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अजीत सिंह यादव: एक हाथ खोकर जीता पैरालंपिक रजत, फिरोज पालिया ने लॉर्ड्स में रचा था इतिहास

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अजीत सिंह यादव: एक हाथ खोकर जीता पैरालंपिक रजत, फिरोज पालिया ने लॉर्ड्स में रचा था इतिहास

सारांश

एक हाथ खोने के बाद भी अजीत सिंह यादव ने पेरिस पैरालंपिक में 65.62 मीटर थ्रो से रजत पदक जीता — यह सिर्फ खेल की जीत नहीं, इरादे की जीत है। वहीं फिरोज पालिया ने 1932 में लॉर्ड्स पर भारत का पहला कदम रखा था। 5 सितंबर को जन्मे ये दोनों खिलाड़ी भारतीय खेल इतिहास की अमिट कड़ियाँ हैं।

मुख्य बातें

अजीत सिंह यादव का जन्म 5 सितंबर 1993 को इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
2017 की ट्रेन दुर्घटना में मित्र की जान बचाते हुए अजीत ने अपना बायाँ हाथ (कोहनी के नीचे) खो दिया।
अजीत ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में एफ46 श्रेणी में 65.62 मीटर थ्रो के साथ रजत पदक जीता।
विश्व पैरा चैंपियनशिप में अजीत ने 2023 में स्वर्ण, 2024 और 2019 में कांस्य पदक जीते।
भारत सरकार ने 2025 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
फिरोज एडुल्जी पालिया (जन्म 5 सितंबर 1910 , मुंबई) ने 1932 और 1936 में लॉर्ड्स पर इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए 2 टेस्ट खेले; 100 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,536 रन और 208 विकेट ।

5 सितंबर की जन्मतिथि दो ऐसे भारतीय खिलाड़ियों को एक सूत्र में पिरोती है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी देश का तिरंगा ऊँचा रखा — पैरा-जैवलिन स्टार अजीत सिंह यादव और भारत के शुरुआती टेस्ट क्रिकेटरों में से एक फिरोज एडुल्जी पालिया

अजीत सिंह यादव: विपदा से विजय का सफर

अजीत सिंह यादव का जन्म 5 सितंबर 1993 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ था। उनकी ज़िंदगी 2017 में एक ट्रेन दुर्घटना के बाद हमेशा के लिए बदल गई, जब अपने मित्र अंशुमन सिंह की जान बचाने की कोशिश में उन्होंने अपना बायाँ हाथ — कोहनी के नीचे तक — खो दिया।

इस हादसे ने अजीत को तोड़ा नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी अपूर्णता को ही अपनी पहचान बना लिया। दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम के बल पर उन्होंने पैरा-जैवलिन में अपनी प्रतिभा को माँजा और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत को गर्वित किया।

पेरिस पैरालंपिक 2024: रजत पदक की ऐतिहासिक छलाँग

2024 में पेरिस पैरालंपिक खेलों में अजीत ने एफ46 श्रेणी में 65.62 मीटर का थ्रो कर रजत पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के इतिहास में एक मील का पत्थर है।

गौरतलब है कि पेरिस से पहले भी अजीत का प्रदर्शन विश्व स्तर पर उल्लेखनीय रहा था। 2022 एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता। विश्व पैरा चैंपियनशिप में उनका रिकॉर्ड और भी शानदार है — 2019 में कांस्य, 2023 में स्वर्ण और 2024 में कांस्य पदक। इसके अलावा 2019 में बीजिंग और 2021 में दुबई में आयोजित विश्व पैरा ग्रैंड प्रिक्स में उन्होंने दोनों बार स्वर्ण पदक जीता। ये सभी उपलब्धियाँ एफ46 श्रेणी में हासिल की गईं।

उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने 2025 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

फिरोज पालिया: लॉर्ड्स में भारत की शुरुआती पहचान

भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में जिन खिलाड़ियों ने टीम इंडिया की नींव रखी, उनमें फिरोज एडुल्जी पालिया का नाम विशेष है। उनका जन्म 5 सितंबर 1910 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था।

पालिया को भारतीय टीम की ओर से दो टेस्ट मैच खेलने का अवसर मिला — पहला 1932 में और दूसरा 1936 में। उल्लेखनीय बात यह है कि दोनों ही टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स में खेले गए।

घरेलू क्रिकेट में दीर्घ और समृद्ध करियर

बाएं हाथ से बल्लेबाज़ी और स्पिन गेंदबाज़ी करने वाले पालिया का घरेलू करियर उनके अंतर्राष्ट्रीय कार्यकाल से कहीं अधिक विस्तृत रहा। उन्होंने बंगाल, मद्रास, मुंबई और मैसूर के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला।

100 प्रथम श्रेणी मैचों में उनके नाम 4,536 रन और 208 विकेट दर्ज हैं — जो उनकी ऑलराउंड क्षमता का प्रमाण है। 9 सितंबर 1981 को बेंगलुरु में 71 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

इन दोनों खिलाड़ियों की कहानियाँ भारतीय खेल की उस अदम्य भावना की प्रतीक हैं, जो शारीरिक सीमाओं और युग की बाधाओं को पार कर इतिहास रचती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की पैरा-खेल नीति की सफलता का जीवंत प्रमाण है — जो नीरज चोपड़ा की लोकप्रियता की छाया में पनपी। यह ध्यान देने योग्य है कि एक ट्रेन हादसे के बाद पुनर्वास से लेकर पैरालंपिक पोडियम तक का सफर बिना मज़बूत संस्थागत समर्थन के संभव नहीं होता — जिसका श्रेय अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। दूसरी ओर, फिरोज पालिया जैसे अग्रदूतों की विरासत याद दिलाती है कि भारतीय क्रिकेट की जड़ें कितनी विविध और समृद्ध हैं — जब अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँचना आज से कहीं अधिक दुर्लभ था।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजीत सिंह यादव कौन हैं और उन्होंने पैरालंपिक में क्या उपलब्धि हासिल की?
अजीत सिंह यादव उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पैरा-जैवलिन एथलीट हैं, जिन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 में एफ46 श्रेणी में 65.62 मीटर थ्रो के साथ रजत पदक जीता। 2017 में एक ट्रेन दुर्घटना में बायाँ हाथ खोने के बाद उन्होंने जैवलिन में अपनी पहचान बनाई।
अजीत सिंह यादव ने विश्व पैरा चैंपियनशिप में कितने पदक जीते हैं?
अजीत ने विश्व पैरा चैंपियनशिप में तीन पदक जीते हैं — 2019 में कांस्य, 2023 में स्वर्ण और 2024 में कांस्य। इसके अलावा उन्होंने 2019 (बीजिंग) और 2021 (दुबई) विश्व पैरा ग्रैंड प्रिक्स में स्वर्ण पदक भी जीते।
अजीत सिंह यादव को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने अजीत सिंह यादव को 2025 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार पैरा-खेलों में उनके असाधारण योगदान और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए दिया गया।
फिरोज पालिया ने भारत के लिए कितने टेस्ट खेले और उनका घरेलू करियर कैसा रहा?
फिरोज एडुल्जी पालिया ने भारत के लिए 2 टेस्ट मैच खेले — 1932 और 1936 में, दोनों इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने 100 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,536 रन और 208 विकेट लिए।
फिरोज पालिया का निधन कब और कहाँ हुआ?
फिरोज पालिया का निधन 9 सितंबर 1981 को बेंगलुरु में 71 वर्ष की आयु में हुआ। उनका जन्म 5 सितंबर 1910 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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