नीट पुनर्परीक्षा: बेंगलुरु यातायात जाम पर जेडी(एस) और भाजपा ने कर्नाटक सरकार को घेरा, कांग्रेस ने जताया खेद
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु में 22 जून को कांग्रेस की एक पार्टी रैली के कारण हुए भीषण यातायात जाम ने नीट पुनर्परीक्षा में बैठने वाले कुछ छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र पहुँचने से रोक दिया। इस घटना पर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला।
मुख्य घटनाक्रम
पैलेस रोड पर आयोजित कांग्रेस के एक सरकारी कार्यक्रम — जिसमें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के नवनियुक्त अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का औपचारिक स्वागत शामिल था — के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी आवाजाही के चलते यातायात व्यवस्था चरमरा गई। आरोप है कि इस जाम के कारण कई नीट अभ्यर्थी अपने परीक्षा केंद्रों तक समय पर नहीं पहुँच सके और उनका भविष्य प्रभावित हुआ।
यह ऐसे समय में हुआ जब देशभर में नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर पहले से ही छात्रों में आक्रोश था और पुनर्परीक्षा की माँग बड़ी मुश्किल से मानी गई थी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महत्वपूर्ण परीक्षाओं के दौरान छात्रों और नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी ने हाल ही में नीट परीक्षा देने वाले छात्रों को बाधित न करने के लिए पश्चिम बंगाल से लौटने के बाद हवाई अड्डे पर लगभग 45 मिनट तक प्रतीक्षा की और परीक्षा समाप्त होने की सूचना मिलने के बाद ही अपनी यात्रा जारी रखी। कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को प्रधानमंत्री के इस आचरण से सीख लेनी चाहिए।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या उस समय कार्यक्रम आयोजित करना वास्तव में आवश्यक था। उन्होंने कहा कि हरिप्रसाद को पहले ही केपीसीसी अध्यक्ष घोषित किया जा चुका था, इसलिए स्वागत समारोह को दो-तीन घंटे के लिए स्थगित किया जा सकता था। अशोक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में यह बुनियादी समझ का अभाव है।
सरकार की प्रतिक्रिया
आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने स्वीकार किया कि रैली के दौरान यातायात जाम हुआ था। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को असुविधा हुई या परेशानी का सामना करना पड़ा, तो मैं इसके लिए गहरा खेद व्यक्त करता हूँ।' हालाँकि, हरिप्रसाद ने पलटवार करते हुए पूछा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के लिए कौन जिम्मेदार है और छात्रों को पुनर्परीक्षा में बैठने के लिए किसने मजबूर किया। उन्होंने तर्क दिया कि बिना इन सवालों का जवाब दिए कांग्रेस की रैली को निशाना बनाना उचित नहीं है।
आम जनता और छात्रों पर असर
नीट पुनर्परीक्षा उन छात्रों के लिए अंतिम अवसर था जो कथित प्रश्नपत्र लीक के कारण पहले की परीक्षा से प्रभावित हुए थे। गौरतलब है कि यह पुनर्परीक्षा पहले से ही एक संवेदनशील और विवादास्पद प्रक्रिया का हिस्सा थी। ऐसे में यातायात जाम के कारण परीक्षा से वंचित रहे छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने माँग की है कि कर्नाटक सरकार उन छात्रों के लिए जवाबदेह हो जो यातायात जाम के कारण परीक्षा नहीं दे सके। यह मामला राज्य में राजनीतिक रूप से तूल पकड़ता दिख रहा है और आने वाले दिनों में विधानसभा में भी इस मुद्दे के उठने की संभावना है।