अमिताभ बच्चन ने शेयर किया ईरान के बंदर अब्बास का 135 साल पुराना विष्णु मंदिर, भारत-ईरान सांस्कृतिक विरासत की दिलाई याद

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अमिताभ बच्चन ने शेयर किया ईरान के बंदर अब्बास का 135 साल पुराना विष्णु मंदिर, भारत-ईरान सांस्कृतिक विरासत की दिलाई याद

सारांश

अमिताभ बच्चन का यह वीडियो महज एक मंदिर की झलक नहीं — यह 135 साल पुरानी उस साझा विरासत की याद है जब भारतीय व्यापारी ईरान की धरती पर अपने देवताओं के लिए मंदिर बनाते थे। बंदर अब्बास का यह विष्णु मंदिर भारत-ईरान के उस अटूट सांस्कृतिक धागे का प्रतीक है जो आज भी बरकरार है।

मुख्य बातें

अमिताभ बच्चन ने 17 मई 2026 को इंस्टाग्राम पर ईरान के बंदर अब्बास स्थित हिंदू विष्णु मंदिर का वीडियो साझा किया।
यह मंदिर 1892 में काजार युग में भारतीय हिंदू व्यापारियों के लिए बनाया गया था और लगभग 135 साल पुराना है।
वीडियो में मंदिर की पुरानी स्थापत्य शैली और एक फारसी गीत शामिल है।
भारत और ईरान ने 1950 में आधिकारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए, जबकि सांस्कृतिक जुड़ाव हजारों वर्ष पुराना है।
मुगल काल में फारसी भाषा का भारतीय प्रशासन और साहित्य में व्यापक उपयोग होता था, जिसका प्रभाव आज भी हिंदी, उर्दू सहित कई भाषाओं में दिखता है।

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने 17 मई 2026 को इंस्टाग्राम पर ईरान के बंदर अब्बास शहर में स्थित एक प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर का वीडियो साझा किया, जिसने भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों की चर्चा फिर से छेड़ दी है। यह मंदिर करीब 135 साल पुराना है और सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान खींच रहा है।

मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अमिताभ बच्चन ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'यह हिंदू विष्णु मंदिर ईरान के बंदर अब्बास शहर में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण साल 1892 में काजार युग के दौरान कराया गया था। यह मंदिर उन भारतीय हिंदू व्यापारियों के लिए बनाया गया था, जो उस समय बंदर अब्बास में काम करते थे।' वीडियो में मंदिर की पुरानी स्थापत्य शैली, उसकी दीवारें और शांत परिसर स्पष्ट दिखते हैं। साथ में एक फारसी गीत भी सुनाई देता है, जिसके बारे में बच्चन ने स्वयं उल्लेख किया।

भारत-ईरान के सांस्कृतिक संबंध

भारत और ईरान के संबंध हजारों वर्ष पुराने माने जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार, विभाजन से पहले दोनों देशों की भौगोलिक सीमाएँ एक-दूसरे के काफी निकट थीं और समुद्री मार्गों के ज़रिए दोनों देशों के व्यापारी सदियों तक परस्पर व्यापार करते रहे। बंदर अब्बास खाड़ी का एक प्रमुख बंदरगाह रहा है, जहाँ भारतीय व्यापारियों की उपस्थिति ऐतिहासिक रूप से दर्ज है।

फारसी भाषा और भारतीय संस्कृति पर प्रभाव

इतिहास में फारसी संस्कृति का भारत पर गहरा प्रभाव रहा है। विशेष रूप से मुगल काल में फारसी भाषा का प्रशासन, साहित्य और राजदरबार में व्यापक उपयोग होता था। यही कारण है कि आज भी हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली और कश्मीरी जैसी अनेक भारतीय भाषाओं में फारसी के हजारों शब्द प्रचलित हैं।

राजनयिक संबंधों का इतिहास

भारत की स्वतंत्रता के पश्चात दोनों देशों ने 1950 में आधिकारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए। शीत युद्ध के दौर में दोनों की विदेश नीतियाँ भिन्न दिशाओं में रहीं, परंतु सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध निरंतर बने रहे। यह मंदिर उस दीर्घकालिक जुड़ाव का एक ठोस प्रमाण है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

अमिताभ बच्चन के इस पोस्ट ने इंस्टाग्राम पर व्यापक प्रतिक्रिया पाई है। दर्शकों ने इस वीडियो को भारत-ईरान की साझा विरासत की एक दुर्लभ झलक के रूप में सराहा। यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब भारत-ईरान संबंध कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से नए सिरे से चर्चा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी यह है कि भारतीय व्यापारियों ने सदियों पहले विदेशी धरती पर जो सांस्कृतिक छाप छोड़ी, वह आज भी खड़ी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान के बंदर अब्बास में हिंदू विष्णु मंदिर कब और क्यों बना?
यह मंदिर 1892 में काजार युग के दौरान बनाया गया था। इसे उन भारतीय हिंदू व्यापारियों के लिए बनवाया गया था जो उस समय बंदर अब्बास में व्यापार करते थे और यह मंदिर लगभग 135 साल पुराना है।
अमिताभ बच्चन ने ईरान के मंदिर का वीडियो कहाँ पोस्ट किया?
अमिताभ बच्चन ने यह वीडियो इंस्टाग्राम पर 17 मई 2026 को पोस्ट किया। वीडियो में मंदिर की पुरानी बनावट और एक फारसी गीत शामिल है।
भारत और ईरान के सांस्कृतिक संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और ईरान के सांस्कृतिक संबंध हजारों वर्ष पुराने माने जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार दोनों देशों के बीच समुद्री मार्गों से व्यापार, भाषा और धर्म के ज़रिए सदियों से गहरा जुड़ाव रहा है।
भारत और ईरान ने आधिकारिक राजनयिक संबंध कब शुरू किए?
भारत की स्वतंत्रता के बाद दोनों देशों ने 1950 में आधिकारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए। शीत युद्ध के दौरान विदेश नीतियाँ भिन्न रहीं, लेकिन सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बने रहे।
फारसी भाषा का भारतीय भाषाओं पर क्या प्रभाव है?
मुगल काल में फारसी भाषा प्रशासन, साहित्य और राजदरबार में व्यापक रूप से प्रयोग होती थी। इसी कारण आज भी हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली और कश्मीरी सहित कई भारतीय भाषाओं में फारसी के हजारों शब्द प्रचलित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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