नीट पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान के 'गुमराह' वाले बयान पर विपक्ष का तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में दावा किया कि नीट परीक्षा के पेपर लीक मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने 'जेन जी' यानी युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की थी। इस बयान के बाद 9 अगस्त को विपक्षी दलों के नेताओं ने एकजुट होकर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रधान के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'मुझे लगा था कि इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान कायदे की बात करेंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि वे अभी भी किसी दूसरी ही दुनिया में जी रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधान के शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ और पैसे लेकर प्रश्न-पत्र लीक किए गए। तिवारी ने यह भी कहा कि प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता को समाप्त कर उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव में ले आए।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने सीधे सवाल दागते हुए कहा, 'क्या पेपर लीक की पुष्टि हुई या नहीं? क्या परीक्षा में शामिल 20-22 लाख छात्रों को परेशानी हुई या नहीं? क्या दर्जनों छात्रों ने आत्महत्या की या नहीं?' उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किसी ने गुमराह नहीं किया — वे सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के छात्र थे जिन्होंने अपनी आवाज़ बुलंद की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन छात्रों पर सरकार की ओर से लाठीचार्ज किया गया।
राष्ट्रीय जनता दल का रुख
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, 'अगर आपको लगता है कि आप अगली पीढ़ी को गुमराह कर सकते हैं, तो आप उस पीढ़ी को जानते नहीं हैं।' उन्होंने कहा कि जब छात्रों के पैरों तले जमीन हिलने लगी, तब सबको इसका एहसास हुआ — और सरकार को सबसे आखिर में। झा के अनुसार, 'लोगों को गुमराह करने वाली थ्योरी काम नहीं करती।'
वामपंथी दलों की आलोचना
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि BJP के शासनकाल में करीब 125 पेपर लीक हुए हैं। मोल्लाह ने कहा कि इसके बावजूद सरकार अपनी गलती मानने की बजाय विपक्ष पर आरोप लगा रही है।
झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में मोल्लाह ने कहा कि वहाँ की लोकतांत्रिक सरकार ने तुरंत दखल दिया, छात्रों से सम्मानपूर्वक बात की और बातचीत के दो दौर पूरे हो चुके हैं। उन्होंने BJP सरकार को 'फासीवादी, जन-विरोधी और छात्र-विरोधी' करार दिया।
सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि छात्र समुदाय के संघर्ष की वजह से ही प्रधान को अपना पद गंवाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हुए और 50 से ज़्यादा बार दोबारा परीक्षाएँ करानी पड़ीं।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद ने पूरे देश में व्यापक छात्र आंदोलन को जन्म दिया था, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा है।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नीट पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह ठहराने की उनकी मुहिम जारी रहेगी। छात्र संगठनों की माँग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार लाए जाएँ।