नीट पेपर लीक: हनुमान बेनीवाल का जंतर-मंतर प्रदर्शन और संसद मार्च को समर्थन, लाठीचार्ज की भी परवाह नहीं
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का खुलकर समर्थन किया और संसद मार्च में शामिल हुए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को जायज़ ठहराते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए लड़ रहे छात्रों के साथ वे लाठीचार्ज का सामना करने को भी तैयार हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बेनीवाल स्वयं विरोध स्थल पर पहुँचे और संसद मार्च में भाग ले रहे छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट की। मार्च शुरू होने से पहले उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एनडीए सरकार पर छात्रों और उम्मीदवारों के भविष्य की रक्षा करने में विफल रहने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि नीट विवाद और पेपर लीक को लेकर चिंताएँ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने एक सर्वदलीय बैठक के दौरान भी उठाई जा चुकी हैं।
प्रदर्शन का उग्र रूप और पुलिस कार्रवाई
सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन और तीखा हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन का घेराव करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों के संसद परिसर के नज़दीक पहुँचने पर संसद का मुख्य द्वार भी बंद करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी संसद भवन के आसपास डटे रहे और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही।
बेनीवाल का बयान और संवैधानिक अधिकार की दलील
बाद में जारी एक आधिकारिक बयान में बेनीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों, युवाओं, किसानों और नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी माँगें उठाने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा राजस्थान और देश के युवाओं के साथ खड़े रहे हैं और निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए उनकी लड़ाई का समर्थन जारी रखेंगे।
आम जनता और छात्रों पर असर
कथित नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही गड़बड़ियों को लेकर छात्रों में गहरा आक्रोश है। गौरतलब है कि नीट विवाद संसद के मानसून सत्र में भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि केंद्र सरकार परीक्षा सुधार और जवाबदेही को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है। बेनीवाल ने संकेत दिया है कि यदि माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज़ होगा।