पंचेन लामा की रिहाई की मांग: आईसीटी ने ट्रंप, रुबियो से चीन पर दबाव बनाने की अपील की

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पंचेन लामा की रिहाई की मांग: आईसीटी ने ट्रंप, रुबियो से चीन पर दबाव बनाने की अपील की

सारांश

30 वर्षों से चीनी हिरासत में बंद पंचेन लामा गेधुन चोएकी न्यिमा की रिहाई की माँग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठी है। आईसीटी ने ट्रंप और रुबियो से शी जिनपिंग पर दबाव बनाने की सीधी अपील की है — यह तिब्बती धार्मिक पहचान की लड़ाई का सबसे मुखर अध्याय है।

मुख्य बातें

इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (आईसीटी) ने 17 मई 2026 को सीसीपी से 11वें पंचेन लामा की तत्काल रिहाई की माँग की।
गेधुन चोएकी न्यिमा को 17 मई 1995 को 6 वर्ष की आयु में चीनी अधिकारियों ने हिरासत में लिया था; तब से वे और उनके माता-पिता सार्वजनिक दृष्टि से ओझल हैं।
आईसीटी अध्यक्ष टेनचो ग्यात्सो ने राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो से शी जिनपिंग पर दबाव बनाने की अपील की।
चीन द्वारा नियुक्त वैकल्पिक पंचेन लामा ग्यालत्सेन नोरबू को तिब्बती समुदाय और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों ने मान्यता नहीं दी।
आईसीटी के अनुसार, चीन ने 2010 के बाद से तिब्बती नेताओं के साथ कोई स्थायी वार्ता नहीं की है और 60 वर्षों से अधिक समय से तिब्बत पर कब्ज़ा बनाए रखा है।

इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (आईसीटी) और दुनिया भर के तिब्बती समर्थकों ने 17 मई 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) से 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएकी न्यिमा को तत्काल रिहा करने की माँग की है। संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित अंतरराष्ट्रीय नेताओं से अपील की है कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर पंचेन लामा की रिहाई के लिए दबाव बनाएँ।

मुख्य घटनाक्रम

आईसीटी के बयान के अनुसार, 17 मई 1995 को चीनी अधिकारियों ने 6 वर्षीय तिब्बती बालक गेधुन चोएकी न्यिमा का अपहरण कर लिया था। यह घटना उसी समय हुई जब दलाई लामा ने उन्हें पुनर्जन्मित पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी थी। तब से अब तक — यानी 30 वर्षों से अधिक समय से — उन्हें और उनके माता-पिता को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।

गौरतलब है कि निर्वासन में रहने वाले तिब्बतियों ने इस वर्ष अप्रैल में पंचेन लामा का 37वाँ जन्मदिन मनाया, लेकिन उनके वर्तमान स्थान और स्वास्थ्य के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आईसीटी की अपील और प्रमुख बयान

आईसीटी की अध्यक्ष टेनचो ग्यात्सो ने कहा, 17 मई को तिब्बत के इतिहास के उस दुखद दिन की याद दिलाते हुए — जब चीनी सरकार ने एक 6 वर्षीय पूजनीय धार्मिक बालक को परिवार सहित हिरासत में ले लिया — उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं से हस्तक्षेप की माँग की।

ग्यात्सो ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, विदेश मंत्री रुबियो और अन्य वैश्विक नेताओं को शी जिनपिंग से पंचेन लामा की तत्काल रिहाई और तिब्बत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में दखलअंदाज़ी बंद करने की माँग करनी चाहिए।

चीन की वैकल्पिक नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय अस्वीकृति

अपहरण के बाद सीसीपी ने एक अन्य तिब्बती बालक ग्यालत्सेन नोरबू को अपने पंचेन लामा के रूप में नियुक्त किया। हालाँकि, इस नियुक्ति को न तो तिब्बती समुदाय ने और न ही अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों ने मान्यता दी है। आलोचकों का कहना है कि यह धार्मिक उत्तराधिकार में राजनीतिक हस्तक्षेप का स्पष्ट उदाहरण है।

तिब्बती पहचान पर व्यापक दबाव

आईसीटी ने यह भी दावा किया कि हाल ही में लागू किया गया 'जातीय एकता और प्रगति कानून' और चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना तिब्बती भाषा, धर्म और संस्कृति को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। संगठन के अनुसार, चीन ने 60 वर्षों से अधिक समय से तिब्बत पर कब्ज़ा बनाए रखा है और 2010 के बाद से तिब्बती नेताओं के साथ किसी स्थायी समझौते पर कोई वार्ता नहीं हुई है।

इसके अतिरिक्त, दलाई लामा — जिन्हें तिब्बती बौद्ध धर्म का सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता माना जाता है — को भी अब तक तिब्बत लौटने की अनुमति नहीं दी गई है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार विवाद को लेकर तनाव बना हुआ है। आईसीटी की अपील इस कूटनीतिक दबाव को तिब्बत के मानवाधिकार मुद्दे से जोड़ने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस अंतरराष्ट्रीय दबाव के चीन के रुख में बदलाव की संभावना सीमित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चीन के रुख में रत्ती भर बदलाव नहीं आया। आईसीटी का ट्रंप और रुबियो से सीधा आह्वान कूटनीतिक रूप से साहसिक है, परंतु यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में तिब्बत जैसे मानवाधिकार मुद्दे प्रायः पीछे छूट जाते हैं। 'जातीय एकता कानून' और 15वीं पंचवर्षीय योजना जैसे नए कानूनी ढाँचे संकेत देते हैं कि बीजिंग दबाव में झुकने के बजाय संस्थागत आत्मसातीकरण को और गहरा कर रहा है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11वें पंचेन लामा गेधुन चोएकी न्यिमा कौन हैं और वे कहाँ हैं?
गेधुन चोएकी न्यिमा को 1995 में दलाई लामा द्वारा 11वें पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी गई थी। उसी वर्ष 17 मई को 6 वर्ष की आयु में चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके माता-पिता को हिरासत में ले लिया; तब से उनका कोई सार्वजनिक सत्यापन नहीं हुआ है। आईसीटी के अनुसार इस वर्ष अप्रैल में उनका 37वाँ जन्मदिन था।
आईसीटी ने ट्रंप और रुबियो से हस्तक्षेप की अपील क्यों की?
आईसीटी का मानना है कि अमेरिकी नेतृत्व चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाने में सबसे प्रभावी भूमिका निभा सकता है। संगठन ने राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो से शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में पंचेन लामा की रिहाई और तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाने की माँग की है।
चीन ने पंचेन लामा के स्थान पर किसे नियुक्त किया और क्या उसे मान्यता मिली?
1995 में गेधुन चोएकी न्यिमा के अपहरण के बाद चीनी अधिकारियों ने ग्यालत्सेन नोरबू को अपने पंचेन लामा के रूप में नियुक्त किया। हालाँकि, तिब्बती समुदाय और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों ने इस नियुक्ति को धार्मिक परंपरा के विरुद्ध मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
तिब्बती संस्कृति और धर्म पर चीन के हालिया कदम क्या हैं?
आईसीटी के अनुसार, चीन का हाल ही में लागू 'जातीय एकता और प्रगति कानून' और 15वीं पंचवर्षीय योजना तिब्बती भाषा, धर्म और सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने के उपकरण हैं। संगठन का दावा है कि 2010 के बाद से तिब्बती नेताओं के साथ कोई स्थायी वार्ता नहीं हुई है।
पंचेन लामा का मामला दलाई लामा के तिब्बत वापसी के मुद्दे से कैसे जुड़ा है?
दोनों मामले तिब्बती धार्मिक स्वायत्तता के व्यापक प्रश्न से जुड़े हैं। दलाई लामा को भी चीन ने तिब्बत लौटने की अनुमति नहीं दी है। आईसीटी का कहना है कि पंचेन लामा की हिरासत और दलाई लामा के निर्वासन, दोनों तिब्बती बौद्ध नेतृत्व पर बीजिंग के नियंत्रण की नीति के हिस्से हैं।
राष्ट्र प्रेस
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