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पूनम यादव: पिता के विरोध और रिश्तेदारों के तानों से 4 विश्व कप तक — आगरा की स्पिन रानी की कहानी

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पूनम यादव: पिता के विरोध और रिश्तेदारों के तानों से 4 विश्व कप तक — आगरा की स्पिन रानी की कहानी

सारांश

आगरा की एक लड़की जिसे पिता ने रोका, रिश्तेदारों ने ताने दिए — लेकिन 8 साल की उम्र में अकेले स्टेडियम पहुँचने वाली पूनम यादव ने 4 विश्व कप खेले, 72 टी20 में 98 विकेट लिए और अर्जुन पुरस्कार जीता। यह सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं, एक जिद की जीत है।

मुख्य बातें

पूनम यादव का जन्म 24 अगस्त 1991 को आगरा, उत्तर प्रदेश में हुआ; बचपन से ही क्रिकेट का जुनून था।
पिता के विरोध और रिश्तेदारों के तानों के बावजूद 8 साल की उम्र में अकेले स्टेडियम पहुँचीं और कोच हेमलता काला को घर लाईं।
2013 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 डेब्यू; 7 दिन बाद वनडे टीम में भी शामिल।
72 टी20 इंटरनेशनल में 98 विकेट ; 58 वनडे में 80 विकेट ।
2017, 2018, 2020, 2022 — चारों विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व; 2017 वनडे विश्व कप फाइनल में अहम भूमिका।
भारत सरकार ने 2019 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार स्पिन गेंदबाज पूनम यादव ने अपनी घूमती गेंदों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी संघर्षगाथा से कम नहीं है। आगरा, उत्तर प्रदेश में 24 अगस्त 1991 को जन्मी पूनम को बचपन से ही क्रिकेट का जुनून था, लेकिन परिवार और समाज की रुकावटें उनके रास्ते में खड़ी थीं। इन तमाम बाधाओं को पार कर पूनम ने 4 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और अर्जुन पुरस्कार तक का सफर तय किया।

बचपन का जुनून और परिवार का विरोध

पूनम बचपन में अपने बड़े भाई के साथ जबरदस्ती मैदान पर जाया करती थीं और मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं। उनकी घूमती गेंदें देखकर हर कोई हैरान रह जाता था। लेकिन घर में यह खेल मंजूर नहीं था — पिता उन्हें क्रिकेट से दूर रखने के लिए बार-बार डाँटते और रोकते थे।

यह ऐसे समय में आया जब लड़कियों का खेल के मैदान पर जाना कई परिवारों में स्वीकार्य नहीं था। गौरतलब है कि पूनम महज 8 साल की उम्र में अकेले स्टेडियम पहुँच गई थीं और वहाँ से अपनी कोच हेमलता काला को घर ले आईं — ताकि वे पिता को क्रिकेट खेलने की अनुमति दिलाने के लिए मना सकें। यह एक बच्ची की वह दृढ़ता थी जिसने आगे चलकर भारतीय महिला क्रिकेट को एक मजबूत हथियार दिया।

सामाजिक तानों के बीच परिवार का साथ

जब पूनम स्टेडियम में अभ्यास के लिए जाती थीं, तो रिश्तेदार उनके माता-पिता को ताने मारते थे। बावजूद इसके, एक वक्त के बाद माता-पिता ने उन पर भरोसा बनाए रखा। यह भरोसा ही पूनम की असली ताकत बना। धीरे-धीरे उनके प्रदर्शन ने सभी की जुबान बंद कर दी।

घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

घरेलू क्रिकेट में निरंतर शानदार प्रदर्शन के बाद पूनम को पहले सेंट्रल जोन और फिर उत्तर प्रदेश की टीम में जगह मिली। साल 2013 में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू का मौका मिला। डेब्यू के महज 7 दिन बाद ही वह वनडे टीम में भी शामिल हो गईं — यह उनकी प्रतिभा का सबसे बड़ा प्रमाण था।

अब तक पूनम 72 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 98 विकेट ले चुकी हैं। 50 ओवर के फॉर्मेट में उन्होंने 58 मैचों में 80 विकेट अपने नाम किए हैं। 2014 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना एकमात्र टेस्ट मैच भी खेला।

चार विश्व कप और यादगार प्रदर्शन

पूनम ने 2017 और 2022 के वनडे विश्व कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। 2017 वनडे विश्व कप में उनकी गेंदबाजी ने भारत को फाइनल तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा 2018 और 2020 के टी20 विश्व कप में भी उन्होंने अपनी घातक स्पिन से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया।

साल 2019 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया। हालाँकि, 2022 के बाद से पूनम भारतीय टीम से बाहर चल रही हैं।

क्या होगा आगे

पूनम यादव की कहानी उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो सामाजिक दबाव के बावजूद खेल में करियर बनाना चाहती हैं। 32 वर्षीय इस स्पिनर की वापसी की संभावनाएँ भले ही अनिश्चित हों, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट में उनका योगदान अमिट रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी स्तर पर लड़कियों को अभी भी वही पुराने तानों का सामना करना पड़ता है। पूनम का 2022 के बाद टीम से बाहर होना भी सवाल उठाता है कि अनुभवी खिलाड़ियों के लिए वापसी का रास्ता कितना सुगम है। उनकी विरासत सिर्फ विकेटों में नहीं, उन लड़कियों में भी है जो आगरा जैसे शहरों में स्टेडियम का रास्ता ढूँढ रही हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूनम यादव कौन हैं और वे किस राज्य से हैं?
पूनम यादव भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार स्पिन गेंदबाज हैं, जिनका जन्म 24 अगस्त 1991 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ। टी20 और वनडे दोनों फॉर्मेट में उन्होंने अपनी घूमती गेंदों से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
पूनम यादव ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू कब किया?
पूनम यादव ने 2013 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू किया। डेब्यू के महज 7 दिन बाद ही वह वनडे टीम में भी शामिल हो गईं।
पूनम यादव ने कितने विश्व कप खेले हैं?
पूनम यादव ने कुल 4 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है — 2017 और 2022 के वनडे विश्व कप, तथा 2018 और 2020 के टी20 विश्व कप। 2017 वनडे विश्व कप में उनकी गेंदबाजी ने भारत को फाइनल तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
पूनम यादव के अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े क्या हैं?
पूनम यादव ने 72 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 98 विकेट लिए हैं। वनडे फॉर्मेट में उन्होंने 58 मैचों में 80 विकेट अपने नाम किए हैं। इसके अलावा उन्होंने 2014 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच भी खेला।
पूनम यादव को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने पूनम यादव को 2019 में प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया। यह पुरस्कार खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है और यह उनके करियर की सबसे बड़ी सरकारी मान्यता है।
राष्ट्र प्रेस
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