षा देने से वंचित रह गए।' उन्होंने आगे कहा, 'एक तरफ कांग्रेस पार्टी के नेता कोटा में जाकर परीक्षा से मात्र 72 घंटे पहले छात्रों को भ्रमित करने का कार्य करते हैं, दूसरी तरफ उनकी सरकार छात्रों को अपनी रैली के कारण परीक्षा देने से वंचित रह जाने देती है।'
BJP सांसद ने सीधा सवाल उठाया — 'आपको नीट परीक्षा का समय पता था और दिन भी पता था, क्या आप कम से कम अपनी रैली का समय नहीं बदल सकते थे?' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सवाल केवल कुछ अभिभावकों का नहीं, बल्कि 'पूरे देश का सवाल' है।
BJP और कांग्रेस की सोच की तुलना
त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोदी कोलकाता से लौटे, तो वे दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट इसलिए रुके रहे ताकि नीट परीक्षार्थी अपने केंद्र पर समय से पहुँच सकें और ट्रैफिक की वजह से किसी को असुविधा न हो। उन्होंने कहा, 'यह BJP की सोच है — लेकिन कांग्रेस की सोच है कि राजनीति के लिए रैली का समय कुछ मिनट या घंटे भी नहीं बदला जा सकता।'
छात्रों और अभिभावकों की पीड़ा
जिन परीक्षार्थियों की नीट परीक्षा छूट गई, उनके अभिभावकों ने कथित तौर पर राहुल गांधी से सीधे शिकायत की है। नीट जैसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा में एक वर्ष की देरी छात्रों के करियर पर गहरा असर डाल सकती है, क्योंकि यह चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश का एकमात्र मार्ग है।
आगे क्या होगा
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी इस मामले में क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या प्रभावित छात्रों को परीक्षा का कोई वैकल्पिक अवसर मिल पाता है। BJP ने इस मुद्दे को राजनीतिक प्राथमिकता बनाम छात्रहित की बहस के केंद्र में ला दिया है।