नीट पेपर लीक: इमरान मसूद की माँग — धर्मेंद्र प्रधान नैतिकता के आधार पर दें इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए रविवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की माँग की। सहारनपुर में पत्रकारों से बात करते हुए मसूद ने कहा कि जब नैतिकता ही नहीं बची, तो जवाबदेही की उम्मीद करना बेमानी है।
मुख्य आरोप और माँग
इमरान मसूद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह नैतिकता का मामला होता है। जब नैतिकता ही नहीं बची है, तो क्या किया जा सकता है?' उनका यह बयान नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें देशभर के 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी प्रभावित हुए।
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था, 'मोदी सरकार में कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं है — बस धोखे का एक फिक्स्ड फॉर्मूला है। नीट पेपर लीक हुआ — एक भी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने नीट के 22 लाख छात्रों के साथ धोखा किया है। उन्होंने संसद का भी अपमान किया है। शिक्षा मंत्री को अभी तुरंत हटाया जाए।'
अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट पर चिंता
कांग्रेस सांसद मसूद ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पिछले वर्ष संसद में अर्थव्यवस्था के गर्त में जाने की बात कही थी, जो अब प्रधानमंत्री को भी समझ आ रही है। उन्होंने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाकर संकट से उबरने के रास्ते तलाशने की अपील की।
मसूद ने ईरान-अमेरिका तनाव के संभावित प्रभावों पर भी चिंता जताई, यह कहते हुए कि इस भू-राजनीतिक तनाव से भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र से तत्काल रणनीति बनाने की माँग की।
दिग्विजय सिंह का आरोप: मेडिकल कॉलेजों में पारिवारिक दबदबा
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेजों में कुछ परिवारों का दबदबा है और पेपर लीक के ज़रिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हो रही है। उन्होंने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की।
विपक्ष का प्रदर्शन और सरकार का रुख
नीट विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। एनएसयूआई समेत कांग्रेस के छात्र संगठन देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने जाँच एजेंसियों को मामले की तेज़ जाँच के निर्देश दिए हैं और अपना रुख बचाव में रखा है।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा — यह केंद्र सरकार की जवाबदेही और संस्थागत विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में संसद सत्र में यह मुद्दा और तीखा रूप ले सकता है।