10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पल्लवी देहुरी: 100 मीटर की राष्ट्रीय धावक अब चला रही हैं ओडिशा में 'अम्मा बस', पिता के निधन के बाद छूटा खेल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पल्लवी देहुरी: 100 मीटर की राष्ट्रीय धावक अब चला रही हैं ओडिशा में 'अम्मा बस', पिता के निधन के बाद छूटा खेल

सारांश

स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी राष्ट्रीय धावक पल्लवी देहुरी आज ओडिशा में बस चला रही हैं — पिता के जाने के बाद परिवार की ज़िम्मेदारी ने ट्रैक से स्टीयरिंग व्हील तक का सफर तय करा दिया। लेकिन उनका देश के लिए दौड़ने का सपना अभी भी बाकी है।

मुख्य बातें

पल्लवी देहुरी राष्ट्रीय स्तर की धावक हैं, जो 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण व रजत पदक जीत चुकी हैं।
पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उन्हें एथलेटिक्स छोड़ ओडिशा की 'अम्मा बस' में चालक बनना पड़ा।
पल्लवी मूल रूप से असम की हैं और अभी भुवनेश्वर, ओडिशा में रहती हैं।
उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है और महिलाओं को हिम्मत से आगे बढ़ने का संदेश दिया है।
पल्लवी ने कहा कि भविष्य में मौका मिला तो वह एथलेटिक्स में वापसी कर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहेंगी।

राष्ट्रीय स्तर की धावक पल्लवी देहुरी, जो कभी 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी हैं, आज ओडिशा की 'अम्मा बस' सेवा में बस चालक के रूप में कार्यरत हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारी कंधों पर आ गई, जिसके चलते उन्हें एथलेटिक्स का करियर बीच में छोड़ना पड़ा। बावजूद इसके, देहुरी ने देश के लिए खेलने का सपना नहीं छोड़ा है।

कैसे छूटा एथलेटिक्स का सफर

पल्लवी देहुरी मूल रूप से असम से हैं और फिलहाल भुवनेश्वर, ओडिशा में रहती हैं। उन्होंने बताया, 'पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। परिवार को देखने वाला कोई नहीं था, इसलिए मुझे खेल छोड़कर ड्राइवरी को चुनना पड़ा, ताकि मैं अपने परिवार की मदद कर सकूं।' यह वही धावक हैं जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की थी।

खेल का सपना अभी भी ज़िंदा

पल्लवी ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में एथलेटिक्स में वापसी करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे फिर मौका मिलता है, तो मैं फिर से एथलेटिक्स में आना चाहूंगी और देश का प्रतिनिधित्व करना चाहूंगी।' फिलहाल बस चालक की व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्हें अभ्यास का समय नहीं मिल पाता।

महिलाओं को प्रेरणा का संदेश

स्नातक तक शिक्षा हासिल करने वाली पल्लवी ने अन्य महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि लड़कियों को हिम्मत करते हुए आगे बढ़ना चाहिए और अपने तथा परिवार के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों को किसी से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए और खुद को बेहतर समझना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला सशक्तिकरण और खेल में महिलाओं की भागीदारी पर राष्ट्रीय बहस जारी है।

खेल और आजीविका के बीच फंसी प्रतिभाएं

पल्लवी देहुरी का मामला अकेला नहीं है। देश में कई राष्ट्रीय स्तर के एथलीट पारिवारिक दबाव और आर्थिक संकट के चलते खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। गौरतलब है कि खेल नीति में सरकारी नौकरी और वित्तीय सहायता के प्रावधान होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर इनका लाभ हर एथलीट तक नहीं पहुंच पाता। पल्लवी का संघर्ष इस व्यवस्थागत खामी को उजागर करता है।

क्या होगा आगे

पल्लवी देहुरी की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुकी है और खेल प्रेमियों की ओर से उनके लिए सरकारी सहायता की मांग उठ रही है। यदि उन्हें उचित समर्थन और अवसर मिले, तो वह एथलेटिक्स में वापसी की संभावना से इनकार नहीं करतीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय खेल तंत्र की एक बड़ी विफलता का आईना है। राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली एथलीट को अगर आजीविका के लिए खेल छोड़ना पड़े, तो यह सवाल उठता है कि खेलो इंडिया और अन्य योजनाओं का लाभ जमीनी एथलीटों तक क्यों नहीं पहुंच रहा। सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए कोटे का प्रावधान है, लेकिन इसकी जानकारी और पहुंच अक्सर उन्हीं तक सीमित रहती है जो पहले से संपन्न या संपर्क-सुलभ हैं। पल्लवी जैसी प्रतिभाओं का इस तरह ट्रैक से बाहर हो जाना देश की खेल क्षमता का अदृश्य नुकसान है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पल्लवी देहुरी कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धियां हासिल की हैं?
पल्लवी देहुरी एक राष्ट्रीय स्तर की धावक हैं, जिन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। वह असम से हैं और फिलहाल भुवनेश्वर, ओडिशा में रहती हैं।
पल्लवी देहुरी को खेल क्यों छोड़ना पड़ा?
पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई और परिवार की देखभाल के लिए कोई नहीं था। इसी मजबूरी में उन्हें एथलेटिक्स छोड़कर ओडिशा की 'अम्मा बस' सेवा में बस चालक की नौकरी करनी पड़ी।
क्या पल्लवी देहुरी दोबारा एथलेटिक्स में वापसी करना चाहती हैं?
हां, पल्लवी ने स्पष्ट कहा है कि अगर भविष्य में मौका मिला तो वह एथलेटिक्स में वापसी करना चाहेंगी और देश का प्रतिनिधित्व करना चाहेंगी। फिलहाल बस चालक की व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्हें अभ्यास का समय नहीं मिल पाता।
पल्लवी देहुरी ने महिलाओं को क्या संदेश दिया है?
पल्लवी ने कहा कि लड़कियों को हिम्मत करते हुए आगे बढ़ना चाहिए और अपने तथा परिवार के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों को किसी से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए और खुद को बेहतर समझना चाहिए।
ओडिशा की 'अम्मा बस' सेवा क्या है?
'अम्मा बस' ओडिशा सरकार की एक बस परिवहन सेवा है जिसमें पल्लवी देहुरी बस चालक के रूप में कार्यरत हैं। यह सेवा राज्य में सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले