1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुहास एल यथिराज: IAS अधिकारी से पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट तक का सफर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुहास एल यथिराज: IAS अधिकारी से पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट तक का सफर

सारांश

IAS अधिकारी होते हुए भी सुहास एल यथिराज ने पैरा बैडमिंटन में टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में सिल्वर, 2024 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। कर्नाटक के हसन से शुरू हुई उनकी यात्रा — जन्मजात विकलांगता, पिता की असामयिक मृत्यु और अलग-अलग शहरों में पढ़ाई — भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायी कहानियों में से एक है।

मुख्य बातें

सुहास एल यथिराज 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और पैरा बैडमिंटन में भारत के शीर्ष खिलाड़ी हैं।
उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक 2020 और पेरिस पैरालंपिक 2024 — दोनों में सिल्वर मेडल जीते।
वर्ल्ड चैंपियनशिप 2024 और एशियन पैरा गेम्स 2023 में गोल्ड मेडल जीता।
2021 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित; 2016 एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक।
2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हसन में जन्मे; जन्म से पैर में विकलांगता के बावजूद NIT से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की।
पत्नी ऋतु 2004 बैच की PCS अधिकारी और 2019 मिसेज इंडिया विजेता हैं।

पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी और 2007 बैच के आईएएस अधिकारी सुहास एल यथिराज उन विरले भारतीयों में से हैं जिन्होंने प्रशासन और खेल — दोनों मोर्चों पर देश का नाम रोशन किया है। टोक्यो पैरालंपिक 2020 और पेरिस पैरालंपिक 2024 में सिल्वर मेडल जीतने वाले सुहास विश्व और एशियाई स्तर पर भी कई स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।

संघर्षों से भरा बचपन

2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हसन में जन्मे सुहास को जन्म से ही पैर में विकलांगता थी। प्रारंभिक शिक्षा कन्नड़ माध्यम में होने के कारण अंग्रेजी स्कूल में दाखिले में कठिनाइयाँ आईं। पिता की नौकरी में बार-बार तबादले की वजह से पढ़ाई अलग-अलग शहरों में हुई, लेकिन परिवार का साथ हमेशा मिला।

गाँव से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद सुहास ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की। 2005 में पिता के निधन ने उन्हें भीतर तक हिला दिया और यहीं से उन्होंने सिविल सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय किया।

UPSC से IAS तक

पिता के निधन के बाद सुहास ने UPSC की तैयारी शुरू की और 2007 बैच में आईएएस अधिकारी बने। उत्तर प्रदेश कैडर में तैनात होने के बाद आजमगढ़ में पदस्थापना के दौरान उनका बैडमिंटन के प्रति लगाव पेशेवर रूप ले गया। एक स्थानीय बैडमिंटन टूर्नामेंट के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने आयोजकों से खुद को भी खेलने की अनुमति माँगी और राज्य स्तर के कई खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा साबित की।

पैरा-बैडमिंटन में उभरता सितारा

सुहास की प्रतिभा को पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना ने पहचाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। 2016 एशियन चैंपियनशिप में सुहास ने मेंस सिंगल्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।

एशियन पैरा गेम्स 2018 में पुरुष टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद टोक्यो पैरालंपिक 2020 में उन्होंने भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विश्व विजेता और पेरिस पैरालंपिक

एशियन पैरा गेम्स 2023 में सुहास ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप 2024 में भी स्वर्ण पदक जीता और उसी वर्ष पेरिस पैरालंपिक 2024 में सिल्वर मेडल हासिल किया। यह उनका लगातार दूसरा पैरालंपिक रजत पदक था।

व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा

सुहास ने 2008 में ऋतु से विवाह किया, जो 2004 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं और 2019 में मिसेज इंडिया का खिताब भी जीत चुकी हैं। एक आईएएस अधिकारी के रूप में सुहास ने सुशासन और जनसेवा को प्राथमिकता दी है। उनकी जीवन-यात्रा करोड़ों युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि शारीरिक चुनौतियाँ संकल्प के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो देश में पैरा-एथलीटों की पहचान और समर्थन का ढाँचा कितना मजबूत है? उनकी सफलता व्यक्तिगत संकल्प की जीत है, लेकिन यह भी दर्शाती है कि भारत में पैरा-खेल प्रतिभाएँ अक्सर संस्थागत समर्थन की जगह संयोग और व्यक्तिगत पहल पर निर्भर रहती हैं। जब तक पैरा-बैडमिंटन को क्रिकेट जैसा ढाँचागत समर्थन नहीं मिलता, सुहास जैसी प्रतिभाएँ अपवाद बनी रहेंगी, नियम नहीं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुहास एल यथिराज कौन हैं?
सुहास एल यथिराज भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी और 2007 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 पैरालंपिक में सिल्वर मेडल तथा 2024 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है।
सुहास यथिराज ने पैरालंपिक में कौन-से पदक जीते हैं?
सुहास यथिराज ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 और पेरिस पैरालंपिक 2024 — दोनों में सिल्वर मेडल जीते हैं। इसके अलावा उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2023 और वर्ल्ड चैंपियनशिप 2024 में गोल्ड मेडल भी जीते।
सुहास यथिराज को कौन-सा राष्ट्रीय खेल पुरस्कार मिला है?
सुहास यथिराज को 2021 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनके टोक्यो पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद दिया गया।
सुहास यथिराज पैरा बैडमिंटन में कैसे आए?
आजमगढ़ में IAS अधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान एक स्थानीय बैडमिंटन टूर्नामेंट के उद्घाटन पर उन्होंने खुद को भी खेलने की अनुमति माँगी और राज्य स्तर के खिलाड़ियों को हराया। इसके बाद कोच गौरव खन्ना ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रेरित किया।
सुहास यथिराज का व्यक्तिगत जीवन कैसा है?
सुहास यथिराज ने 2008 में ऋतु से विवाह किया, जो 2004 बैच की PCS अधिकारी हैं और 2019 में मिसेज इंडिया का खिताब जीत चुकी हैं। सुहास का जन्म 2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हसन में हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले