सुहास एल यथिराज: IAS अधिकारी से पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी और 2007 बैच के आईएएस अधिकारी सुहास एल यथिराज उन विरले भारतीयों में से हैं जिन्होंने प्रशासन और खेल — दोनों मोर्चों पर देश का नाम रोशन किया है। टोक्यो पैरालंपिक 2020 और पेरिस पैरालंपिक 2024 में सिल्वर मेडल जीतने वाले सुहास विश्व और एशियाई स्तर पर भी कई स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।
संघर्षों से भरा बचपन
2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हसन में जन्मे सुहास को जन्म से ही पैर में विकलांगता थी। प्रारंभिक शिक्षा कन्नड़ माध्यम में होने के कारण अंग्रेजी स्कूल में दाखिले में कठिनाइयाँ आईं। पिता की नौकरी में बार-बार तबादले की वजह से पढ़ाई अलग-अलग शहरों में हुई, लेकिन परिवार का साथ हमेशा मिला।
गाँव से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद सुहास ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की। 2005 में पिता के निधन ने उन्हें भीतर तक हिला दिया और यहीं से उन्होंने सिविल सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय किया।
UPSC से IAS तक
पिता के निधन के बाद सुहास ने UPSC की तैयारी शुरू की और 2007 बैच में आईएएस अधिकारी बने। उत्तर प्रदेश कैडर में तैनात होने के बाद आजमगढ़ में पदस्थापना के दौरान उनका बैडमिंटन के प्रति लगाव पेशेवर रूप ले गया। एक स्थानीय बैडमिंटन टूर्नामेंट के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने आयोजकों से खुद को भी खेलने की अनुमति माँगी और राज्य स्तर के कई खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा साबित की।
पैरा-बैडमिंटन में उभरता सितारा
सुहास की प्रतिभा को पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना ने पहचाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। 2016 एशियन चैंपियनशिप में सुहास ने मेंस सिंगल्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
एशियन पैरा गेम्स 2018 में पुरुष टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद टोक्यो पैरालंपिक 2020 में उन्होंने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विश्व विजेता और पेरिस पैरालंपिक
एशियन पैरा गेम्स 2023 में सुहास ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप 2024 में भी स्वर्ण पदक जीता और उसी वर्ष पेरिस पैरालंपिक 2024 में सिल्वर मेडल हासिल किया। यह उनका लगातार दूसरा पैरालंपिक रजत पदक था।
व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा
सुहास ने 2008 में ऋतु से विवाह किया, जो 2004 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं और 2019 में मिसेज इंडिया का खिताब भी जीत चुकी हैं। एक आईएएस अधिकारी के रूप में सुहास ने सुशासन और जनसेवा को प्राथमिकता दी है। उनकी जीवन-यात्रा करोड़ों युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि शारीरिक चुनौतियाँ संकल्प के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।