संदीप चौधरी: एक दुर्घटना के बाद मिली नई जीवनधारा, विश्व पैरा एथलेटिक्स में बनाया नया रिकॉर्ड
सारांश
Key Takeaways
- संदीप चौधरी ने खेलों में अद्वितीय पहचान बनाई है।
- दुर्घटना के बाद भी हार नहीं मानी।
- 2019 में विश्व पैरा एथलेटिक्स में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित।
- आने वाले वर्षों में और मेडल की उम्मीद।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 'सपने वही सच्चे होते हैं, जिनमें जान होती है; पंखों से उड़ान नहीं होती, हौसले से होती है।' ये पंक्तियाँ भारत के पैरा एथलीट संदीप चौधरी की कहानी पर पूरी तरह से लागू होती हैं। संदीप का अदम्य साहस ही था, जिसके चलते उन्होंने खेल की दुनिया में अपनी एक विशेष पहचान बनाई।
संदीप का जन्म 10 अप्रैल 1966 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मेहाड़ा जाटूवांस में हुआ। मात्र 12 वर्ष की आयु में वे एक कार दुर्घटना का शिकार बने, जिसमें उनके बाएं कूल्हे के जोड़ में गंभीर चोट आई और वे शारीरिक रूप से अक्षम हो गए। फिर भी, संदीप ने हार नहीं मानी और खेलों के प्रति अपनी रुचि को जीवित रखा। वे पहले फुटबॉल के गोलकीपर रहे, जहाँ उनकी बाहों में इतनी ताकत थी कि वे गेंद को मैदान के आधे हिस्से तक फेंक देते थे।
उनकी इस क्षमता को देखते हुए दोस्तों ने उन्हें जैवलिन थ्रो का खेल अपनाने की सलाह दी। संदीप ने उनकी सलाह मानी और जैवलिन थ्रो में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। संदीप ने 2016 में बर्लिन ओपन में शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीता। रिओ पैरालंपिक में भी उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा, जहाँ वे चौथे स्थान पर रहे।
2018 में एशियाई पैरा खेलों में संदीप ने पहली बार सुर्खियाँ बटोरीं। उन्होंने 60.01 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता। इसके एक साल बाद, 2019 में, उन्होंने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 66.18 मीटर का थ्रो फेंककर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि एक नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया। संदीप ने 2020 में टोक्यो पैरा ओलंपिक और 2024 में पेरिस ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ वे चौथे स्थान पर रहे। 2024 में विश्व पैरा एथलेटिक्स में उन्होंने कांस्य पदक भी जीता। आने वाले वर्षों में देश को उनसे और भी मेडल की उम्मीद है। संदीप चौधरी को 2020 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया है।