नीट विवाद: कांग्रेस ने बेंगलुरु में भाजपा मुख्यालय घेरा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के महासचिव एस. मनोहर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार, 22 जुलाई को बेंगलुरु स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निंदा करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की माँग की। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका और कई कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
मुख्य घटनाक्रम
तख्तियाँ थामे और केंद्र सरकार के विरुद्ध नारे लगाते कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय की ओर बढ़े, जहाँ पुलिस ने उन्हें बैरिकेड से रोक दिया। इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक बीपी हरीश सीधे केपीसीसी कार्यालय पहुँचे — जैसे ही वे अपनी गाड़ी से बाहर निकले, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और भाजपा विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
उल्लेखनीय है कि इसी दिन नीट विवाद को लेकर भाजपा नेता भी कांग्रेस के विरुद्ध प्रदर्शन करने के लिए केपीसीसी मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एस. मनोहर ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठा दिया है। उन्होंने कहा, 'लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय केंद्र सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।'
मनोहर ने माँग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने विभाग की नाकामियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। साथ ही उन्होंने नीट में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष व पारदर्शी जाँच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की भी माँग रखी।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, नीट में कथित गड़बड़ियों की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी का लोकतांत्रिक आंदोलन राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जारी रहेगा।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा को लेकर पूरे देश में विवाद गहरा गया है। कथित प्रश्नपत्र लीक और ग्रेस मार्क्स विवाद के बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्षी दलों ने नीट के संचालन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा हो — लेकिन कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की उपस्थिति इस प्रदर्शन को राजनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
आने वाले दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर और विरोध प्रदर्शनों की संभावना है, जबकि नीट मामले में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायिक सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।