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क्या अवनि लेखरा का बचपन का हादसा उनकी तकदीर बदलने का कारण बना?

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क्या अवनि लेखरा का बचपन का हादसा उनकी तकदीर बदलने का कारण बना?

सारांश

अवनि लेखरा की कहानी केवल एक पैरा निशानेबाज की नहीं है, बल्कि यह एक प्रेरणा है। स्पाइनल कोर्ड इंजरी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए दो बार गोल्ड मेडल जीते। जानिए कैसे उन्होंने अपने संघर्ष को सफलता में बदला।

मुख्य बातें

अवनि लेखरा की कहानी प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने अपनी चुनौतियों को अवसर में बदला।
स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, उन्होंने शूटिंग में सफलता प्राप्त की।
अवनि ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
उनका संघर्ष लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

नई दिल्ली, 7 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। पैरालंपिक गेम्स में दो बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बनाने वाली भारतीय पैरा निशानेबाज अवनि लेखरा ने देश का गौरव बढ़ाया है। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बावजूद, अवनि ने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।

8 नवंबर 2001 को जयपुर (राजस्थान) में जन्मी अवनि को बचपन में ही कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। जब वह मात्र 11 साल की थीं, तब एक दुर्घटना में उनके कमर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।

इस हादसे ने अवनि की जिंदगी को बदलकर रख दिया। अब उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता था। इस घटना का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। हल्का सामान उठाने में भी उन्हें कठिनाई होने लगी, लेकिन तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

उनके पिता का मानना था कि यदि अवनि को किसी खेल से जोड़ा जाए, तो उनकी मायूसी दूर हो सकती है। उन्होंने बेटी को शूटिंग शुरू करने की सलाह दी।

इस हादसे के लगभग तीन साल बाद अवनि ने शूटिंग में करियर बनाने का निश्चय किया। वह ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा से प्रेरित थीं।

2020 के टोक्यो पैरालंपिक में अवनि ने गोल्ड जीतकर इतिहास लिखा। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 इवेंट के फाइनल में 249.6 का स्कोर बनाकर गोल्ड जीता। वह पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इसी पैरालंपिक में उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच 1 में ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किया।

यह पैरालंपिक कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में हुआ था। तीन साल बाद पेरिस में पैरालंपिक गेम्स का आयोजन होना था, इसलिए अवनि को 5 महीने पहले गाल ब्लैडर की पथरी निकलवाने के लिए ऑपरेशन करवाना पड़ा, जिससे उनकी ट्रेनिंग प्रभावित हुई। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।

अवनि ने 2024 के पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 इवेंट के फाइनल में 249.7 अंक के साथ पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता।

इसके साथ ही, अवनि लेखरा पैरालंपिक गेम्स में दो गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। वह पैरालंपिक में तीन मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।

शूटिंग में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए, अवनि लेखरा को 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, जबकि 2022 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया। आज, अवनि लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसे अपने सपनों की ओर बढ़ने का माध्यम बनाया। यह सभी के लिए एक प्रेरणा है कि हम कभी भी हार नहीं मानें।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवनि लेखरा को किन पुरस्कारों से नवाजा गया है?
अवनि लेखरा को 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और 2022 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
अवनि लेखरा ने कब गोल्ड मेडल जीता?
अवनि लेखरा ने 2020 टोक्यो पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता।
क्या अवनि ने अपने करियर में अन्य मेडल भी जीते हैं?
हां, अवनि ने 2020 टोक्यो पैरालंपिक में 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच 1 में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता।
अवनि लेखरा कहाँ से हैं?
अवनि लेखरा का जन्म जयपुर, राजस्थान में हुआ है।
अवनि लेखरा का जीवन संघर्ष क्या है?
अवनि लेखरा ने 11 साल की उम्र में एक हादसे का सामना किया, जिससे उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शूटिंग में करियर बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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