प्रियांक खड़गे का 'लाठीचार्ज' वाला बयान: कर्नाटक पुलिस भर्ती विवाद में भाजपा ने माफी और इस्तीफे की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों को लेकर दिया गया बयान 3 अगस्त 2026 को राजनीतिक तूफान का केंद्र बन गया, जब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खड़गे पर बेरोजगार युवाओं के प्रति अहंकार और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए उनसे तत्काल माफी और इस्तीफे की माँग की।
विवाद की जड़: गृह मंत्री का बयान
पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के आयोजन को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए खड़गे ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा, 'आप हमसे क्या उम्मीद करते हैं? हमारी जिम्मेदारी उनके प्रति भी है और उन लोगों के प्रति भी जो परीक्षा दे रहे हैं। जाहिर है, हमें कुछ लोगों को हिरासत में लेना पड़ा।'
इससे भी अधिक विवादास्पद वह बयान रहा जो उन्होंने उम्मीदवारों की इस्तीफे की माँग के जवाब में दिया। खड़गे ने कहा, 'मैं इस्तीफा दे दूंगा। उन्हें 25 दिनों तक भूख हड़ताल करने दें। फिर, अगर वे काबू में नहीं आए, तो हम उन पर लाठीचार्ज करेंगे, और फिर हम इस्तीफा दे देंगे।' यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने खड़गे के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि 'खड़गे की टिप्पणी से साफ पता चलता है कि उन्हें बेरोजगार युवाओं की कोई परवाह नहीं है।' अशोक ने यह भी कहा कि 'पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों ने यह मौका अपनी कड़ी मेहनत, लगन और उम्मीदों से हासिल किया है, न कि परिवार के असर से।'
अशोक ने यह भी कहा, 'जिन्हें सत्ता विरासत में मिली है, वे शायद उनका दर्द न समझें।' यह टिप्पणी खड़गे के राजनीतिक वंश — वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र हैं — की ओर स्पष्ट संकेत था।
उम्मीदवारों की माँगें और विरोध की पृष्ठभूमि
पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के उम्मीदवार परीक्षा के आयोजन-संबंधी मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ उम्मीदवारों को हिरासत में लिया, जिसके बाद गृह मंत्री से जवाब माँगा गया। गौरतलब है कि कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से विवादों में रही है, और बेरोजगार युवाओं का असंतोष राज्य में एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
विपक्ष की माँगें
अशोक ने माँग की कि खड़गे राज्य के लाखों नौकरी के उम्मीदवारों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगें और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा दें। भाजपा ने इस मुद्दे को सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की युवा-विरोधी मानसिकता के प्रमाण के रूप में पेश किया।
आगे क्या
खड़गे की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या खेद अभी तक सामने नहीं आया है। यह मामला कर्नाटक विधानसभा में गूँजने की संभावना है, और आने वाले दिनों में भाजपा इसे राज्य सरकार के विरुद्ध एक बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ा सकती है।