गेहूं उत्पादन 2025-26: मौसम की मार के बावजूद केंद्र सरकार ने दिया मजबूती का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2025 — केंद्र सरकार ने रविवार को स्पष्ट किया कि 2025-26 के गेहूं उत्पादन को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टें भ्रामक हैं। सरकार के अनुसार, कुछ इलाकों में मौसमी प्रतिकूलताओं के बावजूद देश का कुल गेहूं उत्पादन स्थिर और मजबूत बना हुआ है। बढ़े हुए बुवाई क्षेत्र, उन्नत कृषि तकनीक और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के व्यापक उपयोग ने इसे संभव बनाया है।
कृषि मंत्रालय का आकलन: 'मिश्रित लेकिन लचीला' सीजन
कृषि मंत्रालय ने इस गेहूं सीजन को 'मिश्रित लेकिन लचीला' करार दिया है। एक तरफ जलवायु संबंधी चुनौतियां रहीं, तो दूसरी तरफ किसानों ने अनुकूलन के मजबूत उपाय अपनाए। मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि लगभग 33.4 मिलियन हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल में इस सीजन किसी कीट या बीमारी का प्रकोप नहीं देखा गया।
समय पर और जल्दी बुवाई के चलते पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा 2025-26 में अतिरिक्त 0.6 मिलियन हेक्टेयर में बोआई से स्थानीय नुकसान की आंशिक भरपाई होने की उम्मीद है।
राज्यवार स्थिति: हरियाणा और मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड खरीद
हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक ने सरकार के 75 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) के खरीद लक्ष्य को पहले ही पार कर लिया है। अब तक 56.13 एलएमटी की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से करीब 9 एलएमटी अधिक है।
मध्य प्रदेश में प्रारंभिक खरीद लक्ष्य 78 एलएमटी था, लेकिन उत्पादन अनुमान बेहतर रहने पर राज्य सरकार के अनुरोध पर इसे बढ़ाकर 100 एलएमटी कर दिया गया है। यह आंकड़ा स्वयं बताता है कि जमीनी हकीकत नकारात्मक मीडिया रिपोर्टों से कहीं बेहतर है।
महाराष्ट्र में 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन का अनुमान 22.90 लाख टन है, जो हाल के वर्षों की तुलना में स्थिर वृद्धि दर्शाता है। मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों से अप्रैल 2025 के अंत तक गेहूं की आवक लगातार जारी है।
मौसमी चुनौतियां: गर्मी और बेमौसम बारिश का असर
सरकार ने स्वीकार किया कि फरवरी 2025 में असामान्य रूप से उच्च तापमान के कारण कुछ क्षेत्रों में फसल गर्मी के तनाव से प्रभावित हुई। इससे अनाज भरने की अवधि प्रभावित हुई और स्थानीय स्तर पर उपज में कमी आई।
इसके अलावा, कुछ इलाकों में फसल पकने के दौरान असमय बारिश और ओलावृष्टि से अनाज की गुणवत्ता और मात्रा को स्थानीय नुकसान हुआ। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी रोग या कीट के कारण उत्पादन में कमी की कोई पुष्ट रिपोर्ट नहीं है और फसल वृद्धि के दौरान खरपतवार का प्रकोप भी न्यूनतम रहा।
उन्नत किस्मों और तकनीक से मिली ताकत
इस सीजन में उन्नत और जलवायु-सहिष्णु गेहूं किस्मों को अपनाने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये किस्में अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ गर्मी और जैविक तनाव को बेहतर ढंग से सहन करने में सक्षम हैं। समय पर बुवाई से फसल को अंतिम चरण की गर्मी से बचाने में भी मदद मिली।
सरकार का कहना है कि मौसम की अनियमितताओं के प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई बढ़े हुए क्षेत्र, समय पर बुवाई और उन्नत किस्मों से काफी हद तक हो जाएगी। इससे 2024-25 की तुलना में राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं उत्पादन स्थिर बना रहेगा।
व्यापक परिप्रेक्ष्य: खाद्य सुरक्षा और नीतिगत संदर्भ
गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है और घरेलू खाद्य सुरक्षा के लिए गेहूं उत्पादन का स्थिर रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2022-23 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक गेहूं आपूर्ति संकट के दौरान भारत ने निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। तब से सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और बफर स्टॉक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
आने वाले हफ्तों में तीसरे अग्रिम अनुमान जारी होने पर गेहूं उत्पादन की सटीक तस्वीर और स्पष्ट होगी। साथ ही, केंद्रीय पूल में गेहूं की खरीद का अंतिम आंकड़ा सरकार की नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।