पंचेन लामा की रिहाई की मांग: आईसीटी ने ट्रंप, रुबियो से चीन पर दबाव बनाने की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (आईसीटी) और दुनिया भर के तिब्बती समर्थकों ने 17 मई 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) से 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएकी न्यिमा को तत्काल रिहा करने की माँग की है। संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित अंतरराष्ट्रीय नेताओं से अपील की है कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर पंचेन लामा की रिहाई के लिए दबाव बनाएँ।
मुख्य घटनाक्रम
आईसीटी के बयान के अनुसार, 17 मई 1995 को चीनी अधिकारियों ने 6 वर्षीय तिब्बती बालक गेधुन चोएकी न्यिमा का अपहरण कर लिया था। यह घटना उसी समय हुई जब दलाई लामा ने उन्हें पुनर्जन्मित पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी थी। तब से अब तक — यानी 30 वर्षों से अधिक समय से — उन्हें और उनके माता-पिता को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।
गौरतलब है कि निर्वासन में रहने वाले तिब्बतियों ने इस वर्ष अप्रैल में पंचेन लामा का 37वाँ जन्मदिन मनाया, लेकिन उनके वर्तमान स्थान और स्वास्थ्य के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आईसीटी की अपील और प्रमुख बयान
आईसीटी की अध्यक्ष टेनचो ग्यात्सो ने कहा, 17 मई को तिब्बत के इतिहास के उस दुखद दिन की याद दिलाते हुए — जब चीनी सरकार ने एक 6 वर्षीय पूजनीय धार्मिक बालक को परिवार सहित हिरासत में ले लिया — उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं से हस्तक्षेप की माँग की।
ग्यात्सो ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, विदेश मंत्री रुबियो और अन्य वैश्विक नेताओं को शी जिनपिंग से पंचेन लामा की तत्काल रिहाई और तिब्बत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में दखलअंदाज़ी बंद करने की माँग करनी चाहिए।
चीन की वैकल्पिक नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय अस्वीकृति
अपहरण के बाद सीसीपी ने एक अन्य तिब्बती बालक ग्यालत्सेन नोरबू को अपने पंचेन लामा के रूप में नियुक्त किया। हालाँकि, इस नियुक्ति को न तो तिब्बती समुदाय ने और न ही अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों ने मान्यता दी है। आलोचकों का कहना है कि यह धार्मिक उत्तराधिकार में राजनीतिक हस्तक्षेप का स्पष्ट उदाहरण है।
तिब्बती पहचान पर व्यापक दबाव
आईसीटी ने यह भी दावा किया कि हाल ही में लागू किया गया 'जातीय एकता और प्रगति कानून' और चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना तिब्बती भाषा, धर्म और संस्कृति को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। संगठन के अनुसार, चीन ने 60 वर्षों से अधिक समय से तिब्बत पर कब्ज़ा बनाए रखा है और 2010 के बाद से तिब्बती नेताओं के साथ किसी स्थायी समझौते पर कोई वार्ता नहीं हुई है।
इसके अतिरिक्त, दलाई लामा — जिन्हें तिब्बती बौद्ध धर्म का सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता माना जाता है — को भी अब तक तिब्बत लौटने की अनुमति नहीं दी गई है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार विवाद को लेकर तनाव बना हुआ है। आईसीटी की अपील इस कूटनीतिक दबाव को तिब्बत के मानवाधिकार मुद्दे से जोड़ने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस अंतरराष्ट्रीय दबाव के चीन के रुख में बदलाव की संभावना सीमित है।