9 अगस्त 2026
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नीट पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान के 'गुमराह' वाले बयान पर विपक्ष का तीखा पलटवार

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नीट पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान के 'गुमराह' वाले बयान पर विपक्ष का तीखा पलटवार

सारांश

नीट पेपर लीक पर छात्रों को 'गुमराह' बताने वाले धर्मेंद्र प्रधान के बयान ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया। कांग्रेस, RJD और सीपीआई (एम) ने एकजुट होकर पूछा — 20-22 लाख छात्रों की तकलीफ, दर्जनों की आत्महत्याएँ और 125 पेपर लीक — क्या ये सब 'गुमराह' करने का नतीजा था?

मुख्य बातें

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि नीट विरोध-प्रदर्शनों के दौरान युवा पीढ़ी को 'गुमराह' किया गया था।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ और पैसे लेकर पेपर लीक किए गए।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने बताया कि नीट विवाद से 20-22 लाख छात्र प्रभावित हुए और दर्जनों ने आत्महत्या की।
सीपीआई (एम) के हन्नान मोल्लाह के अनुसार BJP शासन में करीब 125 पेपर लीक हुए और 50 से ज़्यादा बार दोबारा परीक्षाएँ करानी पड़ीं।
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि 'गुमराह' की थ्योरी नई पीढ़ी पर लागू नहीं होती — सरकार को सबसे आखिर में हालात का एहसास हुआ।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में दावा किया कि नीट परीक्षा के पेपर लीक मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने 'जेन जी' यानी युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की थी। इस बयान के बाद 9 अगस्त को विपक्षी दलों के नेताओं ने एकजुट होकर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रधान के आरोपों को सिरे से खारिज किया।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'मुझे लगा था कि इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान कायदे की बात करेंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि वे अभी भी किसी दूसरी ही दुनिया में जी रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधान के शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ और पैसे लेकर प्रश्न-पत्र लीक किए गए। तिवारी ने यह भी कहा कि प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता को समाप्त कर उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव में ले आए।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने सीधे सवाल दागते हुए कहा, 'क्या पेपर लीक की पुष्टि हुई या नहीं? क्या परीक्षा में शामिल 20-22 लाख छात्रों को परेशानी हुई या नहीं? क्या दर्जनों छात्रों ने आत्महत्या की या नहीं?' उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किसी ने गुमराह नहीं किया — वे सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के छात्र थे जिन्होंने अपनी आवाज़ बुलंद की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन छात्रों पर सरकार की ओर से लाठीचार्ज किया गया।

राष्ट्रीय जनता दल का रुख

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, 'अगर आपको लगता है कि आप अगली पीढ़ी को गुमराह कर सकते हैं, तो आप उस पीढ़ी को जानते नहीं हैं।' उन्होंने कहा कि जब छात्रों के पैरों तले जमीन हिलने लगी, तब सबको इसका एहसास हुआ — और सरकार को सबसे आखिर में। झा के अनुसार, 'लोगों को गुमराह करने वाली थ्योरी काम नहीं करती।'

वामपंथी दलों की आलोचना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि BJP के शासनकाल में करीब 125 पेपर लीक हुए हैं। मोल्लाह ने कहा कि इसके बावजूद सरकार अपनी गलती मानने की बजाय विपक्ष पर आरोप लगा रही है।

झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में मोल्लाह ने कहा कि वहाँ की लोकतांत्रिक सरकार ने तुरंत दखल दिया, छात्रों से सम्मानपूर्वक बात की और बातचीत के दो दौर पूरे हो चुके हैं। उन्होंने BJP सरकार को 'फासीवादी, जन-विरोधी और छात्र-विरोधी' करार दिया।

सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि छात्र समुदाय के संघर्ष की वजह से ही प्रधान को अपना पद गंवाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हुए और 50 से ज़्यादा बार दोबारा परीक्षाएँ करानी पड़ीं।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद ने पूरे देश में व्यापक छात्र आंदोलन को जन्म दिया था, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर लगा है।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नीट पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह ठहराने की उनकी मुहिम जारी रहेगी। छात्र संगठनों की माँग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार लाए जाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आंदोलन को 'प्रेरित' कहना तथ्यों से मुँह मोड़ना है। असली सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और जवाबदेही का ढाँचा कहाँ था। पद जाने के बाद भी यदि पूर्व मंत्री आत्ममंथन की बजाय दोषारोपण में लगे हैं, तो यह संस्थागत सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विरोध पर क्या बयान दिया था?
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नीट पेपर लीक मुद्दे पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने युवा पीढ़ी ('जेन जी') को गुमराह करने की कोशिश की थी। इस बयान को विपक्ष ने तथ्यों से परे और छात्रों के दर्द को नकारने वाला बताया।
नीट पेपर लीक विवाद क्या है और इसका असर कितने छात्रों पर पड़ा?
नीट-यूजी 2024 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों ने देशव्यापी छात्र आंदोलन को जन्म दिया। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार के अनुसार इस विवाद से लगभग 20-22 लाख छात्र प्रभावित हुए और दर्जनों ने आत्महत्या की। विवाद के बाद 50 से ज़्यादा बार दोबारा परीक्षाएँ करानी पड़ीं।
धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद क्यों छोड़ना पड़ा?
नीट पेपर लीक विवाद और उससे उपजे व्यापक छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने स्पष्ट कहा कि छात्र समुदाय के संघर्ष की वजह से ही उन्हें पद गंवाना पड़ा।
विपक्ष ने BJP शासन में कितने पेपर लीक का दावा किया है?
सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने दावा किया कि BJP के शासनकाल में करीब 125 पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की बजाय विपक्ष पर आरोप लगा रही है।
झारखंड में छात्र विरोध-प्रदर्शन पर वहाँ की सरकार का क्या रवैया रहा?
हन्नान मोल्लाह के अनुसार झारखंड की सरकार ने छात्रों के विरोध को नजरअंदाज नहीं किया — उसने तुरंत दखल दिया, छात्रों से सम्मानपूर्वक बात की और बातचीत के दो दौर पूरे हो चुके हैं। उन्होंने इसकी तुलना BJP सरकार के रवैये से करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक सरकार का नजरिया अलग होता है।
राष्ट्र प्रेस
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