अंतरिम जमानत की मांग: इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की याचिका

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अंतरिम जमानत की मांग: इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की याचिका

सारांश

तिहाड़ जेल में बंद बारामूला सांसद इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने को दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दायर की। पटियाला हाउस कोर्ट के इनकार के बाद यह कदम उठाया गया। NIA ने कस्टडी पैरोल का विकल्प सुझाया है।

Key Takeaways

  • इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की है।
  • पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले ही मानवीय आधार पर दायर जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
  • NIA ने सुरक्षा कारणों से जमानत का विरोध करते हुए कस्टडी पैरोल का विकल्प सुझाया है।
  • जनवरी 2025 में राशिद को बजट सत्र में शामिल होने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी।
  • नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹4 लाख यात्रा खर्च विवाद पर स्प्लिट जजमेंट सुनाया था।
  • राशिद 2024 लोकसभा चुनाव में जेल से ही बारामूला सीट जीतकर सांसद बने थे।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर की बारामूला लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद इंजीनियर अब्दुल रशीद शेख उर्फ 'इंजीनियर राशिद' ने अपने गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने की अनुमति के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की है। फिलहाल तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद राशिद पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आतंकवाद वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) मामले में जांच जारी है। यह याचिका तब दायर की गई जब पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले ही उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।

पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

पटियाला हाउस कोर्ट ने मानवीय आधार पर दायर इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राशिद के अधिवक्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और अस्पताल में भर्ती पिता से मुलाकात की इजाजत मांगी।

निचली अदालत में NIA ने अंतरिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए सुरक्षा संबंधी खतरों का हवाला दिया था। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया था कि राशिद को कस्टडी पैरोल — यानी हिरासत में रहते हुए निगरानी में मिलने की सुविधा — दी जा सकती है।

NIA का पक्ष: कस्टडी पैरोल पर्याप्त

NIA के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि इंजीनियर राशिद को अंतरिम जमानत की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कस्टडी पैरोल के माध्यम से वे अपने पिता और परिवार से मिल सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि सुरक्षा दृष्टि से जमानत देना उचित नहीं होगा।

गौरतलब है कि जनवरी 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद को संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी थी, जिससे वे हिरासत में रहते हुए लोकसभा की कार्यवाही में शामिल हो सके थे।

दिल्ली हाईकोर्ट का विभाजित फैसला और यात्रा खर्च विवाद

नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में एक स्प्लिट जजमेंट (विभाजित फैसला) सुनाया था। यह फैसला उस याचिका पर आया था जिसमें राशिद ने संसद आने-जाने के दौरान लगाई गई करीब ₹4 लाख की यात्रा एवं सुरक्षा व्यय की शर्त में संशोधन की मांग की थी।

जस्टिस विवेक चौधरी ने याचिका खारिज कर दी, जबकि जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने राहत देने के पक्ष में मत दिया। इस मतभेद के बाद मामला मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के पास प्रशासनिक निर्देशों के लिए भेजा गया।

राशिद के वकील का तर्क था कि प्रतिदिन की यात्रा और पुलिस खर्च का बोझ एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के संसदीय कर्तव्यों में बाधा उत्पन्न करता है। वहीं दिल्ली पुलिस ने इस खर्च को उचित बताते हुए कहा कि इसमें सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और पुलिस तैनाती जैसे अनिवार्य इंतजाम शामिल हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

इंजीनियर राशिद 2024 के लोकसभा चुनाव में जेल में रहते हुए बारामूला सीट से जीते थे — यह अपने आप में एक असाधारण राजनीतिक घटना थी। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिग्गज नेता उमर अब्दुल्ला को हराकर पूरे देश को चौंका दिया था।

यह मामला उस व्यापक प्रश्न को भी उठाता है कि क्या एक निर्वाचित सांसद, जो न्यायिक हिरासत में हो, अपने संसदीय दायित्वों और मानवीय जरूरतों को पूरा करने में किस हद तक सक्षम हो सकता है। NIA और न्यायपालिका के बीच इस तनाव को देखते हुए यह मामला संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं — क्या अदालत मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत देगी या NIA की सुरक्षा संबंधी आपत्तियों को प्राथमिकता देते हुए कस्टडी पैरोल का विकल्प सुझाएगी, यह देखना अहम होगा।

Point of View

वह अपने बीमार पिता से मिलने के लिए अदालत की शरण लेने को मजबूर है। NIA की सुरक्षा संबंधी आपत्तियां वैध हो सकती हैं, लेकिन मुख्यधारा की मीडिया यह सवाल नहीं उठाती कि ₹4 लाख यात्रा खर्च की शर्त क्या एक चुने हुए सांसद की संसदीय भागीदारी को व्यावहारिक रूप से असंभव बना देती है। दिल्ली हाईकोर्ट का अगला फैसला न्याय, लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की नाजुक रेखा को फिर से परिभाषित करेगा।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

इंजीनियर राशिद ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
इंजीनियर राशिद ने अपने गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने के लिए अंतरिम जमानत मांगी है। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा अर्जी खारिज किए जाने के बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
NIA ने इंजीनियर राशिद की जमानत का विरोध क्यों किया?
NIA ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि कस्टडी पैरोल के जरिए राशिद परिवार से मिल सकते हैं, इसलिए जमानत की जरूरत नहीं।
कस्टडी पैरोल और अंतरिम जमानत में क्या फर्क है?
कस्टडी पैरोल में आरोपी पुलिस निगरानी में हिरासत में रहते हुए किसी से मिल सकता है, जबकि अंतरिम जमानत में वह सीमित समय के लिए स्वतंत्र रूप से बाहर रह सकता है। दोनों में स्वतंत्रता का स्तर अलग-अलग होता है।
इंजीनियर राशिद पर क्या आरोप हैं और वे कब से जेल में हैं?
इंजीनियर राशिद पर NIA द्वारा आतंकवाद वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) से जुड़े गंभीर आरोप हैं। वे तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में जेल से ही बारामूला सीट जीती थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इस मामले में क्या फैसला दिया था?
नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने यात्रा खर्च विवाद पर विभाजित फैसला (स्प्लिट जजमेंट) दिया था। जस्टिस विवेक चौधरी ने याचिका खारिज की, जबकि जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने राहत के पक्ष में मत दिया।
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