नीट री-एग्जाम विवाद: प्रियांक खड़गे बोले — छात्र मुद्दों पर भाजपा को उपदेश देने का अधिकार नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने 22 जून 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एक सरकारी कार्यक्रम के कारण लगे ट्रैफिक प्रतिबंधों की वजह से कुछ छात्र नीट री-एग्जाम में शामिल नहीं हो पाए। खड़गे ने पलटवार करते हुए सवाल किया कि यदि ट्रैफिक ही बाधा था, तो उसी दिन हजारों अन्य उम्मीदवार अपने परीक्षा केंद्रों तक समय पर कैसे पहुँचे।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार को बेंगलुरु के कई परीक्षा केंद्रों पर नीट री-एग्जाम आयोजित हुई, जिसमें हजारों छात्र शामिल हुए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य नेताओं के एक बड़े कार्यक्रम के कारण लगाए गए ट्रैफिक प्रतिबंधों की वजह से कुछ छात्र परीक्षा नहीं दे पाए। इस पर खड़गे ने स्वीकार किया कि तीन छात्र परीक्षा में नहीं बैठ पाए, लेकिन उन्होंने इसके लिए सरकारी कार्यक्रम को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया।
तीन छात्रों की अनुपस्थिति — खड़गे का स्पष्टीकरण
खड़गे ने प्रत्येक मामले का ब्यौरा देते हुए कहा, 'यह सच है कि तीन छात्र परीक्षा नहीं दे पाए। उनमें से एक पड़ोसी शहर मगदी से आ रहा था। क्या कांग्रेस की रैली मगदी में हुई थी? एक और छात्र पुराना हॉल टिकट लेकर आया था। तीसरा छात्र आरटी नगर से आ रहा था।' उन्होंने यह भी बताया कि नीट की मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार परीक्षा केंद्र के गेट सुबह 11 बजे खुलते हैं और उम्मीदवारों को परीक्षा से कम से कम ढाई घंटे पहले पहुँचना अनिवार्य होता है। उन्होंने रेखांकित किया कि अकेले आरजी कॉलेज में लगभग 720 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जबकि लगभग 120 अनुपस्थित रहे।
भाजपा पर पलटवार — पेपर लीक का हवाला
खड़गे ने भाजपा की आलोचना को सीधे नकारते हुए कहा, 'हमें भाजपा से सीख लेने की जरूरत नहीं है। अगर उन्हें सच में छात्रों की चिंता है, तो उन्हें उनसे माफी मांगनी चाहिए। पिछले 10 साल में लगभग 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं और कथित तौर पर लगभग 90 बार परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं। पहले उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।' उन्होंने यह भी पूछा कि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया।
अन्य राज्यों का संदर्भ
खड़गे ने इस मुद्दे को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि दिल्ली में भी कथित तौर पर कुछ छात्र परीक्षा नहीं दे पाए, और मुंबई के परेल व डोंबिवली इलाकों में भी छात्रों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसका अर्थ यह है कि वहाँ भाजपा नेतृत्व वाली सरकारें जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक अदालत द्वारा रेलवे अधिकारियों पर देरी के लिए ₹9 लाख का जुर्माना लगाए जाने का उदाहरण भी दिया और पूछा कि क्या केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उस मामले में इस्तीफा दिया था।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब नीट परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पहले से ही राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। खड़गे ने विपक्ष से आग्रह किया कि वह इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के बजाय तार्किक और जिम्मेदार दृष्टिकोण से देखे। गौरतलब है कि नीट प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रही — यह एक राष्ट्रीय प्रश्न बन चुकी है।