पूनम यादव: आगरा की स्पिन रानी जिन्होंने पिता के विरोध को पार कर 4 विश्व कप खेले
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार स्पिन गेंदबाज पूनम यादव ने अपनी लेग-स्पिन गेंदबाजी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जो मुकाम हासिल किया, वह किसी परीकथा से कम नहीं। आगरा, उत्तर प्रदेश में 24 अगस्त 1991 को जन्मी पूनम को बचपन से ही क्रिकेट की लत थी — लेकिन परिवार और समाज दोनों उनके रास्ते में रोड़ा बने। आज वह 72 टी20 इंटरनेशनल और 58 वनडे मैचों की अनुभवी खिलाड़ी हैं, जिनके नाम क्रमशः 98 और 80 विकेट दर्ज हैं।
बचपन का संघर्ष: पिता का विरोध, रिश्तेदारों के ताने
पूनम महज 8 साल की उम्र में अपने बड़े भाई के साथ जबरदस्ती मैदान पर जाने लगी थीं और लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते हुए अपनी घूमती गेंदों से सबको चौंकाती थीं। उनके पिता उन्हें क्रिकेट खेलने से रोकते और डाँटते थे। एक बार पूनम अकेले ही स्टेडियम पहुँच गईं और वहाँ से अपनी कोच हेमलता काला को घर लेकर आईं — ताकि वह पिता को मना सकें।
जब पूनम प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम जाती थीं, तो रिश्तेदार उनके माता-पिता को ताने दिया करते थे। इन सामाजिक दबावों के बावजूद, एक समय बाद माता-पिता ने उन पर भरोसा किया और उनका साथ दिया — यह फैसला भारतीय महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
घरेलू क्रिकेट में लगातार उम्दा प्रदर्शन के बाद पूनम को पहले सेंट्रल जोन और फिर उत्तर प्रदेश की टीम में जगह मिली। उनकी मेहनत का फल 2013 में मिला, जब उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू का मौका मिला। डेब्यू के महज 7 दिन बाद ही वह वनडे टीम में भी शामिल हो गईं। 2014 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना एकमात्र टेस्ट मैच भी खेला।
चार विश्व कप की यात्रा
पूनम यादव ने भारत के लिए चार विश्व कप में हिस्सा लिया — 2017 और 2022 के वनडे विश्व कप तथा 2018 और 2020 के टी20 विश्व कप। 2017 वनडे विश्व कप में उनकी घातक स्पिन गेंदबाजी ने भारतीय टीम को फाइनल तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। 2018 और 2020 के टी20 विश्व कप में भी उनकी गेंदबाजी की खूब सराहना हुई।
अर्जुन पुरस्कार और करियर की वर्तमान स्थिति
पूनम की उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने 2019 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। हालाँकि, 2022 के बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रही हैं। उनके करियर के आँकड़े — टी20 में 72 मैचों में 98 विकेट और वनडे में 58 मैचों में 80 विकेट — उन्हें भारत की सबसे सफल महिला स्पिन गेंदबाजों में से एक बनाते हैं।
आगे की राह
पूनम यादव की कहानी उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सामाजिक और पारिवारिक दबावों के बीच अपने सपने पालते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह अपनी शानदार फॉर्म को बरकरार रखते हुए एक बार फिर भारतीय टीम में वापसी कर पाती हैं।