पंचेन लामा का 37वां जन्मदिन: शिमला में निर्वासित तिब्बतियों ने मांगी रिहाई, चीन पर उठे सवाल

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पंचेन लामा का 37वां जन्मदिन: शिमला में निर्वासित तिब्बतियों ने मांगी रिहाई, चीन पर उठे सवाल

सारांश

शिमला में निर्वासित तिब्बतियों ने पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा का 37वां जन्मदिन प्रार्थनाओं के साथ मनाया। 1995 से चीनी हिरासत में बंद पंचेन लामा दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदी माने जाते हैं। तिब्बती समुदाय ने PM मोदी से हस्तक्षेप की अपील की।

Key Takeaways

  • 25 अप्रैल 2026 को शिमला के डिंगु हिल प्रार्थना स्थल पर निर्वासित तिब्बतियों ने पंचेन लामा का 37वां जन्मदिन मनाया।
  • आयोजन जोनांग मठ, तिब्बती महिला संघ और तिब्बती यूथ कांग्रेस की शिमला इकाइयों ने संयुक्त रूप से किया।
  • गेदुन चोएक्यी न्यिमा को मई 1995 से चीनी हिरासत में रखा गया है — लगभग तीन दशक बीत चुके हैं।
  • आचार्य कुंगा छोएपेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील की।
  • चीन ने दलाई लामा की मान्यता को अस्वीकार कर अपने समर्थक ग्यात्सेन नोरबू को पंचेन लामा नियुक्त किया है।
  • पंचेन लामा को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदियों में गिनते हैं।

शिमला, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में निर्वासित तिब्बती समुदाय ने 11वें पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा का 37वां जन्मदिन विशेष प्रार्थना सभाओं और धार्मिक अर्पण के साथ मनाया। इस अवसर पर उपस्थित तिब्बतियों ने चीन से पंचेन लामा की तत्काल रिहाई और उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने की जोरदार मांग उठाई। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब पंचेन लामा को चीनी हिरासत में लिए हुए तीन दशक पूरे होने को हैं।

डिंगु हिल पर एकत्र हुए सैकड़ों तिब्बती श्रद्धालु

जोनांग मठ, तिब्बती महिला संघ और तिब्बती यूथ कांग्रेस की शिमला इकाइयों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में तिब्बती भिक्षु, पुरुष और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी श्रद्धालु जोनांग मठ के समीप स्थित डिंगु हिल प्रार्थना स्थल पर एकत्र हुए, जहां पंचेन लामा की दीर्घायु और शीघ्र रिहाई के लिए सामूहिक प्रार्थनाएं की गईं।

इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मानवाधिकार की दृष्टि से पंचेन लामा के मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की भी अपील की गई। हर वर्ष की भांति इस बार भी यह आयोजन शांतिपूर्ण रहा।

आचार्य कुंगा छोएपेल का बयान — 'कहां हैं पंचेन लामा, चीन बताए'

जोनांग मठ (निर्वासन), संजौली, शिमला के शिक्षक आचार्य कुंगा छोएपेल ने कहा, आज पंचेन लामा 37 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन आज तक हमें उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। चीन ने उन्हें अपने नियंत्रण में रखा हुआ है — चाहे वे कहीं भी हों, हम नहीं जानते।

उन्होंने आगे कहा कि तिब्बती समुदाय पंचेन लामा की लंबी आयु और रिहाई के लिए निरंतर प्रार्थना करता रहेगा। आचार्य ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में कूटनीतिक हस्तक्षेप करने की भी अपील की।

कौन हैं गेदुन चोएक्यी न्यिमा — पूरी पृष्ठभूमि

गेदुन चोएक्यी न्यिमा का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नगछू क्षेत्र के ल्हारी गांव में हुआ था। मई 1995 में मात्र 6 वर्ष की आयु में उन्हें 14वें दलाई लामा ने 10वें पंचेन लामा का पुनर्जन्म घोषित किया।

हालांकि चीन ने इस मान्यता को सिरे से नकार दिया और अपने समर्थक ग्यात्सेन नोरबू को पंचेन लामा नियुक्त कर दिया। दलाई लामा द्वारा मान्यता मिलने के तुरंत बाद चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर गेदुन चोएक्यी न्यिमा और उनके पूरे परिवार को हिरासत में ले लिया।

दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदी

तब से लेकर आज तक — यानी लगभग तीन दशकों से — उनके ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन उन्हें दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदियों में गिनते हैं।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देश समय-समय पर चीन से पंचेन लामा के बारे में पारदर्शिता की मांग कर चुके हैं, लेकिन बीजिंग ने हर बार इसे अपना आंतरिक मामला बताकर टाल दिया है। यह विरोधाभास उल्लेखनीय है कि चीन एक ओर धार्मिक स्वतंत्रता का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धार्मिक पदों पर राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखता है।

शिमला में आयोजन का महत्व और आगे की राह

शिमला में यह वार्षिक आयोजन तिब्बती समुदाय के लिए महज एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और मानवाधिकार संदेश भी है। भारत में निर्वासित तिब्बती समुदाय की बड़ी आबादी है और धर्मशाला में स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचेन लामा का मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भी है — क्योंकि अगले दलाई लामा के चयन में पंचेन लामा की भूमिका अहम होती है। ऐसे में चीन का पंचेन लामा पर नियंत्रण भविष्य में तिब्बती बौद्ध धर्म की दिशा तय करने की कोशिश के रूप में भी देखा जाता है।

आने वाले महीनों में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठकों में इस मुद्दे के फिर से उठाए जाने की संभावना है। तिब्बती समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की नजरें अब भारत सरकार के रुख पर टिकी हैं।

Point of View

बल्कि चीन की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह तिब्बती बौद्ध धर्म के उत्तराधिकार पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। विडंबना यह है कि जो देश धार्मिक स्वतंत्रता का दावा करता है, वही एक 6 वर्षीय बच्चे को तीन दशकों से दुनिया की नजरों से छुपाए बैठा है। भारत सरकार के लिए यह मुद्दा एक कूटनीतिक अवसर भी है — जब भारत-चीन संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, तब पंचेन लामा के मुद्दे पर स्पष्ट रुख वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर भारत की साख को मजबूत कर सकता है। मुख्यधारा की कवरेज इस भू-राजनीतिक कोण को अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा कहां हैं और उन्हें कब से हिरासत में रखा गया है?
गेदुन चोएक्यी न्यिमा को मई 1995 में दलाई लामा द्वारा पंचेन लामा घोषित किए जाने के तुरंत बाद चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर हिरासत में ले लिया था। तब से उनके ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है और वे दुनिया के सबसे लंबे समय से लापता राजनीतिक बंदियों में गिने जाते हैं।
शिमला में पंचेन लामा का जन्मदिन क्यों मनाया जाता है?
शिमला में निर्वासित तिब्बती समुदाय हर वर्ष 25 अप्रैल को पंचेन लामा का जन्मदिन प्रार्थनाओं और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाता है। यह आयोजन उनकी रिहाई की मांग और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने का माध्यम भी है।
चीन ने पंचेन लामा की जगह किसे नियुक्त किया है?
चीन ने दलाई लामा द्वारा मान्यता प्राप्त गेदुन चोएक्यी न्यिमा को अस्वीकार कर अपने समर्थक ग्यात्सेन नोरबू को पंचेन लामा नियुक्त किया। तिब्बती बौद्ध समुदाय इस नियुक्ति को वैध नहीं मानता।
पंचेन लामा का मुद्दा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में बड़ी संख्या में निर्वासित तिब्बती रहते हैं और धर्मशाला में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन स्थित है। पंचेन लामा का मुद्दा भारत-चीन संबंधों और तिब्बती बौद्ध धर्म के भविष्य दोनों से जुड़ा है।
पंचेन लामा की उम्र कितनी है और उनका जन्म कहां हुआ था?
पंचेन लामा गेदुन चोएक्यी न्यिमा का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नगछू क्षेत्र के ल्हारी गांव में हुआ था। 25 अप्रैल 2026 को वे 37 वर्ष के हो गए।
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